बैंक लॉकर के इन शर्तों के बारें में क्‍या आप जानते है?

कई लोग अपनी कीमती चीजों जैसे ज्‍वैलरी (Jewelery) , डॉक्‍युमेंट्स (documents) आदि की सेफ्टी के लिए बैंक में लॉकर (bank locker) लेते हैं।

नई द‍िल्‍ली : कई लोग अपनी कीमती चीजों जैसे ज्‍वैलरी (Jewelery) , डॉक्‍युमेंट्स (documents) आदि की सेफ्टी के लिए बैंक में लॉकर (bank locker) लेते हैं। लेकिन लॉकर खुलवाना आसानी नहीं होता। वहीं कुछ बैंक ऐसे भी होते हैं क‍ि बैंक नियमों का हवाला देते हुए कस्‍टमर (customers) के सामने तरह-तरह की डिमांड (demand) रखते हैं, कुछ सर्विस उन्‍हें देते ही नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ सही जानकारी नहीं होने के चलते कई बार कस्‍टमर भी बैंकों (bank) को सही होने के बावजूद गलत मान लेते हैं। ऐसे में परेशानी कस्‍टमर्स को ही होती है। तो आइए आज हम आपको बैंक लॉकर (bank locker) से जुड़ी कुछ जरुरी जानकार‍ियों से रूबरू करवाएंगे।

कैसे करते हैं  बैंक लॉकर ऑपरेट?

कैसे करते हैं बैंक लॉकर ऑपरेट?

सबसे पहले आपको इस बात से अवगत करा दें कि सरकारी और निजी बैंक (government and private bank) दोनों ही ग्राहकों को लॉकर की सुविधा देते हैं। हर बैंक लॉकर (bank locker) की दो चाबी (keys) होती हैं। एक चाबी कस्‍टमर और दूसरी बैंक के पास होती है। दोनों चाबियां लगने के बाद ही लॉकर खुलता है। इसके अलावा साल में आप कितनी बार लॉकर आपरेट (locker operate) करेंगे, इसकी भी सीमा तय है। यह अलग-अगल बैंकों में अलग-अलग है। तय सीमा के बाद लॉकर ऑपरेट करने के लिए चार्ज देना होता है।

लॉकर के सामान के लिए बैंक जिम्‍मेदार नहीं

लॉकर के सामान के लिए बैंक जिम्‍मेदार नहीं

बता दें कि 2017 में RBI ने एक RTI के जवाब में कहा था कि बैंक लॉकर्स (bank locker) में रखे सामान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। हालांकि, बैंक को लॉकर्स की सुरक्षा के लिए इंतजाम करने होते हैं। साथ ही इनमें रखे कीमती सामान का इंश्योरेंस (insurance) भी नहीं होता। भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा (natural calamity) , आतंकी हमला (Terror attack)या चोरी (theft) आदि होने पर मुआवजा (Compensation) मिलेगा, इसकी गांरटी नहीं होती। लेकि‍न अगर बैंक की लापरवाही के चलते कस्‍टमर का नुकसान हुआ है तो बैंकों को मुआवजा देना होगा। इसके लिए कस्‍टमर को बैंक का दोषी होना साबित करना होगा।

कस्टमर्स क्या कर सकते हैं?

कस्टमर्स क्या कर सकते हैं?

बैंक लॉकर में रखे सभी आइटम्स (items) की लिस्ट बनाकर रखें ताकि हर बार लॉकर खोलने पर आप चेक कर सकें कि आइटम्स पूरे हैं या नहीं। अगर कोई सामान कम दिखता है तो बैंक को इस बारे में बताया जा सकता है ताकि वे जरूरी कदम उठा सकें। वहीं इस बात का भी ध्‍यान दें कि दूसरी महंगी चीजों का पहले से इंश्योरेंस (insurance) करवा लें, उसके बाद लॉकर में रखें। हमेशा वॉल्ट तक आपके साथ आए बैंक इंप्लॉई (bank employee) के जाने के बाद ही लॉकर खोलें और बाद में अच्छे से बंद करें।

बैंक एफडी खुलवा सकते

बैंक एफडी खुलवा सकते

कई बार ऐसा होता है कि लॉकर खुलवाने वाला न ही लॉकर का किराया बैंक को देता है, न ही लॉकर (locker) को ऑपरेट (operate) करता है। ऐसे में बैंक मुश्किल में आ जाते हैं। लॉकर लेने वाला लॉकर के किराया का समय से भुगतान करता रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए बैंक कस्‍टमर (bank customers) को लॉकर देते वक्‍त उन्‍हें FD खुलवाने को कहते हैं। बता दें कि बैंक लॉकर के 3 साल के किराए और किसी कारणवश लॉकर तुड़वाने पर चार्ज वहन करने के अमाउंट जितनी FD खुलवाने के लिए कह सकते हैं।

वेटिंग लिस्‍ट

वेटिंग लिस्‍ट

लॉकर लेने के लिए आपका उस बैंक में खाता होना ज़रूरी है, ताकि समय-समय पर बैंक आपके खाते में से चार्ज लेता रहे। अगर लॉकर खाली नहीं है, तो बैंक लॉकर के अलॉटमेंट के लिए वेटिंग लिस्ट (waiting list) तैयार करता है और आपको वेटिंग नंबर जारी करता है। लॉकर की संख्या सीमित होने के चलते बैंक आसानी से लॉकर नहीं देते। कई बैंकों (bank) में तो काफी लंबा वेटिंग पीरियड होता है। बता दें कि RBI नियमों में वेटिंग लिस्‍ट का बनाने का और लॉकर अलॉटमेंट (Locker allotment) में पार‍दर्शिता रखने का प्रावधान है। बैंकों को यह भी निर्देश है कि वह लॉकर अलॉटमेंट के वक्‍त कस्‍टमर को लॉकर के ऑपरेशन्‍स को लेकर हुए एग्रीमेंट (agreement) की कॉपी मुहैया कराएं।

याद रखने योग्‍य बातें

याद रखने योग्‍य बातें

 

  • सभी खाताधारकों (account holder) के लिए ज़रूरी है कि वे लॉकर की सुविधा लेते वक़्त नॉमिनेशन (nomination) ज़रूर करें। हालांकि एक बार नॉमिनी बनाए जाने के बाद भी आप अपना नॉमिनी (nominee) बदल सकते हैं। खाताधारक की मौत हो जाने पर नॉमिनी को खाताधारक का मृत्यु प्रमाण पत्र व अपना पहचान पत्र उपलब्ध कराने पर लॉकर ऑपरेट करने का अधिकार मिल जाता है।
  • संयुक्त रूप से लॉकर लिए जाने की स्थिति में अगर एक खाता धारक की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक उसके नॉमिनी व दूसरे लॉकर धारक को संयुक्त रूप से लॉकर ऑपरेट (locker operate) करने का अधिकार दे सकता है।
  • बैंक की ज़िम्मेदारी है कि वह आवेदन करनेवाले को नॉमिनेशन सुविधा के फ़ायदे ज़रूर बताए।
  • किसी बच्चे को भी नॉमिनी बनाया जा सकता है, लेकिन क्लेम के समय नॉमिनी के बच्चा (माइनर) होने की स्थिति में क्लेम उसके पैरेंट्स को दिया जाता है।
  • अगर आपने लॉकर का किराया नहीं दिया है और आप बैंक द्वारा नोटिस दिए जाने पर भी बैंक से संपर्क नहीं करते हैं, तो बैंक को आपके लॉकर को तोड़ने का अधिकार है। इसका सर्विस चार्ज भी आपसे ही लिया जाएगा।

 

 

 

 

 

 

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