आम बजट और उसकी शब्‍दावली से जुड़ी पूर्ण जानकारी

बजट वाले दिन हम जिन वित्तीय शब्दों को सुनते हैं उनका उपयोग हम दैनिक बोलचाल की भाषा में नहीं करते। यहां हम बजट से संबंधित कुछ शब्दों की सूची दे रहे हैं जिन्हें हम केंद्रीय बजट के दौरान या उससे संबंधित समाचारों में सुनते हैं।

Understanding Budget Terminology In Hindi

मौद्रिक वर्ष: इसे वित्तीय वर्ष भी कहा जाता है। यह सरकार द्वारा अपने लेखांकन और बजट उद्देश्यों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अवधि होती है। उदाहरण के लिए भारत और जापान के लिए वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल से अगले वर्ष के 31 मार्च तक होता है। ऑस्ट्रेलिया का वित्तीय वर्ष 1 जुलाई को प्रारंभ होता है और 30 जून को समाप्त होता है।

वार्षिक वित्तीय विवरण: इसे हम आम भाषा में 'द यूनियन बजट' कहते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार निश्चित वित्तीय अवधि के लिए अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण संसद में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

वित्त विधेयक: केंद्रीय बजट में संसद में दो विधेयक पेश किये जाते हैं, वित्त विधेयक और अनुमोदन विधेयक। वित्त विधेयक के अंतर्गत नए वित्तीय वर्ष में नए कर लगाने का प्रस्ताव या मौजूदा कर की निरंतरता को बनाये रखने या उसमें संशोधन का प्रस्ताव होता है। उदाहरण के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होना। संसद में बिल प्रस्तुत होने के बाद 75 दिनों की अवधि में संसद द्वारा इसे पारित करना होता है।

अनुमोदन विधेयक: यह ऐसा प्रस्ताव है जो सरकार को समेकित निधि से अलग होने का अधिकार देता है। यह बिल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है। इस राशि का उपयोग वित्तीय वर्ष के दौरान व्यय को को पूरा करने के लिए किया जाता है।

समेकित निधि: सरकार द्वारा अर्जित सभी राजस्व और उधार ली गयी राशि समेकित निधि में जमा की जाती है। संसद के अनुमोदन से इस निधि का उपयोग बजट प्रस्ताव में नियोजित व्यय के लिए किया जाता है।

आकस्मिकता निधि: यह एक आरक्षित निधि है जिसका उपयोग आकस्मिक परिस्थितियों के लिए किया जाता है। यह राष्ट्रपति के नियंत्रण में होती है और इस के व्यय पर संसद की अनुमति आवश्यक होती है। खर्च की गयी राशि की समेकित निधि से प्रतिपूर्ति की जाती है।

सार्वजनिक खाता: इसमें लेनदेन में शामिल वह राशि आती है जहाँ सरकार एक बैंकर की तरह कार्य करती है। उदाहरण के लिए भविष्य निधि जमा या अल्प बचत जमा। इसमें व्यय के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि मूल रूप से ये जनता द्वारा जमा किये जाते हैं और सरकार किसी बिंदु पर इसे जनता को वापस करने हेतु ज़िम्मेदार होती है।

राजकोषीय नीति: कर और व्यय पर लिए जाने वाले निर्णयों के माध्यम से अर्थव्यवस्था के लिए सरकार की योजना।

मौद्रिक नीति: मुद्रा की आपूर्ति और ब्याज दर पर निर्णय के माध्यम से अर्थव्यवस्था के लिए सरकार की योजना।

प्राप्य कर: किसी कर्मचारी को वेतन के अलावा मिलने वाले प्रोत्साहन या लाभ के लिए नियोक्ता द्वारा दिया जाने वाला कर।

प्रतिभूति लेनदेन कर: जब आप इक्विटी शेयर्स, डेरिवेटिव या अन्य प्रतिभूतियाँ खरीदते हैं। यह कर प्रतिभूति में ही शामिल कर लिया जाता है और इसका प्रतिशत नाममात्र ही होता है।

कॉर्पोरेट टैक्स: भारत में परिचालित कंपनियों द्वारा अर्जित आय पर करों का भुगतान।

एजुकेशन सेस (शिक्षा उपकर): एजुकेशन सेस से एकत्रित हुई राशि का उपयोग सरकार द्वारा प्रायोजित शिक्षा के लिए किया जाता है।

सरचार्ज: उच्च आय पर लगाया जाने वाला अतिरिक्त कर। उदाहरण के लिए एक करोड़ से अधिक आय पर लगने वाला कर।

स्वच्छ भारत सेस: सभी कर योग्य सेवाओं पर लागू, इससे एकत्रित राशि एक समेकित निधि में चली जाती है जिसका उपयोग भारत को स्वच्छ बनाने की पहल में लगने वाले खर्च के लिए किया जाता है।

गैर-कर राजस्व: भारतीय सरकार लोगों को दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं जैसे बिजली, रेलसेवा आदि से राजस्व कमाती है। इससे प्राप्त होने वाला राजस्व गैर-कर राजस्व के अंतर्गत आता है। इस श्रेणी में मुख्य राजस्व सरकार द्वारा दिए जाने वाले ऋण पर मिलने वाला ब्याज होता है।

कर छूट: निर्दिष्ट अवधि के लिए करों में छूट या कमी।
यह उद्देश्य सरकार द्वारा कुछ गतिविधियों पूंजीगत निवेशों को बढ़ावा देना होता है।

राजकोषीय घाटा: राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का व्यय उसे मिलने वाले राजस्व से अधिक होता है। इसमें उधार लिया गया धन शामिल नहीं होता।

प्राथमिक घाटा: राजकोषीय घाटा - ब्याज भुगतान
चालू खाता घाटा: जब देश का आयात, निर्यात से अधिक होता है।
राजस्व घाटा: यह तब होता है जब सरकार की वास्तविक प्राप्ति बजट की प्राप्ति से कम होती है।

पूंजीगत प्राप्तियां या व्यय: कोई प्राप्ति या व्यय जिसमें संपत्ति को समाप्त करना या प्राप्त करना शामिल होता है, पूंजीगत खाते के अंतर्गत आता है। विनिवेश एक पूंजीगत प्राप्ति है। यह सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के शेयर्स बेचने का काम होता है। इंडियन पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयर्स को रिलायंस इंडस्ट्रीज़ को बेचना एक ऐसा ही उदाहरण है।

राजस्व प्राप्ति या व्यय: कोई प्राप्ति या व्यय जिसका परिणाम किसी संपत्ति का निर्माण या विक्रय नहीं होता है, राजस्व व्यय होता है। प्राप्ति का उदाहरण कर है और व्यय का उदाहरण वेतन है।

अर्थोपाय प्रस्ताव (डब्ल्यूएमए): राज्य और केंद्रीय सरकार के लिए आरबीआई बैंकर की तरह काम करती है। डब्ल्यूएमए एक तरीका है जो उनके प्राप्ति और जमा के असंतुलन को अस्थाई सहयोग प्रदान करता है।

अनुदान (वित्तीय सहायता): कुछ उद्योगों को या सामान्य जनता को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी के रूप में दी जाने वाली आर्थिक सहायता।

निकासी स्तर: दोहरे कराधान से बचने के लिए कुछ आयों को 'निकासी स्तर' दे दिया जाता है। उदाहरण के लिए म्यूचल फंड।

वित्तीय समावेशन: इसका उद्देश्य निम्न आय के समूहों और पिछड़े वर्ग के लोगों को सस्ती दरों पर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करवाना है।

More From GoodReturns

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+