जब भी कोई कर्मचारी टैक्स की अदायगी करता है तो उसे मेडिकल अलाउंस और मेडिकल रिइम्बर्समेंट के बीच का अंतर पता होना चाहिए।
जब भी कोई कर्मचारी टैक्स की अदायगी करता है तो उसे मेडिकल अलाउंस और मेडिकल रिम्बर्समेंट के बीच का अंतर पता होना चाहिए। सैलरी संरचना में कई कंपोनेंट उपलब्ध होते हैं जिन्हें आपको फिल करना यानी कि भरना होता है अदायगी के तौर पर। कंपनी के द्वारा कर्मचारियों को इंश्योरेंस के रुप में मेडिकल अलाउंस और मेडिकल रिम्बर्समेंट के दो आप्शन भरने के लिए दिया जाता है जो कि इंप्लाई के लिए फायदेमंद होता है।
मेडिकल अलाउंस
यह आपकी सैलरी का एक हिस्सा होता है यह स्वतंत्र रुप से काम करता है चाहे फिर आप मेडिकल ट्रीटमेंट लें या न लें। इसे सब्मिट करने और क्लेम करने के लिए किसी मेडिकल बिल की जरुरत नहीं होती है। एक कर्मचारी के हाथ में मेडिकल भत्ता पूरी तरह से कर योग्य है और इसे आपकी आय में जोड़ा जाएगा और व्यक्ति की मौजूदा कर स्लैब के अनुसार कर लगाया जाएगा।
मेडिकल रिम्बर्समेंट
कर्मचारी या उसके परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए किसी भी मेडिकल व्यय की ऊपरी सीमा के साथ प्रतिपूर्ति की जाएगी, जबकि कर छूट 15,000 रुपये प्रति वित्तीय वर्ष के लिए लागू होगी। रिम्बर्समेंट क्लेम करने के लिए इंप्लाई को अपनी कंपनी के समक्ष मेडिकल बिल शामिल करना होता है।
क्लेम न करने पर कटेगा टैक्स
मेडिकल रिम्बर्समेंट के दौरान यदि कोई कर्मचारी वित्तीय वर्ष के अंत से पहले अपेक्षित बिल जमा करने में विफल रहता है, तो मासिक अर्जित हिस्सा 30% पर लगाया जाएगा। उदाहरण के लिए अगर नियोक्ता अपने मेडिकल बिल को 30,000 रुपये प्रतिपूर्ति देता है, तो अधिकतम 15,000 रुपये टैक्स से मुक्त होगा, शेष 15,000 आपकी आय में जोड़ा जाएगा और टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगाया जाएगा।
फैमिली के लोगों के लिए ही कर सकते हैं क्लेम
मेडिकल रिम्बर्समेंट के लिए क्लेम करते समय कर्मचारी के बच्चे, पत्नी, भाई-बहन और माता-पिता के मेडिकल बिल जोड़ सकते हैं। जिसके अंतर्गत डॉक्टर की फीस, दवाईयों का खर्च, हॉस्पिटल खर्च और चेकअप की फीस को इसमें दर्शाया जा सकता है। ध्यान दें कि मेडिकल बीमा का लाभ उठाने के लिए, आयकर अधिनियम की धारा 80 (डी) के तहत दी गई कर छूट से 15,000 रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति सीमा खत्म हो गई है।


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