शेयर बाज़ार निवेशकों के लिए निवेश का एक आकर्षिक ज़रिया रहा है। इस बाज़ार में हर रोज़ निवेश और प्रत्याहार होने वाली करोड़ों की राशि लोगों को इस बाज़ार का दिवाना बनाती है। यदि आप भी शेयर बाज़ार के कायल हैं और निवेशक के तौर पर इस बाज़ार में निवेश करना चाहते हैं तो ये शब्द आपको इस बाज़ार को समझने में मदद कर पाएंगे। शेयर ट्रेडिंग में तमाम ऐसे शब्द हैं जो जिनका प्रयोग होते हुए हम अक्सर देखते और सुनते हैं पर उसके बारे में हमें नहीं पता होता है जैसे पी/ई अनुपात, ट्रेड वाल्यूम, बुल मार्केट आदि। ऐसे ही तमाम शब्द जो शेयर बाजार से जुड़े हैं उनके बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं।
बुल मार्केट
बुल मार्केट मतलब ट्रेडर व निवेशक इस बात का अनुमान लगाते हैं कि शेयर की कीमत बढेगी तथा इससे भविष्य में उन्हें अच्छा मुनाफा होगा। सरकार की नई नीतियाँ या देश में आरंभ होने वाली नई निवेश परियोजनाएं इस बाज़ार को प्रभावित कर सकती हैं।
बेयर मार्केट
जब निवेशक को यकीन हो जाता है कि उसके शेयर की कीमत घटने वाली है तो इसे बैर मार्केट कहते हैं। ऐसी स्थिति में निवेशक अपने पैसों को निकाल कर किसी अन्य शेयर में लगाने के बारे में सोचता है। अगर बाज़ार में शेयर की कीमत हर रोज़ गिरने लगे तो समझे कि वह एक बैर मार्केट है।
मार्जिन मनी
इस शब्द का इस्तेमाल मार्जिन ट्रेडिंग के दौरान होता है। डीमेट खाते में राशि कम होने पर राशि को बढ़ाएं कहने के बजाय मार्जिन मनी शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। यदि आपके खाते में पैसे कम हैं और आप और शेयर खरीदना चाहते हैं तो यह शब्द का सुनना आम होगा।
बीटा
बीटा बाज़ार में सुरक्षा की अस्थिरता का मापता है और एक शेयर की तुलना अन्य शेयरों से करता है। पूर्ण रूप से देखा जाए तो बाज़ार का बीटा हमेशा एक रहता है और अगर किसी विशेष शेयर का बीटा एक से अधिक है तो बाजार की तुलना में सुरक्षा अधिक आक्रामक होती है और अन्य स्थिति में इसके विपरीत।
डिविडेंड
कंपनी हर साल या छह महीनों में इस राशि को लाभ के तौर पर शेयरधारकों को देती है। इससे कंपनी की शेयर की कीमतों में तेजी आती है। कई कंपनियाँ डिविडेंड नीति का पालन नहीं करती और बोनस शेयर जारी कर सकती हैं या उस वित्तीय वर्ष के लाभ को बरकरार रख सकती हैं।
स्प्रैड
जब एक निवेशक अपने शेयर को एक तय दाम पर बेचना चाहता है या जब एक निवेशक किसी तय दाम पर शेयर को खरीदना चाहता है तो उसे स्प्रैड करते हैं। आम तौर पर स्प्रैड शब्द का इस्तेमाल फ्यूचर या ऑप्शन मार्केट में होता है।
सपोर्ट मूल्य
