आधार कार्ड को लेकर आज के वक्त में सबसे ज्यादा सवाल किए जाते हैं। चाहे वह जानकारी को लेकर हो या फिर आधार के डेटाबेस के सुरक्षा से जुड़ा सवाल हो। हर तरह के सवाल UIDAI से पूछे जा रहे हैं और UIDAI इसके जवाब भी लोगों को दे रही है। अब UIDAI ने आधार को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की एक लिस्ट बनाई है और बिंदुवार इसका जवाब भी दिया है। यहां हम आधार से जुड़े सवाल और उनके जवाब के बारे में बता रहे हैं।

सवाल- UIDAI के पास मेरा बायोमीट्रिक्स, बैंक अकाउंट और पैन आदि समेत हर तरह की जानकारी का डाटा है, क्या यह मेरे काम को ट्रैक कर सकता है?
जवाब - बिल्कुल नहीं, ये धारणा गलत है। UIDAI के डाटाबेस में केवल न्यूनतम जानकारी होती है जो आप नामांकन या अपडेट के समय देते हैं, इसमें जो जानकारी दी जाती है वह निम्न है-
- आपका नाम
- आपका पता
- आपका लिंग
- आपकी जन्मतिथि
- आपके हाथ की 10 उंगलियों की छाप
- आपके दोनों आंखों की पुतलियों का स्कैन
- आपके चेहरे की फोटो
- आपका मोबाइल नंबर
- आपकी ई-मेल आईडी (यदि आपने दी है तो)।
- इसके अलावा UIDAI के पास आपकी कोई जानकारी नहीं होती है।
UIDAI ने इस सवाल का जवाब देते हुए आगे लिखा है कि, ध्यान रहे यूआईडीएआई के पास आपके बैंक खातों, शेयर, म्यूचुअल फंड वित्तीय या संपत्ति का विवरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड, परिवार, जाति, धर्म, शिक्षा आदि की जानकारी नहीं होती है और ना ही ये जानकारी कभी UIDAI के डाटा बेस में होगी।
UIDAI ने इस सवाल का जवाब देते हुए लिखा है कि, दरअसल आधार अधिनियम 2016 की धारा 32 (3) किसी भी सत्यापन जानकारी को नियंत्रित, एकत्रित, अनुरक्षित करने या संजोने से UIDAI स्वयं को या किसी अन्य संस्था को प्रतिबंधित करता है।
सवाल- यदि मैं अपने बैंक खाते, शेयर, म्यूचुअल फंड और अपने मोबाइल नंबर से आधार लिंक करता हूं तो क्या UIDAI को इससे जुड़ी जानकारी मिल जाती है?
जवाब- बिल्कुल नहीं, ये गलत धारणा है। जब आप अपना आधार नंबर अपने बैंक, म्यूचुअल फंड कंपनी और मोबाइल फोन से जोड़ते हैं तो वहां केवल आपका आधार नंबर ही दर्शाया जाता है इसके आलना और किसी तरह जानकारी नहीं दी जाती है।
आपका बायोमीट्रिक्स जिसमें आपके चेहरे की पहचान, आंखों का स्कैन और उंगलियों के निशान होते हैं, इसके अलावा आपका नाम आदि UIDAI की वैरिफिकेशन के लिए है। आधार लिंक करने से UIDAI के पास आपके बैंक या म्यूचुअल फंड कंपनी और मोबाइल फोन की जानकारी नहीं भेजी जाती है।
हां ये बात आपको जरूर पता होनी चाहिए कि, यूआईडीएआई वैरिफिकेशन के जवाब में हां या ना में जवाब देती है। कुछ मामलों में आपके सर्विस प्रोवाइडर द्वारा नाम पता और फोटो को वेरिफाइ करने के जवाब में 'यस' लिखा जाता है।
सवाल- यदि किसी को मेरा आधार नंबर पता चल जाता है तो क्या वह मेरा बैंक अकाउंट हैक कर सकता है?
