नई दिल्ली। अर्थशास्त्री मेन्स इनरवेयर की बिक्री के ट्रेंड से अर्थव्यवस्था में मंदी का पता लगा लेते हैं। हालांकि आमलोग यह सोच कर चक्कर में पड़ सकते हैं। इसके पीछे एक पूरा अर्थशास्त्र है। दरअसल मेन्स इनरवेयर कि बिक्री से भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की स्थिति के संकेत मिल रहे हैं। भारत की 4 बड़ी अंडरवेयर बनाने वाली कंपनियों के तिमाही नतीजे कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। वैसे प्रमुख अर्थशास्त्रियों के अनुसार 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' ने वर्ष 1990 के बाद 2001 और 2007 में भी ऐसे ही संकेत दिए थे। यह संकेत अमेरिकी मंदी से ठीक पहले भी मिले थे।
1970 में तैयार हुआ था इंडेक्स
अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के पूर्व अध्यक्ष एलन ग्रीनस्पैन ने इनवियर की बिक्री को लेकर एक इंडेक्स 1970 में तैयार किया था। इस इंडेक्स को 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' कहा जाता है। इस इंडेक्स में पुरुषों के अंडरवेयर की बिक्री में आई गिरावट से अर्थव्यवस्था की खराब हालत के संकेत को समझा जाता है।
भारत में क्या है स्थिति
मीडिया में आई जानकारी के अनुसार भारत में 4 बड़ी मेन्स इनरवेयर कम्पनियों के तिमाही नतीजे 10 साल में सबसे खराब रहे हैं। इसका मतलब है कि इन कम्पनियों की बिक्री में कमी आई है। ऐसा होने से इनका लाभ कम हुआ। जॉकी इनरवेयर की बिक्री में 2 प्रतिशत की वृद्धि रही है। साल 2008 के बाद से यह सबसे खराब स्थिति है। वहीं डॉलर इंडस्ट्रीज की बिक्री में 4 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा वीआईपी क्लॉथिंग की बिक्री में 20 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। एक अन्य कंपनी लक्स इंडस्ट्रीज की बिक्री लगभग स्थिर ही रही है।
जानें इसका मतलब क्या है
'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' की जानकारी रखने वालों के अनुसार मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स इस वक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का संकेत दे रहा है। यह संकेत भारत में भी मिल रहे हैं। मेन्स इनरवेयर की बिक्री में कमी से संकेत से लग रहा है कि धीरे-धीरे दुनिया की अर्थव्यवस्था सुस्ती की चपेट में आ रही है।
इस उदाहरण से समझें पूरी बात
जानकारों के अनुसार यदि मंदी होगी तो खर्च में कटौती के लिए पेरेंट बच्चों के डायपर पर खर्च कम कर देते हैं। इससे उसकी बिक्री गिर जाती है। ऐसे में डायपर कम बदलने से बच्चों को रैशेज ज्यादा होते हैं। ऐसे में डायपर रैश क्रीम की बिक्री बढ़ती है। इसी तरह मंदी के दौरान पुरुष खर्च बचाने के लिए अपने अंडरवेयर की खरीद कम देते हैं। इस कारण उसकी बिक्री में कमी दर्ज होती है। जैसे ही इसकी बिक्री गिरती है, 'मेन्स अंडरवेयर इंडेक्स' संकेत देने लगता है कि मंदी की शुरुआत हो रही है।
प्यार-मोहब्बत पर ऐसे में बढ़ जाता है खर्च
अगर अर्थव्यवस्था में मंदी आ रही हो तो डेटिंग इंडिकेटर भी इसकी जानकारी देने लगता है। अमेरिका में स्थित ऑनलाइन डेटिंग सर्विस मैच डॉट काम ने डेटिंग और मंदी के पैटर्न को विस्तार से समझाया है। इसके अनुसार जब कम्पनियां आर्थिक रूप से दिक्कतों में होती हैं, तो कर्मचारियों के बीच डेटिंग बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अपने दुखों को बांटने के लिए डेटिंग साइट्स पर साथी खोजने लगते हैं। 2008 की वैश्विक मंदी के वक्त चौथी तिमाही में डेटिंग साइट की व्यस्तता 7 साल में सबसे ज्यादा दर्ज की गई थी।
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