हर शेयर का एक मूल्य तय किया जाता है जिसे सपोर्ट मूल्य कहते हैं। माना जाता है कि उस शेयर की कीमत तय सपोर्ट मूल्य से नीचे नहीं गिरेगी। हालांकि शेयर बाज़ार में हर रोज़ कई सपोर्ट मूल्य मिटते और बनते हैं। अगर कोई शेयर अपना सपोर्ट मूल्य तोड़ता है तो समझे कि वह समय शेयर को बेचने के लिए बिल्कुल सही है। तकनीकी विश्लेषण में यह शब्द सही बैठता है। पर जब बात शेयर के मौलिक विश्लेषण की आती है, तो सपोर्ट मूल्य कोई काम का नहीं।
सपोर्ट मूल्य
हर शेयर का एक मूल्य तय किया जाता है जिसे सपोर्ट मूल्य कहते हैं। माना जाता है कि उस शेयर की कीमत तय सपोर्ट मूल्य से नीचे नहीं गिरेगी। हालांकि शेयर बाज़ार में हर रोज़ कई सपोर्ट मूल्य मिटते और बनते हैं। अगर कोई शेयर अपना सपोर्ट मूल्य तोड़ता है तो समझे कि वह समय शेयर को बेचने के लिए बिल्कुल सही है। तकनीकी विश्लेषण में यह शब्द सही बैठता है। पर जब बात शेयर के मौलिक विश्लेषण की आती है, तो सपोर्ट मूल्य कोई काम का नहीं।
शॉर्ट सेल
शॉर्ट सेल वो शेयर है जिसके आप स्वामी नहीं लेकिन उसे आपने उधार पर लिया है और आप उसे बेचने का निर्णय कर सकते हैं। यह फैसला तब लिया जाता है जब उसकी कीमत के गिरने का अनुमान लगाया जाता है। इस शेयर को आप वापस भी खरीद सकते हैं। उदाहरण के लिए आपने प्रति शेयर को 200 रुपये पर शॉर्ट सेल किया और कुछ समय बाद उसी शेयर को 150 रुपये पर वापस खरीदा। इस खरीद-बेच में आपने प्रति शेयर पर 50 रुपए कमाए। ट्रेडर इस राह को तभी अपना है जब उसे पता होता है कि उसे कम से कम नुकसान होगा।
ब्लू चिप स्टॉक
प्रमुख कंपनियों के शेयरों को ब्लू चिप स्टॉक कहा जाता है। ये बाजार में प्रमुख खिलाड़ी हैं और इन्हें अधिक पूंजी लगी होती है (एनआईएफटीई50 या सेंसेक्स30 कंपनियाँ इस सूची में आती हैं)। ये कंपनियां एक स्थिर लाभांश नीति प्रदान करती हैं तथा इनके प्रबंधन अनुभवी तथा ये बाज़ार में अच्छा टर्नओवर और लाभ कमाती हैं। टीसीएस, इन्फोसिस, रिलायंस आदि कुछ भारतीय ब्लू चिप कंपनियों के नाम हैं। कोका-कोला, मैकडॉनल्ड्स, वाल-मार्ट, प्रॉक्टर एंड गैंबल इत्यादि कुछ अमेरिकी बाजार की ब्लू चिप कंपनियों के नाम हैं।
रैली
बाजार के सामान्य मूल्य स्तर या स्टॉक की कीमत में तेजी से वृद्धि को रैली करते हैं।
अस्थिरता
हर रोज स्टॉक मार्केट की कीमतों में उतार-चढ़ाव होते रहते हैं। जब किसी विशेष शेयर की कीमत एक ही दिन में तय सीमा से अधिक बढ जाए या घट जाए, तो उसे अस्थिर स्टॉक कहा जाता है।
प्राप्ति (Yield)
किसी विशेष शेयर की कीमत पर लाभांश के रूप में प्राप्त होने वाले भुगतान को प्राप्ति कहते हैं।
ट्रेड वॉल्यूम
शेयर बाज़ार में हर रोज ट्रेड होने वाले शेयरों की संख्या को ट्रेड वॉल्यूम कहते हैं।
स्कवेरिंग ऑफ
जब एक ट्रेडर किसी एक विशेष कंपनी के खरीदे गए शेयरों को उसी दिन बाज़ार में बेच देता है, तो कहा जाता है कि ट्रेडर ने स्कवेरिंग ऑफ कर दिया।
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