जवाब- बिल्कुल नहीं, ये गलत धारणा है। इसे ऐसे ही समझिए जैसे आपका ATM जान लेने भर से कोई आपका ATM इस्तेमाल या उसका गलत प्रयोग करके पैसे नहीं निकाल सकता है, वैसे ही सिर्फ आपका आधार नंबर जानने भर से कोई आपका बैंक खाता हैक नहीं कर सकता है और ना ही उससे पैसे निकाल सकता है। यहां UIDAI ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि आज तक कोई भी ऐसा मामला सामने नहीं आया है जिसमें आधार नंबर के जरिए बैंक खाता हैक करके पैसा निकाला गया हो।
सवाल- मुझसे बार-बार सभी बैंक खातों को आधार से लिंक करने के लिए क्यों कहा जा रहा है?
जवाब- ये आपकी सुरक्षा को और मजबूत करता है। ये जरूरी है कि बैंक खाता धारक की पहचान वैरिफाइड रहे। 1 जून 2017 को वित्त मंत्रालय द्वारा राजपत्रित अधिसूचना के अनुसार, सभी व्यक्तियों से 31 दिसम्बर 2017 से पहले आधार संख्या देकर अपने सभी बैंक खातों को आधार से जोड़ने के लिए कहा गया है। आधार न होने पर निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे आधार पाने के लिए अपना नामांकन कराएं।
बैंक खाते को आधार से लिंक करने पर आपका बैंक खाता और भी सुरक्षित हो जाता है। इससे वही लोग डरते हैं जो पैसों की कालाबाजारी, मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी से जुड़े हुए हैं। इसलिए आप निश्चित हो कर आधार को बैंक खाते से जोड़ सकते हैं।
सवाल- मुझसे क्यों बार-बार मेरा मोबाइल नंबर वैरिफाई और आधार कार्ड से लिंक करने के लिए कहा जाता है?
जवाब- ये आपकी सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, आपकी सुरक्षा में देश की सुरक्षा जुड़ी हुई है। सभी मोबाइल धारकों का मोबाइल नंबर आधार नंबर से लिंक करना अनिवार्य है। यदि आप ऑनलाइन सेल्फ सर्विस अपडेट पोर्टल (एसएसयूपी) का उपयोग कर रहे हैं तो तब आपका मोबाइल नम्बर आधार के साथ पंजीकृत होना चाहिए अन्यथा आप अपडेट कराने के लिए सहायक दस्तावेजों के साथ निकटतम स्थायी नामांकन केंद्र जा सकते हैं या डाक द्वारा आवेदन पत्र और उसके साथ सहायक दस्तावेज भेज सकते हैं। बिना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के आप आधार में जरूरी बदलाव नहीं कर सकते हैं।
आधार को मोबाइल नंबर जोड़ने के बाद आप निश्चिंत रह सकते हैं। क्योंकि अब मोबाइल नंबर के जरिए धोखाधड़ी करने वालों को आधार की जाकारी देनी होगी जिससे उनकी पहचान जाहिर हो सकती है और ऐसे लोगों पर कार्रवाई आसान हो जाती है, आपका मोबाइल नंबर आधार से जुड़ा होने के कारण कोई भी उसका गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता है। मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने पर आतंकवाद, लड़कियों को फोन पर परेशान करने जैसी घटनाओं में तेजी से कमी आएगी।
सवाल- क्या आधार नंबर को मोबाइल नंबर से जोड़ने पर मोबाइल कंपनी के पास मेरी बायोमीट्रिक्स की जानकारी उनके पास चली जाती है? क्या मोबाइल कंपनी सिम वैरिफिकेशन के बाद मेरी आधार जानकारी का प्रयोग दूसरे कार्यों के लिए भी करती हैं?
