नई दिल्ली। मोदी सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बांड बेचने की योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत लोगों को सस्ते में सोना खरीदने का मौका दिया जाता है। इस साल सॉवरेन गोल्ड बांड के तीसरे चरण की शुरुआत आज से हो रही है। मोदी सरकार के सॉवरेन गोल्ड बांड में 9 अगस्त 2019 तक निवेश किया जा सकता है। अगर आप इस बार सॉवरेन गोल्ड बांड नहीं खरीद पाते हैं तो चिंता की बात नहीं है, मोदी सरकार इसकी अगले चरण की बिक्री 9 सितंबर 2019 से शुरू करेगी। जो लोग इस बार गोल्ड बांड खरीदेंगे उनको यह बांड 14 अगस्त को जारी कर दिए जाएंगे। लेकिन अगर आप इन गोल्ड बांड में निवेश करना चाहते हैं तो इसके नियम और इसे खरीदने की जानकारी जरूर कर लें। आइये इसे विस्तार से जानते हैं।
जानें सॉवरेन गोल्ड बांड में निवेश के नियम
सॉवरेन गोल्ड बांड योजना में नियम तय किए गए हैं। इसके तहत निवेश करने वाला व्यक्ति एक वित्तीय साल में अधिकतम 500 ग्राम गोल्ड खरीद सकता है। वहीं कम से कम 1 ग्राम गोल्ड खरीदना होगा। इस योजना में निवेश करने वालों को टैक्स का फायदा भी मिलता है। सॉवरने गोल्ड बॉन्ड की अवधि 8 वर्ष है, लेकिन इन्हें 5वें वर्ष में बेचा जा सकता है।
जानिए कितना सस्ता पड़ता है सोना
2 अगस्त 2019 के हिसाब से सोने की बाजार कीमत 3,636 रुपये प्रति ग्राम थी। वहीं इस स्कीम के तहत 3,499 रुपये प्रतिग्राम की दर पर सोना खरीदने की छूट मिल रही है। वहीं अगर कोई डिजिटल माध्यम से भुगतान करता है तो उसे 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट औश्र मिलेगी। यानी डिजिटल माध्यम से सॉवरेन गोल्ड बांड के लिए ऑनलाइन पेमेंट करने वालों को यह 3,399 रुपये प्रति ग्राम पड़ेगा। इस प्रकार लोगों के पास आज के बाजार मूल्य से करीब 237 रुपये कम कीमत पर गोल्ड खरीदने का मौका मिल रहा है।
कहां से खरीद सकते हैं सॉवरेन गोल्ड बांड
सॉवरेन गोल्ड बांड बैंकों, डाकघरों, एनएसई और बीएसई के अलावा स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया से भी खरीदा जा सकता है। सॉवरेन गोल्ड बांड की बैंकों से ऑनलाइन खरीदे भी हो सकती है।
सॉवरेन गोल्ड बांड खरीदने के लिए चाहिए ये दस्तावेज
सॉवरेन गोल्ड बांड खरीदने के लिए ग्राहक को जानें (केवाईसी) को पूरा करने लायक दस्तावेज होने चाहिए। केवाईसी दस्तावेजों में मतदाता कार्ड, आधार कार्ड या पैन कार्ड, टैन या पासपोर्ट जैसे दस्तवेजों की जरूरत पड़ती है। हर निवेश के लिए पैन का होना जरूरी हैं।
जानिए निवेश के बाद कितना मिलेगा ब्याज
योजना के तहत आरबीआई सरकार की तरफ से बांड जारी करती है। निवेशक बॉन्ड के लिए पैसे देते हैं, और वह जितना पैसा देते है उसके बदले गोल्ड के अलावा उन्हें ब्याज का फायदा भी होता है। निवेशकों को इस बांड पर प्रतिवर्ष 2.50 फीसदी के हिसाब से सालाना ब्याज मिलता है।
गोल्ड बांड के बदले कर्ज भी मिलता है
सॉवरेन गोल्ड बांड के बदले निवेशक जरूरत पर इनके बदले कर्ज भी ले सकते हैं। इन बांड का उपयोग कर्ज लेने के लिए किया जा सकता है। कर्ज की सीमा समय-समय पर आरबीआई तय करता है।
सॉवरेन गोल्ड बांड क्यों लाई मोदी सरकार
मोदी सरकार सॉवरेन गोल्ड बांड योजना इस लिए लाई थी कि वह सोने की फिजिकल मांग कम करना चाहती थी। इस योजना के तहत सोना खरीदा जा सकता है, लेकिन यह घर ले जाने के लिए नहीं मिलता है। लेकिन सरकार इस बात की गारंटी देती है कि वह बाजार में गोल्ड के दाम के बराबर मूल्य देगी।


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