जीवन बीमा पॉलिसी के परिपक्व या मैच्योर होने के बाद आप उसका लाभ पाने के लिए कानून हकदार हैं। पर आपको क्लेम तभी मिलेगा जब पॉलिसी एक्टिव हो और सभी प्रीमियम चुकाए जा चुके हों और पॉलिसी धारक जिंदा हो। परिक्वता या फिर मैच्योरिटी क्लेम पाने का तरीक काफी सरल है साथ ही इसमें कागजी काम भी कम है। आइए कुछ आसान स्टेप्स में जानते हैं कि बीमा पॉलिसी के मैच्योर हो जाने के बाद उसे कैसे क्लेम करते हैं।
दावा करने की प्रक्रिया
सबसे पहले आपको पॉलिसी डिस्चार्ज फॉर्म दिया जाता है। परिपक्वता की तारीख नजदीक होने पर बीमाकर्ता पॉलिसी डिस्चार्ज फॉर्म भेजता है। इस डिस्चार्ज फॉर्म में पॉलिसी को क्लेम करने से जुड़ी सारी कागजी कार्रवाई करने का निर्देश रहता है। जैसे ही मेच्योरिटी का समय नजदीक आता है तो, बीमाकर्ता द्वारा लगभग एक महीने पहले बीमाधारक को पॉलिसी डिस्चार्ज फॉर्म भेजा जाता है। इसमें परिपक्वता लाभ का दावा करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी होती है।
आवश्यक दस्तावेज
पॉलिसी डिस्चार्ज फॉर्म पॉलिसीधारक द्वारा पूरी तरह से भरा होना चाहिए। इसमें आपके हस्ताक्षर भी होने चाहिए इसके अलावा दो अन्य गवाहों के भी हस्ताक्षर होना जरूरी है। आवेदन के लिए 5 डाक्यूमेंट्स लगाना अनिवार्य है। जिनके बारे में नीचे विवरण दिया गया है।
- ओरिजनल पॉलिसी बॉन्ड
- आईडी प्रूफ की कॉपी
- एड्रेस प्रूफ की कॉपी
- बैंक की आवश्यक जानकारी और कैंसिल (निरस्त) चैक
- बैंक डिटेल के साथ एक बैंक मैंडेट फॉर्म
कम कागजी कार्रवाई
परिपक्वता लाभ का दावा करना झंझट रहित है और इसमें ज़्यादा कागजी कार्यवाही की आवश्यकता भी नहीं है। यह लाभ समय पर और बिना किसी परेशानी के मिल जाये इसके लिए पॉलिसीधारक को मेच्योरिटी की दिनांक से पहले ही अपने भरे हुये फॉर्म के साथ दस्तावेज़ भेजने की सलाह दी जाती है।
क्लेम की प्रक्रिया
बीमा धारक की तरफ से जैसे ही सारी कागजी कार्रवाई पूरी करके सभी कागज बीमा कंपनी में जमा कर दिए जाते हैं उसी वक्त से क्लेम की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। मैच्योरिटी की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद पॉलिसीधारक के खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। दोनों तरफ से भरे हुये फॉर्म की और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद सब कुछ ठीक होने पर बीमा कंपनी क्लेम को प्रोसेस कर देती है और यह परिपक्वता राशि पॉलिसीधारक के खाते में सीधे क्रेडिट हो जाती है।
जरूरी जानकारी
यह प्रक्रिया सिर्फ उन बीमा पॉलिसी पर लागू होती हैं जो पॉलिसी धारक के जीवित रहने पर बोनस या अन्य लाभ देती है। अगर पॉलिसी की मैच्योरिटी की तारीख पूरी होने के बाद पॉलिसीधारक की मौत हो जाती है लेकिन पॉलिसी डिस्चार्ज प्रक्रिया पहले पूरी हो जाती है तब क्लेम मैच्योरिटी क्लेम के तौर पर देखा जाएगाा तो बीमा की राशि का भुगतान पॉलिसीधार के कानूनी उत्तराधिकारी को मिलेगा।
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