इस बजट में मोदी सरकार हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की घोषणाएं कर सकती है।
नई दिल्ली: इस बजट में मोदी सरकार हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की घोषणाएं कर सकती है। आपको इस बात की जानकारी दें कि सुस्त अर्थव्यवस्था में जान डालने और लोगों को ज्यादा नौकरी मिलने के अवसर को देखते हुए सरकार ने ऐसा फैसला लिया है। सरकार को कहीं न कहीं इस बात की उम्मीद है कि ऐसा करने से हमें देश के हित में लाभ होगा। यहीं कारण हैं कि सरकार बजट में घर खरीदारों को टैक्स में बड़ी छूट देने का ऐलान कर सकती है। वहीं अफोर्डेबल हाउस खरीदने पर कम ब्याज दर और दूसरा घर खरीदने पर भी फायदा होगा। जानकारी के मुताबकि सरकार का प्लान है कि रियल एस्टेट सेक्टर को कुछ बूस्ट दी जाए, ताकि लोगों के साथ ही सरकार को भी फायदा हो। इस प्रस्ताव की घोषणा 5 जुलाई को पेश होने वाले बजट में की जा सकती है।
ये सुविधा मिल सकती
बता दें कि प्रस्ताव के मुताबिक सरकार अंडर कंस्ट्रक्शन मकानों पर होम लोन पर किसी तरह का कोई ब्याज भी नहीं लेगी। वहीं घर खरीदारों को ब्याज पर ज्यादा छूट देने का भी ऐलान किया जा सकता है। वहीं 2014 में केंद्र सरकार ने ब्याज पर मिलने वाली छूट को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया था। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश भर में अनसोल्ड फ्लैटों की संख्या में कमी आएगी और नए प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकेगा।
प्रति वर्ष 45 से 60 हजार रुपये का फायदा
इस बात से अवगत कराना चाहेंगे कि अगर सरकार यह कदम उठाती है तो फिर 30 फीसदी टैक्स देने वालों को प्रति वर्ष 45 से 60 हजार रुपये का फायदा हो सकता है। जबकि पहले लोगों को दूसरा घर खरीदने पर ब्याज में छूट पाने के लिए क्लेम करना होता था। इसके लिए किसी प्रकार की लिमिट तय नहीं थी। इससे लोगों को किराये की आय पर होने वाले नुकसान को भी कम करने में मदद मिलेगी। वहीं पूरा डिडक्शन तब क्लेम किया जा सकता है, अगर कंस्ट्रक्शन 5 साल के भीतर पूरा होता है। पजेशन (कब्जे) में विलंब होने के कारण इसमें अड़चनें आती हैं। सरकार प्रीकंस्ट्रक्शन पीरियड के लिए कुछ बेनिफिट दे सकती है।
दूसरे मकान के लोन भुगतान पर डिडक्शन
पहले कोई व्यक्ति जिसके पास दूसरा मकान है, वह साल में बिना किसी सीमा के हाउसिंग लोन के भुगतान पर डिडक्शन क्लेम कर सकता था। वहीं वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में इस पर 2 लाख रुपये की सीमा तय कर दी गई। टैक्स जानकारों का कहना है कि इस तरह की बंदिश को हटाने की जरूरत है। इससे करदाताओं को राहत मिलेगी। क्योंकि अधिकतर भारतीयों का मुख्य निवेश रियल एस्टेट में ही है। इस तरह के कदमों से नहीं बिके घरों को बेचने में मदद मिलेगी। इतना ही नहीं यह रियल एस्टेट सेक्टर को सहारा देगा।
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