5 मॉडल में एक ही तरह का फंड पोर्टफोलियो सभी के लिए काम नहीं करता है। कुछ निवेशकों के पास हो सकता है कि अच्छी स्कीम हो और उन्हें अच्छे रिटर्न्स मिलें और हो सकता है हम जो म्यूचुअल फंड चुनते हैं उस पर दूसरों की सोच कुछ अलग हो सकती है। हम रीडर्स को अलग-अलग निवेशकों के लिए मॉडल फंड पोर्टफोलियो बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं, आप इसे बनाएं और हमें भेजें। म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो बनाने में इन बातों पर ध्यान दें।
निवेशक द्वारा चाहे जाने वाले असेट्स
यह थोड़ा मुश्किल है क्योंकि यह निवेशक का जोखिम निर्धारित करता है। पोर्टफोलियो में निवेशक जितना चाहता है उससे ज़्यादा जोखिम होना चाहिए। हमने पहले भी कहा है कि ऐसे बड़े रिटर्न्स के क्या फायदा जो आपको रातों को सोने ही ना दें।
लक्ष्य दिमाग में रखें
पोर्टफोलियो निवेशक के लक्ष्य को दिमाग में रखकर बनाया जाये। यदि लक्ष्य केवल 1-2 साल का ही है तो एक बेहतर निवेशक भी 100% डेब्ट आधारित पोर्टफोलियो के लिए ही जाना चाहेगा।
दूसरी तरफ, यदि रिटायरमेंट जैसे लंबे लक्ष्य के लिए जाना है तो फंड की चॉव्इस भी बिल्कुल अलग होगी। जैसे वेल्थ सिक्योर, इसमें कंजरवेटिव निवेशक को भी इन्विटीज में 20-25% डालने की सलाह दी जाएगी। पूरी तरह डेब्ट आधारित पोर्टफोलियो मुद्रास्फीति को नहीं हरा पाएगा।
रिटर्न की नियमितता
चुने गए फंडस का रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए। उन्हें शॉर्ट टर्म परफॉर्मेंस के आधार पर ना चुनें। आप लोन टर्म ट्रेक रिकॉर्ड पर जाएं। साथ ही फंड के जोखिम को भी देखें।
फंड की संख्या
हर सप्ताह, इकोनोमिक टाइम्स वेल्थ के पोर्टफोलियो डॉक्टर सेक्शन में रीडर्स के मेल्स पर स्कोर दिये जाते हैं। उनमें से कई 12-20 म्यूचुअल फंड के नजदीक हैं। कुछ पोर्टफोलियो में यह 40 म्यूचुअल फंड है। ज़्यादा फंड रखने की आवश्यकता नहीं है। केवल 5-6 स्कीम्स ही आपको वो विविधता दे देंगी जो आप चाहते हैं।
टैक्स और भार
पोर्टफोलियो तैयार करते समय कर भार या टैक्स को भी ध्यान में रखें। म्यूचुअल फंडस टैक्स नियमों के अनुकूल होते हैं, लेकिन कुछ फंड जैसे फंड ऑफ फंडस ऐसा नहीं है ये केटेगरी ना चुनें। अपने पोर्टफोलियो में एक्जिट लोड्स का भी ध्यान रखें। कई फंड में एक्जिट लोड्स बहुत ज़्यादा होते हैं, जिससे सारा रिटर्न चौपट हो जाता है।


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