यहां पर आपको इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए फॉर्म 1 सहज के बारे में बताएंगे।
31 अगस्त, 2019 को वित्तीय वर्ष 2018-19 (आकलन वर्ष 2019-20) के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने के लिए अंतिम दिन है। आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रपत्र ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4, ITR-5, ITR-6 और ITR-7 के रूप में जाने जाते हैं। ITR-1, जिसे सहज के रूप में भी जाना जाता है, का उपयोग किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जो भारत का निवासी है जिसकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और जिसकी 5000 तक की आय वेतन से, घर की संपत्ति से, कृषि से या अन्य स्रोतों (ब्याज आदि) से प्राप्त होती है उसे भी इनकम टैक्स भरते समय दर्शाना होता है।
कुल टर्नओवर की देनी होगी जानकारी
व्यक्तिगत करदाता को अपने वेतन संरचना और संपत्ति से आय के बारे में विस्तार से जानकारी देने की जरूरत है। जबकि छोटे व्यवसायों के लिए GST के तहत दर्ज किये गये उनके सामान और सर्विस टैक्स आईडेंटिफिकेशन नंबर (GSTIN) और टर्नओवर की रिपोर्ट देना आवश्यक है।
वेतन के अलावा जो आमदनी हो रही है उसका भी ब्योरा
नये आईटीआर फॉर्म में करदाता को वेतन के अलावा अलग से फॉर्म में उस आमदनी का भी ब्यौरा देने होगा जिनकी छूट नहीं है, जैसे दूसरी जगहों से प्राप्त आमदनी, अतिरिक्त सुविधाओं का मूल्य और सेक्शन 16 के तहत मिली कटौती के बारे में बताना होगा।
यहां समझें सहज फॉर्म को
इन सभी बातों की जानकारी वेतनभोगी के फॉर्म 16 में मौजूद रहेंगी। एक वरिष्ठ कर अधिकारी ने बताया कि इन सभी बातों का ब्यौरा देने से आईटीआर में स्पष्टता आएगी। यहां पर आपको आईटीआर के सहज फॉर्म के बारे में जानकारी देंगे।
- सहज या ITR-1 क्या है? ITR-1 या सहज एक बेसिक फॉर्म है, जिसे वेतनभोगी वर्ग को भरना होगा।
- सीबीडीटी (CBDT) ने कहा कि ITR-1 को उस व्यक्ति द्वारा दायर किया जा सकता है जो "सामान्य तौर पर भारतीय नागरिक है, जिसकी 50 लाख रुपये तक की आय है, जो वेतनभोगी है, जो प्रॉपर्टी से आमदनी कर रहा है और जो ब्याज से पैसे कमा रहा है"।
- ITR-2 में व्यक्तियों और HUFs (हिंदू अविभाजित परिवार) के लिए व्यवसाय या पेशे के अलावा कहीं और से होने वाली आय भी "तर्कसंगत" है।
- व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार जिनके पास किसी व्यवसाय या पेशे से होनेवाली आय है, तो उन्हें संभावित आय के लिए ITR-3 या ITR--4 भरना होगा। ITR--4 के अंतर्गत, जिनके पास व्यापार और पेशे से मिलने वाले आय हैं उन्हें अपने जीएसटी (GST) पंजीकरण संख्या और उसके टर्नओवर को दिखाना होगा।
- अप्रवासी भारतीयों के लिये इस फॉर्म में कुछ राहत दी गई है। अब अप्रवासी भारतीय क्रेडिट या रिफंड के लिए अपने विदेशी बैंक खातों का विवरण दे सकते हैं। इससे पहले, वे केवल भारत में मौजूद अपने बैंक खातों का डिटेल दे सकते थे।
- हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि नए वित्त वर्ष से, अप्रवासी भारतीयों को ITR-2 भरना होगा, जिसमें सहज (Sahaj) की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारी देनी होगी, सहज अब केवल भारतीय नागरिकों तक ही सीमित है।
- सीबीडीटी ने जानकारी दी है कि पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय 80 साल या उससे ज्यादा के व्यक्तिगत करदाताओं या एक व्यक्ति या एचयूएफ जिसकी आय 5 लाख रुपये से अधिक नहीं है और जिसने किसी रिफंड का दावा नहीं किया है, वे ITR-1 या ITR-4 का इस्तेमाल करते हुए आईटीआर फाइल कर सकते हैं।
- नोटबंदी के तुरंत बाद प्रक्रियात्मक परिवर्तनों के बीच जमा नकदी का खुलासा जरूरी कर दिया गया है। इसके अलावा, सरकार के अनुमानित कर-निर्धारण योजना के तहत भुगतान करने वाले लोगों को अपने GSTIN और GST के तहत दर्ज टर्नओवर का विवरण देना होगा, क्योंकि सरकार इन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर आंकड़ों को जोड़कर इन संस्थाओं के बीच कर चोरी की जांच करना चाहती है।
- जो व्यवसायी और पेशेवर अनुमानित आय का दावा करते हैं उन्हें ITR-4 फाइल करने के दौरान GSTIN डालना होगा। उन्हें जीएसटी रिटर्न के अनुसार सकल आमदनी की जानकारी देनी होगी। ऐसा लगता है कि विभाग इन व्यवसायियों द्वारा दिये गये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों को जोड़ने के लिए इस सूचना का उपयोग करने का इरादा रखती है"।
- फर्म्स के पार्टनर्स को अब आईटीआर-2 के बजाय आईटीआर-3 फाइल करनी होगी।
- आईटीआर दाखिल करने के कुछ फायदें यह है कि यह बैंक कर्ज लेते समय मदद करता है और प्रक्रिया को आसान बनाता है। आईटीआर रसीदों को एड्रेस प्रूफ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ITR फाइल करने से कर विभाग के जुर्माने से भी बचा जा सकता है।
क्रेडिट कार्ड के मामले में
क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने के मामले में, आईटीआर दस्तावेज प्रक्रिया को परेशानी मुक्त बना सकते हैं। यह वीज़ा आवेदन की प्रक्रिया में भी मदद करता है।
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