पुर्नपूंजीकरण बॉण्ड (रिकैपिटलाइजेशन बॉण्ड) (RCBs) क्या होते हैं?

रिकैपिटलाइजेशन बॉण्ड ऐसे बॉण्ड होते हैं जो सरकार के आदेश पर सरकारी बैंकों के पुनः पूंजीकरण के लिए जारी किए जाते हैं। NPAs के उच्च स्तर से प्रभावित सरकारी बैंकों (PSB) में पूंजी लगाने के लिए 1.35 लाख करोड़ रूपये के बांड जारी किए जाने हैं। सरकार ने 24 अक्टूबर 2017 को 2 लाख 11 हज़ार करोड़ का पुनर्पूंजीकरण बांड प्रस्तावित किया है।

पुर्नपूंजीकरण का अर्थ है किसी इकाई के ऋण को कवर करने के लिये ईक्विटी का पैसा लगाना। सरकारी बैंकों (PSB) के मामले मे उनके NPAs(ऋण) इक्विटी की पूंजी से प्रतिस्थापित किया जाता है।

बॉन्ड की बिक्री से कमाया गया पैसा सरकारी बैंकों में सरकारी इक्विटी फंडिंग के रूप में डाला जाता है। बॉन्ड इश्यू करना और कामकाजी तंत्र सरकार द्वारा तय किया जायेगा।

RCBs कौन जारी करेगा?

RCBs कौन जारी करेगा?

बांड इश्यू कैसे किये जायेंगे इस संबंध मे अभी तक कोई अंतिम निर्णय नही हुआ है। फिर भी, यह संभावना है कि RCBs एक होल्डिंग कंपनी द्वारा जारी किए जाएंगे जो विशेष रूप से सरकारी बैंकों में सरकारी इक्विटी रखने के लिए बनाई गई हो। अगर ऐसी कोई कंपनी बॉन्ड इश्यू करती है तो बॉन्ड सरकारी ऋण के तहत नही आयेगा और इस तरह राजकोषीय घाटा नही बढ़ेगा।वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को यह विचार पसंद आया है।

वित्त मंत्री ने सरकार के विचार को बताते हुए कहा की "एक ऐसी होल्डिंग कंपनी का गठन किया जा सकता है जिसमे सभी सरकारी बैकों मे सरकार का हिस्सा स्थानांतरित किया जा सके"। जेटली ने यह भी कहा है की अगर सरकार सीधे बॉन्ड इश्यू ना करना चाहे तो ऐसी कंपनी से बॉन्ड इश्यू करवाया जा सकता है।

बॉन्ड किसी अलग इकाई द्वारा भी जारी किए जा सकते हैं लेकिन उनमे सरकार की गारंटी होगी।

 

पुर्नपूंजीकरण बॉण्ड का इश्यू कैसे काम करेगा?

पुर्नपूंजीकरण बॉण्ड का इश्यू कैसे काम करेगा?

होल्डिंग कंपनी द्वारा इश्यू किए गये बॉन्ड मे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक खुद सदस्यता लेंगे। बॉन्ड इश्यू करने से मिले फंड का स्तेमाल सरकारी बैंकों के शेयर लेने मे होगा और इसे अतिरिक्त सरकारी इक्विटी या पूंजी माना जाएगा। इस तरह, सरकारी बैंकों की पूंजी बढ़ा दी जाएगी जिससे उन्हें वर्तमान NPA समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।

बैंकों के पास धन की है कमी

बैंकों के पास धन की है कमी

फिलहाल बैंकों के पास पर्याप्त धन है क्योंकि पिछले कुछ सालों में ऋण वृद्धि कम थी। इसके अलावा, बैंकों के पास निस्तारण अवधि जमा के रूप मे धन है। कम से कम 1 लाख करोड़ रुपय बैंक मे होने की संभावना है जहां जमाकर्ताओं को आय के स्रोत के लिए स्पष्टीकरण देना होगा।

बैंकों को NPA समस्या से निपटने के लिये पुनर्पूंजीकरण कैसे मदद करेगा?

बैंकों को NPA समस्या से निपटने के लिये पुनर्पूंजीकरण कैसे मदद करेगा?

सरकार बॉन्ड इश्यू करके सरकारी बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देगी। किस बैंक को कितनी पूंजी मिलेगी यह बाद मे निर्धारित होगा और यह उनकी NPA समस्या की गहराई पर निर्भर करेगा।पुनर्पूंजीकरण से आए धन का स्तेमाल करके बैंक अपने ऋण चुका सकता है। बेसल 3 के Norms के अनुसार ईक्विटी(टीयर 1 कैपिटल) जैसी न्यूनतम उच्च गुणवत्ता वाली पूंजी होनी चाहिए। Norm के अनुसार न्यूनतम टीयर ई पूंजी 7% है। कई सरकारी बैंकों मे यह पूंजी नही है।

सरकारी राजकोषीय घाटे पर पुनर्पूंजीकरण बांड का क्या असर होगा?

सरकारी राजकोषीय घाटे पर पुनर्पूंजीकरण बांड का क्या असर होगा?

बॉन्ड की बिक्री से मिला हुआ धन राजकोषीय घाटे के रूप मे नही होगा लेकिन इसका ब्याज भुगतान राजकोषीय घाटे का हिस्सा होगा।मुख्य आर्थिक सलाहकार के अनुमान के अनुसार, वार्षिक ब्याज भुगतान का खर्च लगभग 9 000 करोड़ रुपय होगा।पूंजी प्राप्त करने वाले सरकारी बैंकों के मुनाफ़े से ब्याज भुगतान व्यय को कवर किया जाएगा।

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