साल 2013 में कई बैंक रहे जो विफल हो गए मुख्य बात ये रही कि वे सभी सहकारी बैंक थे। ऐसे बैंको की संख्या 16 थी। वहीं इन बैंको को 160 करोड़ रुपए जमाकर्ताओं को भुगतान करना पड़ा।
भारत में कई ऐसे बैंक हैं जो नाकाम रहे या पिछले कई सालों में दिवालिया हो गए थे। लेकिन उनमें से ज्यादातर सहकारी बैंक ही थे, जिनकी इस प्रकार की स्थिति हो गई थी। निजी क्षेत्र के बैंकों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं रही, जिनको आम तौर पर बड़े बैंकों द्वारा अधिग्रहीत कर लिया जाता है। साल 2013 में कई बैंक रहे जो विफल हो गए मुख्य बात ये रही कि वे सभी सहकारी बैंक थे। ऐसे बैंको की संख्या 16 थी। वहीं इन बैंको को 160 करोड़ रुपए जमाकर्ताओं को भुगतान करना पड़ा। अब हम देखते हैं ऐसे बैंक जमा धारकों का भुगतान कैसे करते हैं-
जब दीवालिया घोषित हो जाए बैंक
अगर इस तरह की कोई घटना होती है, जिसमें बैंक विफल या दिवालिया घोषित हो जाता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक के स्वामित्व के अधीन 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन' (डीआईसीजीसी) उस बैंक के सावधि जमा राशि का भुगतान बैंक के जमाधारकों को करती है। डीआईसीजीसी पूरी राशि का भुगतान नहीं करता है, ये केवल ब्याज और मूल राशि सहित एक लाख रुपये तक का भुगतान करती है।
कैसे निकालें पैसे
मान लीजिए की आप ने एक बैंक 'ए' में 80,000 रुपये का जमा किए हैं, जिसमें 9,000 रुपये की ब्याज राशि भी शामिल है। यदि बैंक 'ए' पूरी राशि नहीं दे पाता तो डीआईसीजीसी आप को 89,000 हजार रुपए भुगतान करेगी। हालांकि, अगर फिक्स्ड डिपॉजिट 2 लाख रुपए हैं, तो आप को सिर्फ 1 लाख रुपये ही मिलेंगे।
जरूरी जानकारी
ये सवाल अक्सर पैदा हो सकता है- हमें कैसे पता होगा अगर डीआईसीजीसी ने मेरे बैंक का बीमा किया है? आप को बता दें कि देश में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सभी बीमा कराते हैं हालांकि, यह बहुत छोटे स्थानीय सहकारी बैंकों के मामले में कहना मुश्किल है।
जरूरी जानकारी
ये सवाल अक्सर पैदा हो सकता है- हमें कैसे पता होगा अगर डीआईसीजीसी ने मेरे बैंक का बीमा किया है? आप को बता दें कि देश में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सभी बीमा कराते हैं हालांकि, यह बहुत छोटे स्थानीय सहकारी बैंकों के मामले में कहना मुश्किल है।
बैंक से मांगे प्रमाणपत्र
इस प्रकार के मामले में आप अपने बैंक से भारतीय रिजर्व द्वारा प्रदान किया गया बीमा प्रमाण पत्र दिखाने को कह सकते हैं। यह प्रमाण पत्र दिखान बैंको पर निर्भर करता है। अब आप से सवाल कर सकते हैं कि बैंक की दो अलग अलग शाखाओं में दो अलग सावधि जमा राशि क्या होती है? ऐसी स्थिति में बैंक दोनों ब्रांचों का पैसा मिला कर देता है।
कितना पैसा मिलेगा?
अगर आप के बैंक की दो ब्रांच में जमा का कुल राशि 1.5 लाख है, तो आप को एक लाख रुपए ही मिलेगें। आपके दावों के उद्देश्य के लिए बीमा और मूल राशि को एक साथ जोड़ा जाता है।
अगर आप का अलग अलग बैंकों में पैसा जमा हो तो क्या होता है?
अगर दो अलग बैंको में आपका पैसा जमा है और दोनों बैंक दीवालिया हो जाते हैं तो इस परिस्थित में आपको मिलने वाली राशि दो लाख हो जाती है। यहां यह याद रखना जरूरी है कि इस प्रकार की बीमा राशि प्रति व्यक्ति नहीं बल्कि प्रति बैंक दीवालिया बैंक के अनुसार तैयार की जाती है
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