जवाब- नहीं बिल्कुल नही, मोबाइल नंबर या मोबाइल फोन कंपनी आपका आधार डाटा और बायोमीट्रिक्स सिर्फ वैरिफिकेशन तक प्रयोग कर सकते हैं। UIDAI जल्द ही बायोमीट्रिक्स को इनक्रिप्टेड कर देगा जिससे आपकी जानकारी यदि किसी के पास हो भी तो भी वह उसे इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। डाटा इनक्रिप्ट रहने के दौरान जब आपकी उंगलियों के निशान की पहचान हो जाती है तो वैरिफिकेशन के लिए UIDAI के पास संदेश जाता है जिसका जवाब UIDAI हां या ना में ही देता है।
आधार के नियमों के मुताहबिक आधार रेगुलेशन 17 (1)(ए) में आधार (वैरिफिकेशन) रेगुलेशन-2016, ये स्पष्ट तौर पर कहता है कि, कोई भी मोबाइल फोन कंपनी, टेलीकॉम कंपनी, बैंक आदि आपकी आधार से जुड़ी जानकारी स्टोर, पब्लिश या शेयर नहीं कर सकते हैं। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
सवाल- क्या NRI को भी आधार नंबर को बैंक, मोबाइल और पैनकार्ड से लिंक करना अनिवार्य है?
जवाब- आधार सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए है, यह विदेशी या फिर एनआईआई के लिए मान्य नहीं है। यदि निवासी एनआरआई/ओसीआई कार्ड धारक है और उसका बैंक खाता भारत में है जबकि उसके पास आधार नहीं है तो उसे ये सलाह दी जाती है की वह अपने बैंक को यहां का निवासी न होने की जानकारी प्रमाण के साथ दे। खाते के चालू अवस्था में न होने पर केवल संबंधित बैंक ही उत्तर दे सकेंगे।
सवाल- क्या आधार कार्ड नहीं होने की दशा में गरीब तबके लोगों को जरूरी सुविधाओं जैसे पेंशन और राशन जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जा सकता है?
जवाब- स्पष्ट तौर पर नहीं, ये आधार के सेक्शन-7 में साफ लिखा हुआ है कि यदि किसी के पास आधार नहीं है तो उसे जरूरी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता है। यदि उसने आधार के लिए आवेदन कर दिया है तब भी उसे सुविधाओं से वंचित नहीं कर सकते हैं।
यदि कोई सरकारी अधिकारी, सरकारी विभाग किसी व्यक्ति को आधार नहीं होने की स्थिति में जरुरी सुविधाओं से वंचित रखता है तो उसके खिलाफ विभाग की तरफ से गैरकानूनी काम करने के मामले में शिकायत दर्ज की जा सकती है।
सवाल- कुछ एजेंसी E-आधार को वैलिड (वैध) नहीं मानती हैं, वह मूल आधार मांगती है जो कि UIDAI द्वारा भेजी गई होती है, ऐसी स्थित में क्या कर सकते हैं?
जवाब- E-आधार उतना ही कानूनी रुप से वैध है जितना कि मूल आधार है। दोनों ही कार्ड एजेंसी को स्वीकार करना जरूरी है। यहां ये आपको बता दें कि E-आधार में आपका अपडेट पता और जानकारी होती है (यदि आपने अपडेट की है तो), तो इस लिहाज से E-आधार को ज्यादा स्वीकार्य होना चाहिए।
यदि कोई एजेंसी E-आधार लेने से मना करती है तो आधार धारक इसके खिलाफ संबंधित विभाग में शिकायत दर्ज करा सकता है, जिस पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
सवाल- आधार से आम आदमी को क्या लाभ है?
जवाब- आधार 119 करोड़ भारतीयों के लिए जारी कर दिया गया है। ये भारत के निवासियो को और मजबूत करता है। आइए जानते हैं आधार की विशेषताएं और उसके क्या लाभ है?
