सैलरी इनकम से होम लोन लिए हैं तो कैसे फाइल करें ITR?

इस लेख में आपको बताएंगे कि आईटीआर कैसे फाइल करें जब किसी को आय केवल वेतन से प्राप्‍त हो रही हो एवं उसने स्वयं की निवासीय गृह संपत्ति के लिए होम लोन ले रखा हो।

प्रति वर्ष ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई होती है, जब तक कि सरकार द्वारा तारीख बढ़ाई ना जाये। यहाँ कई तरह के आईटीआर फॉर्म होते हैं जिनमे से हमें अपनी इनकम की प्रकृति के आधार पर किसी एक फॉर्म को चुनना होता है।

इस लेख में आपको बताएंगे कि आईटीआर कैसे फाइल करें जब किसी को आय केवल वेतन से प्राप्‍त हो रही हो एवं उसने स्वयं की निवासीय गृह संपत्ति के लिए होम लोन ले रखा हो। स्वयं की निवासीय गृह संपत्ति से तात्पर्य ऐसे आवास से है जिसे करदाता ने पूरे वर्ष भर के दौरान स्वयं के रेसिडेंस (निवास) के लिए उपयोग किया हो।

आईटीआर-1

आईटीआर-1

आईटीआर-1 के अनुसार- ऐसे व्यक्ति को "आईटीआर-1 सहज" फाइल करना होगा "जिसे गैर-साधारण रेसिडेंट के अलावा रेसिडेंट व्यक्ति करदाता जिसकी आय वेतन, एक गृह संपत्ति, अन्य स्त्रोत (ब्याज आदि) से हो और कुल आय 50 लाख रुपये तक हो" के द्वारा उपयोग किया जाता है।

आईटीआर-1 कैसे फाइल करें-

आईटीआर-1 कैसे फाइल करें-

आईटीआर-1 में 5 भाग होते है - ए, बी, सी, डी, एवं ई।

भाग A - व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पता, आधार संख्या (यह अनिवार्य है) आती है।

भाग B - वेतन से आय एवं गृह लोन पर चुकाया गयी ब्याज की राशि।

भाग C - विभिन्न कटौतियां, जिन्हे आप सेक्शन 80C और इसी तरह के अन्य सेक्शन के अंतर्गत प्राप्त करते है|

भाग D - यहाँ आप कुल आय की गणना करते हैं। जैसे आय घटाव कटौतियां और इस राशि पर कुल कर देय।

भाग E - बैंक खाते की जानकारियां।

 

आईटीआर-1 के विभिन्न भागों को कैसे भरें-

आईटीआर-1 के विभिन्न भागों को कैसे भरें-

भाग बी
चरण 1 : उपयुक्त स्थान पर "वेतन शीर्षक से होने वाली आय" दर्ज करें। (बी1) इस डाटा को भरने के लिए फॉर्म 16 की मदद लें, जो आपको अपने नियोक्ता की ओर से मिला होगा।

चरण 2 : अगर आपके पास स्वयं के अधिपत्य की गृह संपत्ति है तो सम्बंधित बॉक्स में टिक करें।

चरण 3 : सम्बंधित बॉक्स में "उधार ली गयी पूंजी पर देय ब्याज" की राशि दर्ज करें। यदि यह आपके पास नहीं है तो अपने लेन्डर से पूर्व वर्ष के दौरान चुकाए गए मूलधन तथा ब्याज का ब्रेकअप स्टेटमेंट देने के लिए कहें। स्वयं निवासीय गृह संपत्ति का वार्षिक मूल्य शून्य होगा और इसलिए मूल्य नेगेटिव में दिखेगा। (बी2)

चरण 4 : उसके बाद 'अन्य स्त्रोत से आय" की राशि दर्ज करें - इसमें फिक्स्ड डिपॉज़िट और अन्य कर योग्य विनियोगों पर अर्जित ब्याज शामिल होती है।

चरण 5 : सकल कुल आय (जीटीआई) = बी1 + बी2 + बी3 = बी4

भाग सी
चरण 6 : भाग सी में सेक्शन 80 सी, 80 डी आदि में प्राप्त कटौतियों की राशि दर्ज करें और उनका योग करें। (सी1)
चरण 7 : कुल आय प्राप्त करें। जैसे जीटीआई (बी4) घटाव सी1 = सी2

भाग डी
चरण 8 : सी2 की राशि के आधार पर, भाग डी में कर की गणना की जाएगी।

समझने के दृष्टिकोण से कल्पित आंकड़ों के साथ एक उदाहरण प्रस्तुत है।

यह मान लेते हैं कि-
वेतन से आय : 9 लाख रुपये

अन्य स्त्रोत से आय : 1 लाख रुपये

वर्ष के लिए गृह लोन पर चुकाया गया ब्याज : 2.4 लाख रुपये

कटौतियां : 2 लाख रुपये (सेक्शन 80सी : 1.30 लाख रुपये; सेक्शन 80डी: 20,000 रुपये; सेक्शन 80सीसीडी : 50,000 रुपये (1बी)

 

अब कृपया ध्यान दें-

अब कृपया ध्यान दें-

स्वयं निवासीय गृह संपत्ति के मामले में, सेक्शन 24(बी) के अधीन कटौती कि राशि 2 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती है। इस शर्त के साथ कि लोन 1 अप्रेल, 1999 या उसके बाद लिया गया हो और यह निर्माण या अधिपतन के लिए हो ना कि रिपेयर एवं मरम्मत के लिए।

आगे, सेक्शन 24(बी) की कटौती पाने के लिए निर्माण या अधिपतन पूंजी उधार लेने वाले वित्तीय वर्ष के अंत से 5 वर्षों के भीतर पूर्ण हो जाना चाहिए। इसलिए अधिकतम नेगेटिव वैल्यू जो कि चरण 3 में दिखाई जाएगी वो 2 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती है। यदि उपरोक्त में से एक भी शर्त पूर्ण नहीं होती है तो यह 2 लाख रुपये की सीमा घटकर 30,000 रुपये हो जाएगी।

 

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