सिंगल इनकम वाले है आप भी तो इन बातों पर ध्‍यान दें

पैसों का मैनेजमेंट (money managment) सही है, तो कम से कम पैसों में भी सभी ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है।

नई द‍िल्‍ली: पैसों का मैनेजमेंट (money managment) सही है, तो कम से कम पैसों में भी सभी ज़रूरतों को पूरा किया जा सकता है। इसके साथ ही भविष्य के लिए पैसा बचाया भी जा सकता है। फिर भले ही आप घर में अकेले कमानेवाले (Earning alone) हों यानी सिंगल इनकम (single income) वाले हों। ये बात सच हैं क‍ि सिंगल इनकम वालों को थोड़ी परेशान‍ियां भी होती है। लेकिन इन सब के बीच आपको मनी मैनेजमेंट (money managment) करने आनी चाह‍िए। क्‍योंकि पैसे कमाना जितना मुश्किल है उसे खर्च करना उतना ही आसान। कई बार लोगों को खर्च की ऐसी लत लग जाती है कि पैसे बचाने की तरफ़ उनका ध्यान ही नहीं जाता है, जो कि वाकई गलत है। तो आज हम आपको स‍िंगल मनी मैनेजमेंट (single money managment) करने के बारें में बतायेंगे।

बजट बनाएं

बजट बनाएं

अगर आप अपने इनकम (income) की बचत (savings) करना चाहते हैं तो सबसे पहले ज़रूरी है बजट (Budget) बनाना। बजट बनाने से आपको ये अंदाज़ा हो जाएगा कि किस चीज़ पर कितना खर्च करना है और अगर खर्च आपकी इनकम (income) से ज़्यादा हो रहा है तो कहां कटौती करनी है इसका आइडिया भी आपको मिल जाएगा। इतना ही नहीं बजट बनाने से आपको ये भी पता चल जाएगा कि किसी चीज़ पर आप पैसे बर्बाद तो नहीं कर रहें, इससे आप आसानी से फिज़ूलखर्ची पर लगाम लगा सकते हैं।

निवेश करें

निवेश करें

निवेश (investment) करना अच्छा व‍िकल्‍पों में से एक है। आपने हमेशा सुना होगा पैसों के निवेश के बारे में, पर वास्तव में पैसों का निवेश काफ़ी पेचीदा विषय है। तो अगर आप पैसे कमाने के लिए कहीं बाहर नहीं जाते हैं, तो अपने पैसों का निवेश आप अच्छी तरह से कर सकते हैं। इसके लिए बिना किसी जानकारी के निवेश (investment) करना ख़तरनाक हो सकता है। चूंकि आपके पास समय है, तो आप किसी आर्थिक विशेषज्ञ (economic expert) से सलाह-मशवरे के बाद निवेश करके अपनी आर्थिक स्थिति (economic condition) को मज़बूत कर सकते हैं।

बैंक अकाउंट खुलवाएं

बैंक अकाउंट खुलवाएं

सामान्य तौर पर यह देखा गया है कि अगर घर का वह सदस्य, जो पैसे नहीं कमाता, वह अपना बैंक अकाउंट (bank account) नहीं खुलवाता है। लेक‍िन यह ग़लत है, जब घर में एक ही कमानेवाला हो, तो आपका अकाउंट होना बहुतज़रूरी है। उसमें हर महीने आप ख़र्चों और निवेश (investment) के बाद बचे अतिरिक्त पैसे डाल सकते हैं, जिससे बचत होगी। उसे आप एक आपातकालीन व्यवस्था (Emergency arrangement) की तरह उपयोग में ला सकते हैं।

प्री-प्लानिंग करें

प्री-प्लानिंग करें

वहीं दूसरी ओर प्री-प्लानिंग (pre-planning) बहुत ज़रूरी है। यह आदत आपको स़िर्फ पैसों के मामले में ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक तौर पर भी स्वस्थ रखेगी। पैसे का मैनेजमेंट (money management) बहुत ज़रूरी है और यह तब और अनिवार्य हो जाता है, जब घर की आर्थिक ज़िम्मेदारी (financial responsibility) किसी एक व्यक्ति पर हो। प्री-प्लानिंग का मतलब है कि जैसे आपको पता है कि दो महीने बाद आपको किसी शादी या समारोह में शरीक होने कहीं शहर से बाहर जाना है, तो आप अपनी तैयारी अभी से शुरू कर दें। फिर चाहे वह शादी की ख़रीददारी हो, तोह़फे हों या फिर आने-जाने की टिकट। धीरे-धीरे अपनी तैयारी शुरू कर दें। इससे आपको वाकई बहुत ही सहुल‍ित भी होगी।

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कम करें

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कम करें

क्रेडिट कार्ड (credit card) का इस्तेमाल तब करें, जब बहुत ज़रूरी हो जाएं। हमेशा कैश में ही भुगतान करने की कोशिश करें और अगर कभी क्रेडिट कार्ड (credit card) से शॉपिंग करना ही पड़े तो भुगतान जल्द से जल्द कर दें, वरना ब्याज़ ज़्यादा देना पड़ेगा। इस बात का भी ध्‍यान दें कि कोई भी सामान इंस्टॉलमेंट (installment) में न खरीदें इससे ब्याज़ (interest) के रूप में आपको अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते है। इसलिए बेहतर होगा कि पहले बचत करें और फिर वो सामान खरीदें।

लक्ष्य तय करें

लक्ष्य तय करें

अगर आप ये तय कर लेगें कि आज से दो साल बाद आपको मकान खरीदना है या नई गाड़ी लेनी है तो अपने इस लक्ष्य (goal) पर फोकस (focus) करके आपके लिए बचत (savings) करना थोड़ा आसान हो जाएगा। क्‍योंकि यह बात भी सच हैं कि एक बार लक्ष्य तय कर लेने पर उसकी प्रति प्रतिबद्धता (Commitment) आपको सेविंग (saving) करने के लिए विवश करेगी।

 

 

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