शापिंग में आनन्द आता है, किन्तु चिंताजनक स्थिति तब होती है, जब क्रेडिट कार्ड से बिल का भुगतान करना पड़ता हैं। क्रेडिट कार्ड की ड्यू डेट खो जाती है, तो बहुतों के लिए यह दुःस्वपन बन जाता है। कई व्यक्तियों के लिए विशेषतया तब दुविधाजनक स्थिति बन जाती है जब बैंक अकाउंट किसी अन्य बैंक का होता है और क्रेडिट कार्ड किसी दूसरे बैंक या वित्तीय संस्थान का होता है।

क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना तभी सुविधाजनक रहता है, जब क्रेडिट कार्ड और सेविंग अकाउंट एक ही बैंक का होता है।
यदि बैंक के सेविंग अकाउंट और क्रेडिट कार्ड एक ही बैंक का नहीं होता है, तब व्यक्ति को उस बैंक में पैसा जमा कराने की व्यवस्था करनी पड़ती है जो चेक या नेफ्ट (NEFT) के द्वारा सम्भव हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति नेफ्ट के द्वारा आन लाइन पेमेंट करना चाहता है, तब उसे इंटरनेट बैंकिंग सुविधा के लिए रजिस्ट्रेशन कराना रहता है।
जब आपका आन लाइन ट्रांजेक्शन करने के लिए रजिस्ट्रेशन हो जाता है, तब आप जिन बिलों का क्रेडिट कार्ड से भुगतान करना है, उसकी उसी तरह सूची बना लें, जिस तरह आप फंड़ ट्रांसफर के लिए बनाते हैं।
ये बातें ध्यान रखने की है:
- अकाउंट नम्बरः क्रेडिट कार्ड के नम्बर जो सोलह अंकों में होंगे
- बेनिफिसियरी नामः क्रेडिट कार्ड का नाम
- आईएफएससी कोडः आपको क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने वाली कम्पनी से आईएफएससी कोड लेना होगा, जो आपको आईएफएससी कोड के साथ-साथ बैंक की ब्रांच के संबंध में भी विस्तृत जानकारी देगा।
यहां सरल स्टेपस दिये जा रहें, जिससे आप नेफ्ट के द्वारा क्रेडि़ट कार्ड के बिल का भुगतान कर सकते हैं-
- अकांउट का लागिन करें
- एड बेनिफिशियरी में जायें
- मिनू में जो बैंकों की सूची दी गई है, उसमें से बैंक सेलेक्ट करें
- शहर का नाम सेलेक्ट कर यह सुनिश्चित कर लें कि सही आईएफएससी कोड डाला है
नेफ्ट से भुगतान करने के लिए यहां पांच बैंकों के आईएफएससी कोड दिये जा रहे हैं
- इंडसइंड बैंकः INDB0000018
- एसबीआई SBIN00CARDS
- एक्सिस बैंक UTIB0000400
- सीटीबैंक CITI0000003
- आईसीआईसीआई बैंक ICIC0000103
नेफ्ट के द्वारा क्रेडिट कार्ड का भुगतान करने के लिए यह जरुरी है कि आपके पास सही आईएफएससी कोड और बेनिफिसीयरी डिटेल की सही जानकारी हो। यह चेक की तुलना में सरल और तुरन्त भुगतान की विधि है। वस्तुतः कुछ ही धंटों में धन राशि क्रेडिट कर दी जाती है और इसकी स्थिति तुरन्त दिखाई दे जाती है।
चेक से भुगतान करने में तीन दिन का समय लगता है, जो कि तुरन्त दर्शाया नहीं जाता है। फलः भुगतान में विलम्ब हो जाता है। आओ, इसे एक सरल उदाहरण से समझे।
माना कि किसी भुगतान की ड्यू डेट माह की 25 तारीख है। यदि आप नेफ्ट के द्वारा 24 तारीख को भुगतान करना चाहते हैं, तो उसी दिन भुगतान की स्थिति को दिखायेगा। यदि आप भुगतान के लिए 24 तारीख को चेक देंगे, तो यह 26 तारीख को अकाउंट में जमा होगा। ऐसी परिस्थिति में विलम्ब से चेक देने के कारण बैंक आप पर पेनल्टी लगायेगा और आपको अनावश्यक रुप से पेनल्टी और इन्टरेस्ट का ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।
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