यहां पर आपको बताएंगे कि आधार से बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर को कैसे डी-लिंक करें।
सुप्रीम कोर्ट ने कल आधार की वैधता पर अपना फैसला पारित किया। हालांकि यह कहा गया है कि आधार एक वैध दस्तावेज है, अब लोगों को अपने मोबाइल नंबर और बैंक खातों को जोड़ने के लिए मजबूर करना असंवैधानिक है।
इससे फायदा उन लोगों को होगा जिन्होंने अभी तक अपना आधार बैंक अकाउंट या मोबाइल नंबर से लिंक नहीं किया है। पर जिन लोगों ने पहले लिंक किया हुआ है उनका क्या होगा?
- डी-लिंक करने के लिए सबसे पहले आपको बैंक, ई-वॉलेट और मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाना होगा।
- इसके कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट पर लॉग-इन करें और अपने पर्सनल प्रोफाइल वाले विकल्प पर जाएं।
- इसके बाद यहां डीलिंक करने के विकल्प तलाश करें। यहां से डीलिंक होने के बाद इसका डीलिंक होने का एक एसएमएस भी मिलेगा।
- बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर आधार डीलिंक का विकल्प नहीं मिलने की स्थिति में अपनी ब्रांच से संपर्क करें। बैंकों ने इसके लिए एक फॉर्म भी जारी करना शुरु किया है।
- बैंक से अपने फॉर्म के बदले स्वीकृति पत्र लेना न भूलें। इस पर बैंक की मुहर या सील होनी चाहिए।
- आप अपने बैंक को उसकी ऑफिशियल ई-मेल आईडी पर भी भेज सकते हैं। इसके लिए कई बैंकों ने अपनी ई-मेल आईडी शेयर करना शुरू किया है।
- बैंक और टेलीकॉम ऑपरेटर्स को आप एक फॉर्म भरकर भी भेज सकते हैं। इसके लिए कस्टमर सर्विस पर रिक्वेस्ट की जा सकती है।
ऐसे भरें डी-लिंक आधार नंबर फॉर्म
आधार नंबर डी-लिंक करने के हेतु आवेदन
तारीख:
ब्रांच मैनेजर:
बैंक का नाम:
पता:
विषय: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मेरे बैंक अकाउंट/मोबाइल नंबर/ई-वॉलेट से आधार नंबर को डी-लिंक किया जाए।
बैंक खाता संख्या/मोबाइल नंबर/ई-वॉलेट संख्या....
इसके बाद आप अपने मैसेज लिख सकते हैं जिसमें आप अपने आधार को डी-लिंक करने का अनुरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे सकते हैं। इसमें आपको ज्यादा जानकारी नहीं देना है। सिर्फ अपने निजता के अधिकार को रखते हुए डीलिंक करने के लिए कहना है।
डी-लिंक के लिए कॉल सेंटर से भी कर सकते हैं बात
इस बीच, आधार के साथ बैंक खाते और मोबाइल कनेक्शन को डी-लिंक करने के लिए, आप संबंधित कॉल सेंटर को कॉल कर सकते हैं या उन्हें डी-लिंक करने के लिए अनुरोध करने के लिए ईमेल कर सकते हैं। ऐसा करने तक प्रक्रिया नियामक द्वारा परिभाषित नहीं की जाती है, संस्थाएं अपनी प्रक्रियाओं का पालन कर सकती हैं। किसी को बैंक शाखा में जाना पड़ सकता है और खाते को हटाने के लिए एक लिखित अनुरोध करना पड़ सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि डी-लिंक प्रक्रिया पूरी हो गई है या नहीं।
इन चीजों के लिए आधार नंबर देने की नहीं जरुरत
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश के अनुसार आधार पूरी तरह से वैकल्पिक है। जनधन खाता, बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन, स्टॉक डीलिंग्स, पासपोर्ट, प्रोविडेंट फंड, पेंशन, सैलरी और एडमिशन के लिए आधार देने की जरुरत नहीं है।
आधार जहां पर जरुरी होगा
आपको आधार पैन कार्ड बनवाने के लिए जरुरी होगा। इसके बाद आधार को पैन कार्ड से लिंक भी कराना होगा। लिंक कराने का फायदा वित्तीय स्थितियों में लाभ के लिए मिलेगा। आयकर रिटर्न भरने के लिए भी आधार नंबर की डिटेलस फाइल करनी होगी। इसके लिए आधार को पैन से लिंक होना जरुरी है। सरकार की ओर से दी जाने वाली लाभकारी योजनाओं में सब्सिडी का लाभ लेने के लिए भी आधार अनिवार्य होगा।


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