यहां पर आपको बताएंगे कि एडवांस टैक्स यानि अग्रिम कर की गणना किस तरह से की जाती है।
जब किसी करदाता की एक वित्तीय वर्ष में कुल कर दायित्व 10,000/- रुपये से अधिक हो जाये तो करदाताओं के लिए एकमुश्त कर भुगतान के भार को काम करने के लिए आयकर विभाग ने उस परिस्थिति में अग्रिम कर भुगतान को 4 किश्तों में चुकाना अनिवार्य किया है।

यहां जो गणना की जाएगी वह सम्बंधित अवधि की संभावित आय के पूर्वानुमान के आधार पर की जाएगी। यहां यह ध्यान देने योग्य है कि एक कर्मचारी के मामले में, उसका नियोक्ता टीडीएस (स्त्रोत से कर कटौती) के रूप में अग्रिम कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।
फिर भी यदि उसी श्रेणी के करदाता को किसी अन्य स्त्रोत से भी आय प्राप्त होती है तो भी उसे अग्रिम कर का भुगतान बिना किसी विलम्ब के करना होगा। अन्यथा इस भूल पर लागू होने वाली पेनल्टी के लिए तैयार रहना होगा।
साथ ही, कुछ अन्य पेशेवर जैसे डॉक्टर, वकील जिनकी सालाना सकल प्राप्तियां 2,00,000/- रुपये से कम है तो उन्हें अनिवार्य रूप से अग्रिम कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। परन्तु यदि एडवांस टैक्स का भुगतान करना हो तो वह सम्बंधित वित्तीय वर्ष के 15 मार्च से पहले संपन्न हो जाना चाहिए।
एडवांस टैक्स की गणना
सम्बंधित वित्तीय वर्ष की अनुमानित आय को सकल कुल आय (जीटीआई ) के स्थान पर प्रयुक्त करेंगे और प्राप्त छूटों को घटाने के बाद कुल आय (टैक्सेबल इनकम) प्राप्त होगी जिस पर सम्बंधित अवधि में प्रचलित टैक्स स्लैब के आधार पर अग्रिम कर की गणना करेंगे।
इस उद्देश्य के लिए एक व्यक्ति अपनी पूर्व वर्ष की कर योग्य आय को भी इस गणना के लिए आधार बना सकता है और एक उचित स्तर निर्धारित कर सकता है, जिस पर इस वर्ष का अग्रिम कर चुकाया जाना। वास्तविक आय से भिन्नता की स्थिति में वित्तीय वर्ष के अंत में शेष कर राशि का भुगतान कर दिया जाना चाहिए।


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