जब भी आप कोई सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉज़िट अकाउंट किसी बैंक में खोलते हैं तो आप से कहा जाता है कि आप किसी को अपने अकाउंट का नॉमिनी बना दें। हालांकि यह पूरी तरह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप किसी को नॉमिनी बनाते हैं या नहीं। लेकिन अगर आप किसी को अपना नॉमिनी बना देते हैं तो यह आपके और आपके परिवार वालों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
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कई बैंक अपने बुजुर्ग ग्राहकों को यह याद दिलाते रहते हैं कि अगर उन्होंने आपके अकाउंट का नॉमिनी किसी को नहीं बनाया है तो जल्द से जल्द बना दें।
क्योंकि बहुत से ऐसे बुज़ुर्ग हैं जिन्होंने कम उम्र में अपना अकाउंट खोला था और किसी को भी अपना नॉमिनी नहीं बनाया था, जो की उन्हें करना चाहिए था। आज हम आपको कुछ ऐसे ही बातें बताने जा रहें हैं, जैसे अगर किसी की मृत्यु हो जाती है और उसने अपना नॉमिनी किसी को भी नहीं बनाया है तो उसके सेविंग अकाउंट से पैसे कैसे निकालें जाएंगे।
कुछ तरीके जिसे आप मृत व्यक्ति के सेविंग अकाउंट के पैसों पर दावा कर सकते हैं-
जॉइंट अकाउंट होने पर
अगर आपका सेविंग या बचत खाता किसी और के खाते के साथ जुड़ा हुआ है तो ऐसे मामले में खाते में रखा पैसा उत्तराधिकार के खाते में चला जाता है।
नॉमिनी होने पर
अगर आपने नॉमिनी चुना है तो बैंक सब कुछ नॉमिनी के नाम कर देगी। लेकिन अगर कोई विवाद है जैसे कोई विल या वसीयत तो यह काफी लम्बी प्रतिक्रिया हो जायेगी।
वसीयत या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र
अगर किसी अकाउंट का कोई नॉमिनी नहीं है और उसका कोई जॉइंट अकाउंट भी नहीं है तो उसे अपने कानूनी वारिस होने का सबूत देना होगा जैसे वसीयत और अगर कोई वसीयत नहीं है तो उसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लगाना पड़ेगा।
कोई दावेदार ना होने पर
अगर ऐसे अकाउंट का कोई दावेदार नहीं है तो उसे निष्क्रिय खाते में बदल दिया जाता है। और जब उस व्यक्ति का क़ानूनी वारिस दावा करता है तो बैंक सारा पैसा उसके सेविंग अकाउंट में ट्रान्सफर कर देता है।
निष्कर्ष
हमे हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि जब भी हम बैंक अकाउंट खोलें तो किसी के साथ जॉइंट अकाउंट रखें या किसी को नॉमिनी बना दें। इससे आपकी मृत्यु होने के बाद आपके बैंक के सेविंग अकाउंट का सारा पैसा आपके परिवार वालों को आसानी से मिल सकता है।


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