जैसा की नाम से स्पष्ट है- कोर्इ व्यक्ति बैंक से अपने नाम पर भूखण्ड खरीदने के लिए ऋण लेता हे, उसे लैंड लोन कहते है, जबकि कोर्इ व्यक्ति रहने के लिए बना बनाया मकान या फ्लेट खरीदने के लिए ऋण लेता है, उसे होम लोन कहते हैं।

क्या आप जानते हैं कि लैंड लोन यानि भूमि ऋण और होम लोन यानी गृह ऋण में क्या अंतर हैं?
सभी बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान भूख्ण्ड खरीदने के लिए लोन देते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि उस व्यक्ति की उम्र 21 वर्ष से अधिक हो। कुछ बैंक प्रवासी भारतीयों को लैंड़ लोन देते है, बशर्तें कि वे कोर्इ भूख्यण्ड आवासीय प्रयोजन के लिए खरीदना चाहते हों। सभी भारतीय नागरिकों को लेंड़ लोन के लिए पात्र माना जायेगा, चाहे वह व्यक्ति वेतनभोगी हो या स्वयं का व्यवसाय करता हों। परन्तु इसके लिए उस व्यक्ति द्वारा लोन को पुन: लौटाने की वित्तीय क्षमता के इतिहास को जानना आवश्यक है।
इस संबंध में यह आवश्यक है कि जिस भूखण्ड़ को खरीदने के लिए आप लैंड लोन लेना चाहे, वह कृषि या व्यावसायिक भूमि नहीं हो तथा नगरपालिका या नगर निगम के तहत आती हों। भारतीय नागरिक रहने के लिए मकान बनाने के प्रयोजन से या भविष्य में निवेश के लिए कोर्इ भूखण्ड़ खरीदे- दोने स्थितियों में उसे लैंड लोन का पात्र माना जायेगा।
कोर्इ भूखण्ड खरीदने के लिए अधिकतम कितना लोन मिल सकता है?
निमार्णाधिन मकान पर या बने बनाये मकान पर अस्सीं प्रतिशत तक होम लोन मिल जाता है, जबकि लैंड़ लोन शहरी क्षेत्र में भूखण्ड़ की कुल कीमत का सत्तर प्रतिशत तक ही दिया जाता है।
छोटे शहरों और कस्बों के मामलों में लैंड़ लोन भूखण्ड की कुल कीमत का पचास से साठ प्रतिशत ही दिया जाता है। इस तरह यदि आप लैंड लोन लेना चाहे तो भूखण्ड़ की कुल कीमत की तीस से पचास प्रतिशत तक राशि आपको अपनी जेब से ही देना है।
क्या मुझे लैंड लोन पर आयकर में छूट मिलेगी?
यद्यपि लैंड़ लोन भी मकान बनाने के प्रयोजन से ही बैंकों से लिया जाता है, परन्तु इस पर आयकर की छुट नहीं मिलती है। बैंक द्वारा लोन पर लिये गये ब्याज और आप लोन को चुकाने के लिए जो किस्तें बैंक को देते हैं, उस राशि को आयकर छूट की गणना में नहीं लिया जाता है। अंधेरे के बीच आशा की किरण यह है कि जब आवासीय भूखण्ड़ पर मकान बनाना प्रारम्भ कर देंगे, तब लोन के एक भाग पर आपको आयकर की छूट दी जयेगी। परन्तु लोन को पुन: अदा करने की जो किश्ते निर्धारित की जायेगी उसको आयकर छूट की गणना में तब ही लिया जायेगा जब आप पूरा मकान बना लेंगे।
लैंड लोन के लिए क्या दस्तावेज जमा कराने आवश्यक रहते हैं?
पात्रता के आधार पर आपको अपनी पहचान और निवास स्थान के पत्ते से सबंधित जानकारी के दस्तावेज बैंक में जमा कराने रहते हैं। वेतनभोगी कर्मचारियों को अपनी आय से संबंधित जानकारी के लिए अपनी वेतन पर्ची और पिछले छह महीने में वेतन से जो कटौतियां की गर्इ है, उन वेतन पर्चियो की फोटो कॉपी बैंक में जमा करानी रहती है।
जिस भूमि को खरीदने के लोन लिया जाता है, उसे बेचने वाले व्यक्ति के भूखण्ड़ से संबंधित सभी दस्तावेजों का विवरण उस बैंक को देना रहता है, जहां से लोन लिया जाना है। इन दस्तावेजों में सम्मिलित है-भूखण्ड़ पर कोर्इ अन्य ऋण या भार नहीं है उसका प्रमाण पत्र भूखण्ड़ पर कब्जे का प्रमाणत्र, भूखण्ड की स्थिति का प्रमाण पत्र तथा पिछले पन्द्रह वर्षों के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेज।
| कुछ बातें | भूमि ऋण | गृह ऋण |
| पात्रता | भारतीय नागरिक और प्रवासी भारतीय | भारतीय नागरिक और प्रवासी भारतीय |
| ब्याज की दर | बेस रेट पर आधारित | बेस रेट पर आधारित |
| आयकर छूट | आयकर छूट मकान निमार्ण का कार्य प्रारम्भ होने के बाद ही होती है | ब्याज पर तथा प्रिसिंपल अमाउंट दोनों पर आयकर की छूट |
| अवधि | दस से पन्द्रह वर्ष | तीस वर्ष तक |
| कुल देय लोन | भूखण्ड की कीमत का 50 से 70 प्रतिशत | मकान/फ्लैट की कीमत का 80 प्रतिशत तक |


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