आधार एक अद्वितीय संख्या है, कोई निवासी दोहरी संख्या नहीं रख सकता क्योंकि यह उनके व्यक्तिगत बायोमेट्रिक से जुड़ा होता है; जिसके चलते आधार-आधारित शिनाख्त में नकली और आभासी पहचानों जोकि आजकल लीकेज के रूप में सामने आते हैं, को रद्द किये जाने पर होने वाली बचत से सरकार अन्य योग्य निवासियों को लाभ बढ़ा सके।
- पोर्टबिलिटी: आधार एक सार्वभौमिक संख्या है, संस्था एवं सेवाएं लाभार्थी की पहचान के लिए देश में कहीं से भी सेन्ट्रल यूनिक आइडेंटिफिकेशन डेटा बेस से सम्पर्क कर सकती हैं।
- किसी मौजूदा दस्तावेज़ न होने पर समावेशन : लाभ प्राप्त करने में गरीब और हाशिये के निवासियों को होने वाली समस्या यह है कि राज्य के लाभ के लिए उनके पहचान के दस्तावेज़ पूरे नहीं होते; यूआईडीएआई के लिए डेटा सत्यापन करने के लिए स्वीकृत "इंट्रोड्यूसर" सिस्टम ऐसे निवासियों को पहचान प्रमाणित करने को कहेगा।
- इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर : आजकल लाभ वितरण में युक्त अधिक लागत की जगह यूआईडी-एनेबल्ड-बैंक-अकाउंट-नेटवर्क निवासियों को सीधे लाभ पहुँचाने के लिए एक सुरक्षित और कम लागत वाला मंच उपलब्ध कराता है फलस्वरूप वर्तमान व्यवस्था में धांधली प्रतिबंधित की जाती है।
- लाभार्थियों की प्राप्त पात्रता का आधार - आधारित अधिप्रमाणन: यूआईडीएआई निवासी की पहचान को वैधता देने वाली संस्था को ऑनलाइन अधिप्रमाणन सेवाएँ उपलब्ध कराएगी; यह सेवा निर्धारित लाभार्थियों तक लाभ की पहुँच की वास्तविकता सुनिश्चित करेगी। पारदर्शिता बढ़ने से सेवाओं में संशोधन: स्पष्ट उत्तरदायित्व और पारदर्शी नियंत्रण से लाभार्थियों और सदृश संस्थाओं तक आधिकारों और शक्तियों के समान वितरण में उल्लेखनीय संशोधन होंगे।
- सेल्फ-सर्विस से निवासियों को लाभ : आधार का उपयोग सत्यापन प्रक्रिया में करते हुए निवासी को अपनी पात्रता, मांग, सेवाएँ और शिकायतों के निदान से सम्बन्धित नवीनतम जानकारियाँ होनी चाहिए, जिनका वह सीधे अपने मोबाईल फोन, कीओस्क एवं अन्य माध्यमों से स्वयं लाभ उठा सके। निवासियों द्वारा मोबाईल पर सेल्फ-सर्विस से टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (जैसे- निवासी के रजिस्टर्ड मोबाईल नम्बर की और निवासी के आधार पिन की जानकारी से अधिकारिता प्रमाणित करना) के उपयोग से सुरक्षा सुनिश्चित रहती है। ये मानक भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित मोबाईल बैंकिंग और पेमेंट के मानकों का पालन करते हैं।
सवाल- हम हमेशा मीडिया में ऐसा देखते-सुनते या पढ़ते आए हैं कि आधार की जानकारी लीक हो गई है, क्या ये सच है, क्या आधार की जानकारी लीक हो सकती है?
जवाब- ऐसे पिछले 7 वर्षों में कभी नहीं हुआ है कि आधार के डाटाबेस में किसी ने सेंध लगाई हो या फिर डाटा बेस से जानकारी लीक हुई हो। हर आधार धारक का डाटा सुरक्षित है। आधारडाटा लीक से जुड़ी कोई भी स्टोरी जो मीडिया दिखाता है वह सिर्फ मिस-रिपोर्टिंग का एक कारण होती है। UIDAI के पास एडवांस सुरक्षा सिस्टम है। वहीं UIDAI आपके आधार डाटाहबेस को और भी सुरक्षित बनाने के लगातार प्रयास कर रहा है।


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