बजट से आम जनता खासकर कि नौकरीपेशा मध्यवर्ग को बहुत ज्यादा उम्मीदें थीं पर बजट उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। वित्तमंत्री ने एक हाथ थोड़ी राहत दी है दूसरे हाथ सेस का जोर का झटका धीरे से दे दिया है। अगर आप एक वेतन भोगी व्यक्ति हैं तो आपके लिए ये जानना जरूरी है कि आखिर 40,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन यानि कि मानक कटौती क्या चीज है और ये आपकी सैलरी स्लिप पर कैसे असर डालेगी।

अब जरा आप अपनी सैलरी स्लिप निकाल लीजिए और हम जैसे बता रहे हैं वैसे ही उसके साथ आप आंकड़ो का मिलान करिए। इसके बाद आपको समझ आएगा कि बजट में राहत देने के साथ झटका कैसे दिया गया है।
मान लीजिए आपकी वार्षिक आय 5 लाख रुपए है और आप 5 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में आते हैं। सबसे पहले आपको आपकी सेलरी स्लिप में बेसिक सेलरी और डीए दिखता है। जिसमें सालाना बेसिक वेतन और डीए 3 लाख 10 हजार 533 रुपए है। अब आप देखेंगे कि आपकी सेलरी स्लिप में कनविन्स अलाउंस दिखेगा जो कि 19,200 रुपए होगा। यानि कि आपके वेतन में हर महीने 1600 रुपए कनविन्स अलाउंस दिया जा रहा है और 15 हजार रुपए मेडिकल अलाउंस दिया जा रहा जो कि 1,250 प्रतिमाह बनेगा।
अब ये दोनों अलाउंस हटाकर सिर्फ स्टैंडर्ड टैक्स डिडक्शन यानि कि मानत कर कटौती को रखा जाएगा जो कि 40 हजार रुपए है। अब हम फिर एक बार कनविन्स अलाउंस और मेडिकल अलाउंस को देखेंगे और दोनों का जोड़ देंगे। दोनों का योग 34 हजार 200 रुपए आ रहा है। जबकि अब नए नियम के मुताबिक मानक कटौती 40 हजार रुपए तक होगी जिस पर आपको टैक्स में छूट मिलेगी। यानि कि आपको 5 हजार 800 रुपए का फायदा मिलेगा।
अब बात करते हैं कि आपको झटका कहां लगा है। ये झटका दिया एजुकेशन सेस ने। पहले एजुकेशन सेस 3 प्रतिशत था जिसे अब बढ़ा कर 4 प्रतिशत कर दिया गया है। इस तरह से अगर आप अपनी पूरी सेलरी स्लिप 5 लाख रुपए प्रतिमाह के हिसाब से देखेंगे तो आपको सिर्फ 177 रुपए की टैक्स मिलेगी। वहीं 25 लाख रुपए की सालाना आय पर आपके सिर्फ 3 हजार 815 रुपए टैक्स के रुप में बचेंगे। (देखें चित्र)
क्या है मानक कटौती
मानक कटौती से मतलब उस कटौती से है जो कि आपकी सैलरी से आपकी कंपनी में पद के अनुसार होती है। इस कटौती में वार्षिक वेतन से हर साल एक निश्चित राशि काट ली जाती है जिससे कर योग्य आय कम हो जाती है, और इसलिए कर भुगतान की राशि भी कम हो जाएगी। मानक कटौती के लिए सैलरी पाने वाला एक कर्मचारी और पेंशन पाने वाला व्यक्ति क्लेम कर सकता है। इस कटौती के तहत सैलरी भत्ता, वार्षिकी, छुट्टी का भुगतान, पेंशन, फीस, ग्रेच्युटी, कमीशन, प्राप्य, वेतन का अग्रिम, आयकर अधिनियम की धारा 10 के तहत कम कटौती, जैसे घर किराया भत्ता और वाहन भत्ता शामिल है। भारत में स्टैण्डर्ड डिडेक्शन हाउस रेंट से जो इनकम होती है जो कि हाउस प्रॉपर्टी के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। इनकम रेंट से 30 प्रतिशत मानक कटौती की अनुमति देता है।
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