अब से ये 6 वित्तीय बदलाव आपको करेंगे प्रभावित, जानें कैसे

नई दिल्ली। हर साल सरकार बजट (Budget) में इनकम टैक्स (income tax) नियमों सहित कई बदलाव होते हैं। इनका आप पर सीधा असर पड़ता है। इस बार भी बजट (Budget) में कई ऐसे परिवर्तन हुए हैं, जिनका आप पर सीधा असर पड़ेगा। लेकिन चिंता की बात इसलिए नहीं है कि यह परिवर्तन लोगों को फायदा ही देंगे। इसलिए लोगों को इन नियमों को जानकर इनका फायदा उठाना चाहिए। यहां हम आपको ऐसे ही 6 बदलाव की जानकारी दे रहे हैं, जिनका आप फायदा उठा सकते हैं। इसलिए आपको वित्तीय नियमों में बदलाव (Changes in financial rules) को जरूर जानना चाहिए।

financial rules

जानें पहल बदलाव- 5 लाख की आमदनी टैक्स फ्री
1 अप्रैल 2019 से इनकम टैक्स (income tax) के नियम बदल गए हैं। अब 5 लाख रुपये तक की आय पूरी तरह से टैक्स फ्री (Tax free) हो गई है। इस छूट के लिए गणना इस तरह करनी होगी। इनकम टैक्स बचाने के निवेश और सरकार की तरफ से मिलने वाली छूट के बाद अगर 5 रुपये तक रहती है तो इनकम टैक्स (income tax) नहीं देना होगा। लेकिन अगर सारी छूट निकालने और निवेश के बाद भी कुल इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा रहती है तो इस नियम का फायदा नहीं मिलेगा।

दूसरा बदलाव- स्टैंडर्ड डिडेक्शन (Standard Deduction) बढ़ा

दूसरा बदलाव- स्टैंडर्ड डिडेक्शन (Standard Deduction) बढ़ा

इस बार के बजट में मोदी सरकार (Modi government) ने नौकरीपेशा और रिटायर्ड लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडेक्शन (Standard Deduction) बढ़ा दिया है। पहले स्टैंडर्ड डिडेक्शन (Standard Deduction) जहां 40 हजार रुपये था वहीं अब यह बढ़कर 50 हजार रुपये हो गया है। इसका लाभ भी 1 अप्रैल 2019 से मिलने लगा है। इससे लोगों की 10 रुपये टैक्स फ्री आमदनी बढ़ जाएगी।

तीसरा बदलाव - टीडीएस (TDS) की लिमिट बढ़ी
मोदी सरकार (Modi government) ने इस बजट में टीडीएस (TDS) कटने की लिमिट को बढ़ा दिया है। अब बैंक (bank) या पोस्ट आफिस (post office) से अगर सालाना 40,000 रुपये तक ब्याज मिलेगा तो टीडीएस (TDS) नहीं कटेगा। पहले यह लिमिट 10,000 रुपये की थी। यानी अगर बैंक (bank) या पोस्ट ऑफिस (post office) में अगर 10,000 रुपये से ज्यादा का ब्याज (Interest) मिलता था तो टीडीएस (TDS) काट लिया जाता था। इससे बचने के लिए लोगों को फार्म 15G भर कर देना होता था। टीडीएस (TDS) के बदले हुए इस नियम का फायदा उन लोगों को खासकर मिलेगा जो बैंक और पोस्ट ऑफिस से मिलने वाले ब्याज (Interest) पर जीवन गुजार रहे हैं। ऐसा ज्यादातर रिटायर लोग करते हैं, जिसका उनको फायदा मिलेगा।

चौथा फायदा - दूसरी प्रॉपर्टी (Property) में मिलेगी राहत

चौथा फायदा - दूसरी प्रॉपर्टी (Property) में मिलेगी राहत

अगर किसी के पास अपने रहने के अलावा दूसरा घर है और वह खाली पड़ा है, अभी तक के नियमों के अनुसार उसका एक निश्चित किराया माना जाता था और वह लोगों की आमदनी में जोड़ा जाता था। इसके बाद ही वह व्यक्ति अपनी इनकम टैक्स (income tax) की देनदारी की गणना करता था। ऐसे में उसकी आयकर की देनदारी बढ़ जाती थी। कई बार इस आमदनी को जोड़ने से लोगों का टैक्स स्लैब बदल जाता था, जिससे उन पर इनकम टैक्स की बड़ी मार पड़ती थी। लेकिन अब प्रॉपर्टी (Property) पर लोगों को टैक्स से राहत दे दी गई है। यानी अगर आपके पास दूसरा घर है और वह खाली पड़ा है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।

पांचवां फायदा - दो प्रॉपर्टी (Property) में कर सकते हैं गैपिटल गैन के लाभ का निवेश
अभी तक अगर कोई व्यक्ति अपनी प्रॉपर्टी (Property) बेच कर पैसा अगर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (Long term capital gains) यानी एलटीसीजी (LTCG) में निवेश करता था, तो वह इस पैसे से एक प्रॉपर्टी लेकर अपना टैक्स बचा सकता था। लेकिन अब नियम को बदल दिया गया है। अब इस लॉग टर्म कैपिटल गैन्स (LTCG) के पैसे से लोग दो प्रॉपर्टी (Property) भी खरीद सकते हैं। लेकिन यहां पर 2 शर्त हैं। पहली है कि लॉग टर्म कैपिटल गैन्स (LTCG) 2 करोड़ रुपये से ज्यादा न हो और दूसरी शर्त है कि इसका फायदा जीवन में एक बार ही लिया जा सकता है।

छठवां फायदा - घर खरीदना हो गया सस्ता

छठवां फायदा - घर खरीदना हो गया सस्ता

छठा फायदा जीएसटी काउंसिल की तरफ से आया है। जीएसटी काउंसिल (GST Council) ने फैसला किया है कि 1 अप्रैल से बिल्डर (Builder) घटी दरों पर जीएसटी (gst) लगा सकते हैं। नए नियमों के अनुसार अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट (Under Construction Project) में अब बिल्डर को यह अधिकार है कि वह या तो पुरानी दर 12 फीसदी के हिसाब से जीएसटी वसूले या नई दर 5 फीसदी के हिसाब से वसूलें। हालांकि अगर बिल्डर पुरानी दर से जीएसटी लेगा तो उसे इनपुट क्रेडिट का लाभ मिलेगा, लेकिन नई दर से जीएसटी लेने पर इनपुट केडिट का लाभ नहीं मिलेगा।
इसी तरह से अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable Housing) के लिए भी जीएसटी (gst) की दरों में बदलाव हुआ है। बिल्डर या तो पुरानी दर 8 फीसदी से जीएसटी (gst) लें, या नई दर 1 फीसदी के हिसाब से जीएसटी लें। लेकिन यहां पर शर्त यह है कि अगर 8 फीसदी की दर से जीएसटी लेंगे तो इनपुट क्रेडिट (Input credit) का लाभ मिलेगा, जबकि 1 फीसदी की दर से जीएसटी (gst) लेने पर इनपुट क्रेडिट (Input credit) का लाभ नहीं मिलेगा।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+