अगर आपसे पूछा जाए कि दुनिया की सबसे बहुमूल्य धातु कौन सी है, तो आप बिना समय गंवाए सोना ही बताएंगे। दरअसर यही सच भी है। कई बार आपने मन में ये सवाल भी उठता होगा कि आखिर सोने की कीमत तय कैसे होती है। इसे कौन तय करता है साथ ही अलग-अलग राज्य और देश में इसकी कीमत अलग क्यों होती है। इन सभी सवालों का जवाब आज हम आपको देंगे और विस्तार से बताएंगे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में और भारत में सोने की कीमत कैसे तय की जाती है।
डिमांड और सप्लाई
अर्थव्यवस्था में किसी भी वस्तु की कीमत का आधार डिमांड और सप्लाई यानि मांग और आपूर्ति पर टिका होता है। मांग और आपूर्ति का अनुपात ही किसी वस्तु के मूल्य को तय करता है। इसी तरह से सोने का भी दाम तय होता है। मांग और आपूर्ति के अलावा सोने की कीमत तय करने के लिए एक प्रशासनिक इकाई भी होती है। यह इकाई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नीति पर कार्य करती है।
ग्लोबल मार्केट में कैसे तय होता है दाम
वर्ष 2015 में लंदन गोल्ड फिक्स सोने की नियामक इकाई थी इसके बाद एक अन्य इकाई बनाई गई जिसका नाम है लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन जिसे लोग (LBMA) के नाम से भी जानते हैं। इसे ICE प्रशासनिक बेंच मार्क चलाता है। ICE ने 1919 में बने लंदन गोल्ड फिक्स ईकाई का स्थान लिया है। यह संगठन संगठन दुनिया भर के देशों की सरकारों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से यह तय करता है कि सोने की कीमत क्या होनी चाहिए।
भारतीय बाजार में कैसे तय होता सोना का दाम
अंतरराष्ट्रीय बाजार के अलावा देश में सोने की कीमत कैसे तय होती है इसके बारे में जानना दिलचस्प है। देश में सोने की कीम ICE ही तरह कार्य करने वाला एक नियामक है जिसे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज कहा जाता है। आमतौर पर इसे लोग MCX के नाम से भी जानते हैं। यह संगठन भारतीय बाजार में सोने की डिमांट और सप्लाई के आंकड़ों को जुटाकर और ग्लोबल मार्केट में मुद्रास्फीति की स्थिति को ध्यान में रखकर सोने की कीमतें तय करता है। साथ ही यह संगठन लंदन स्थित लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के साथ कोऑर्डिनेट करते हुए भी सोने की कीमत तय करता है।
सोने की कीमतों पर असर डालते हैं वायदा और सर्राफा बाजार
इसके अलावा भारत में सोने की कीमतें और भी दो तरह से तय होती हैं। वायदा बाजार और सर्राफा बाजार दोनों में कीमतें अलग-अलग होती हैं। आम ग्राहक सर्राफा बाजार से ही सोने की खरीददारी करते हैं लेकिन कारोबारी और व्यापारी वायदा बाजार के जरिए सोने की खरीददारी करते हैं। यहां डिमांड और सप्लाई का सोने के दाम पर असर पड़ता है। जिससे देश के अलग-अलग बाजार में सोने की कीमत अलग होती है।
करेंसी मूल्य का सोने की कीमत पर असर
करेंसी रेट का भी सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ता है। भारत जैसे देश में यह असर और भी ज्यादा हो जाता है क्योंकि भारत सोना आयात करता है ऐसे में डॉलर और रुपए के मूल्य में उतार-चढ़ाव सोने के दाम पर असर डालता है। इसे एक उदाहरण के जरिए समझिए, मान लीजिए कि आप सोने का आयात करते हैं जब एक डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 66 रुपए रहता है, लेकिन अगर डॉलर की कीमत बढ़ जाए और वह 66 रुपए की बजाय 67 रुपए हो जाए तो सोने का मूल्य बढ़ जाएगा वहीं डॉलर की कीमत गिरने पर मूल्य घट जाएगा। डॉलर इसलिए भी असर डालता है क्योंकि आयात किए जाने वाले सोने का दाम डालर में ही चुकाया जाता है। डॉलर एक ग्लोबर करेंसी है जबकि रुपया नहीं है ऐसे में ग्लोबल मार्केट में ट्रेड के लिए डॉलर के जरिए ही दाम चुकाए जाते हैं।


Click it and Unblock the Notifications