यहां पर आपको इनकम टैक्स के 7 नियमों को बताएंगे जो कि 1 सितंबर से बदल जाएंगे।
1 सितंबर से कई सारे नियमों में बदलाव हो रहा है जैसे कि बैंक के नियम और इनकम टैक्स के नियम बदल रहे हैं। वैसे तो बजट में इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणाएं 1 अप्रैल से लागू होती हैं लेकिन इस बार वित्त वर्ष 2019-20 का पूर्ण बजट इस साल आम चुनाव के बाद जुलाई में पेश हुआ है इसलिए कई टैक्स बदलाव 1 सितंबर 2019 से लागू होंगे। यहां पर आपको हम बताएंगे कि वो 7 नियम कौन से हैं जिनमें बदलाव होंगे।
बैंक खाते से कैश निकालने पर TDS
बैंकों से कैश निकालने के मामले में एक साल के दौरान बैंक, को-आपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस में खाते से एक करोड़ रुपये से ज्यादा निकालते हैं तो सितंबर से टीडीएस वसूला जाएगा। लोग बड़े मूल्य के कैश ट्रांजेक्शन न करें, इस उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
प्रॉपर्टी खरीदने पर अतिरिक्त सुविधाओं के भुगतान पर TDS
1 सितंबर से यदि आप कोई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो टीडीएस काटने के लिए आपको थोड़ा ज्यादा कैलकुलेशन करना होगा। कैलकुलेशन में आपको क्लब मेंबरशिप फीस, कार पार्किंग फीस, इलेक्ट्रिसिटी फीस जैसी अन्य सेवाओं के लिए किए जा रहे भुगतान को भी ध्यान में रखना होगा।
कॉन्ट्रैक्टर और पेशेवरों को भुगतान पर TDS
एक सितंबर से कॉन्ट्रैक्टर और पेशेवरों को 50 लाख रुपये (सालाना) से ज्यादा किए गए भुगतान पर 5 प्रतिशत की दर से टैक्स टीडीएस काटना होगा। इसका मतलब यह है कि अगर कोई घर की मरम्मत, शादी-ब्याह या किसी अन्य काम के लिए पेशेवर को इस सीमा से ज्यादा भुगतान करता है तो इस पर टैक्स काटना होगा।
जीवन बीमा पर टीडीएस
लाइफ इंश्योरेंस के मैच्योर होने पर मिली रकम अगर टैक्सेबल है तो कुल इनकम वाले हिस्से पर 5 फीसदी की दर से टीडीएस काटा जाएगा। कुल इनकम वाले हिस्से को कैलकुलेट करने के लिए कुल प्राप्त हुई राशि में से दिए गए इंश्योरेंस प्रीमियम को घटाया जाता है।
बैंकों को 50 हजार से कम के ट्रांजेक्शन पर भी देनी पड़ सकती है जानकारी
अभी बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को एक सीमा तक किए गए ट्रांसजेक्शन की जानकारी देनी पड़ती थी। यह सीमा 50,000 रुपये या उससे अधिक थी। लेकिन, अब सरकार ने इसका दायरा बढ़ा दिया है। एक सितंबर से बैंकों को इससे कम मूल्य के ट्रांजेक्शन की भी जानकारी देनी पड़ सकती है।
आधार लिंक हो पैन नहीं तो होगा अमान्य
जुलाई में पेश बजट 2019 से पहले के नियमों के अनुसार, एक तय समयसीमा के अंदर आधार के साथ शामिल नहीं हुए पैन अवैध हो जाते हैं। इसका मतलब यह है कि जिनके पैन अवैध होते हैं, उन्हें बगैर पैन के मान लिया जाता है।
फिलहाल, पैन का इस्तेमाल करते हुए पिछले ट्रांसजेक्शन की वैधता बनाए रखने के लिए बजट 2019 में नियम बदल गए। इसमें कहा गया है कि निर्धारित समयसीमा के अंदर पैन को आधार से लिंक नहीं किया गया तो यह अमान्य होने की बजाय ये इनऑपरेटिव हो जाएगा।
पैन की जगह आधार हो सकता है इस्तेमाल
बजट 2019 में एक और बड़ी घोषणा हुई, वह पैन और आधार की इंटर-चेंजियाबिलिटी यानी आपस में अदला-बदली। वाधवा ने कहा, फिलहाल, पैन के बदले आधार को कुछ तय ट्रांसजेक्शन के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
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