आए दिन हम लूट-मार की वारदातों के बारे में सुनते रहते हैं। ऐसी वारदातों से बचने के लिए हम बैंक में खाता खुलवाते हैं। यहां अपनी पूंजी को सुरक्षित देख हम खुश होते हैं। लेकिन ये बेफिक्री भी फिक्र का कारण बन सकती है।

हाल ही में, क्राइम पेट्रोल में एक एपिसोड दिखाया गया था, जहां एक मृत्य व्यक्ति के असक्रिय हुए खाते से 80 लाख रुपए का घपला किया गया। हालांकि मृतक के पुत्र को इस खाते को कोई जानकारी नहीं थी और समय रहते यह घपला सब के सामने आ गया।
पढ़ें- बचत खाते से जुड़ी बातें जो जरूर मालूम होनी चाहिये
इस घटना को बताकर हम आपको डराना नहीं चाहते बल्कि सतर्क करना चाहते हैं। नीचे दिए गए कारणों पर गौर करके आप भी ऐसी गलती से बच सकते हैं।
1 धोखाधड़ी
कुछ लोग अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाते हैं ताकि वे अपनी पूंजी को सुरक्षित रख सकें। कई बार उनके परिजनों को भी इस बात का पता नहीं होता कि उनके घर के सदस्या का किसी फलां बैंक में खाता है। मरणोपरांत धन से भरे ऐसे निष्क्रिय खातों में फ्रॉड होने की संभावना अधित होती है।
धोखाधड़ी में बैंक के किसी कर्मचारी की भूमिका पूर्ण रूप से मौजूद होती है। खाता धारक की बेपरवाही के कारण फ्रॉड करते वक्त इन खातों को जल्द निशाना बनाया जाता है। यदि समय रहते इस धोखाधडी की ख़बर आप तक ना पहुंचे तो सालों से पड़ी पूंजी से आपको हाथ धोना पड सकता है।
2 अनचाहे शुल्क
हालांकि सरकारी बैंक अपने ग्राहकों से अनचाहे शुल्क नहीं बटौरती लेकिन निजी बैंक इस मामले में पीछे नहीं है। जहां सरकारी बैंक में न्यूनतम बैलेंस 1,000 रुपए है वहीं निजी बैंकों में औसत तिमाही बैलेंस 10,000 रुपए होना चाहिए। यदि निजी बैंक में बचत खाते का बैलेंस 10,000 से कम हो तो बैंक आप पर शुल्क लगाना आरंभ कर देती है, जिस वजह से आपका बैलेंस माइनस में बढने लगता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने असक्रिय खाते को बंद कर दें या उसे फिर से सक्रिय कर लें।
3 इंटरनेट बैंकिंग का नहीं होना
बैंक खाता निष्क्रिय होने पर बैंक द्वारा प्रदान की जा रही सभी सेवाओं को रद्द कर दिया जाता है, इसमें इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम सेवा भी शामिल है। कंपनी द्वारा खोले जाने वाले सेलरी खाते को कंपनी छोडते ही बंद कर देना चाहिए। क्योंकि ट्रैन्ज़ैक्शन ना होने पर ये असक्रिय खाते बन जाते हैं।
4 असमर्थ एटीएम
इंटरनेट बैंकिंग के अलावा आपका एटीएम कार्ड भी असमर्थ हो जाएगा। अतः इसे फिर से सक्रिय करने की प्रक्रिया काफी लंबी है। यदि आप इस झमेले में नहीं पड़ना चाहते तो सोच समझ कर फैसला लें।
5 बैंक किस तरह असक्रिय खातों को तय करती है?
एक साल में खाते में हुए लेन-देन के आधार पर बैंक उस खाते को असक्रिय खाता मानती है। यदि आप एक साल तक अपने खाते में कोई ट्रैन्ज़ैक्शन नहीं करते तो बैंक आपके खाते को असक्रिय खाता मान लेगी। हर 6 महीने में बचत खाते पर दिए जाने वाले ब्याज को भी आपके खाते में जोडा नहीं जाएगा।
असक्रिय खाते को सक्रिय करने के लिए आपको फिर से बैंक को सारे जरूरी दस्तावेज देने पडेंगे। अतः अपने खाते को सक्रिय रखने के लिए उसमें नियमित आधार पर कुछ राशि जमा करते हैं।
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