ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो किसी एक या दूसरे कारण से अपनी जीवन बीमा पॉलिसी को लैप्स होने देते हैं। कुछेक विदेश चले जाते हैं, कुछ प्रीमियम चुकाने में असमर्थ हो जाते हैं और कुछ शुरू में कर बचाने के लिए बहुत सारी पोलिसीज़ लेकर बाद में प्रीमियम चुका पाने में विफल रहते हैं।
अगर आप थोड़ी से खोजबीन करते हैं तो पायेंगे कि ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनकी पोलिसीज़ लैप्स हो चुकी हैं । कुछ एक ने तो उन पोलिसीज़ को पुनर्जीवित करने की भी जरूरत नहीं समझी है । हालांकि, अगर आपने प्रीमियम के माध्यम से पैसे का भुगतान किया है और आप बीमा कंपनी के वर्तमान नियमों और शर्तों के साथ खुश हैं, तो अपनी जीवन बीमा पॉलिसी को पुनर्जीवित करना ही सर्वोत्तम है।
आपकी जीवन बीमा पॉलिसी रद्द होने के दो तरीके हैं। एक यह है कि आपने कई महीनों से प्रीमियम का भुगतान नहीं किया है और दूसरा यह कि आपने नकदी समर्पण मूल्य के माध्यम से पॉलिसी लौटा दी है। नकदी समर्पण मूल्य वह मूल्य होता है जिसका भुगतान बीमा कंपनी आपको स्वेच्छा से पॉलिसी को रद्द करने पर, विशेष रूप से पूरी जीवन बीमा पॉलिसी समाप्त करने पर करती है।
लैप्स हो चुकी जीवन बीमा पॉलिसी को पुनर्जीवित कैसे करें ?
एक जीवन बीमा पॉलिसी को विभिन्न तरीकों से पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह सब शामिल समय सीमा पर निर्भर करता है। चलो कुछ विस्तार से जानते हैं ।
सामान्य रूप से पुनः जीवन बीमा पॉलिसी को चलाना
अगर आपने पिछले छह महीनों से प्रीमियम का भुगतान नहीं किया है, तो इस स्तिथि में, आप ब्याज सहित पिछला भुगतान करके पॉलिसी को पुनर्जीवित कर सकते हैं । और , इसमें आपको स्वास्थ्य जांच फिर से करवाने का झंझट नहीं उठाना होगा ।
मेडिकल परीक्षण
जीवन बीमा पॉलिसी को अगर एक लंबी अवधि के बाद पुनर्जीवित किया गया है तो जीवन बीमा कंपनी एक बार फिर स्वास्थ्य जांच कि प्रक्रिया दोहराने को कह सकती है। क्योंकि आपका स्वास्थ्य उस समय अवधि के दौरान बदल सकता है जब पॉलिसी लैप्स थी । इसके अलावा, एक ताजा अनुबंध पर एक वर्ष का आत्महत्या समझौता पुनः लागू हो जाता है। इसका यह अर्थ है कि एक वर्ष के भीतर आत्महत्या की स्तिथि में नयी लागू पॉलिसी के तहत कोई भुगतान नहीं किया जाएगा । नई पॉलिसी की तारीख के दो साल के भीतर अगर आप मर जाते हैं तो बीमा कंपनी जांच की एक श्रृंखला का संचालन भी कर सकती है।
निष्कर्ष
सबसे अच्छी बात अपनी जीवन बीमा कंपनी के साथ पारदर्शिता बनाए रखना है। अगर आपको कोई बीमारी है तो अपनी जीवन बीमा कंपनी को इसके बारे में जरूर बताएं । इसके अलावा उन्हें पहली जीवन बीमा पॉलिसी के लैप्स होने के कारणों की जानकारी भी दें । जितना अधिक पारदर्शी आप होंगें, आपके नामांकित व्यक्ति को आपके बाद पॉलिसी का लाभ लेना भी उतना ही सरल होगा।
More From GoodReturns

भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें

Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका

US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति

GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित

GST e-Way Bill में बड़ा बदलाव: 1 अगस्त से Ship-to GSTIN अनिवार्य, कहीं आपका माल न रुक जाए!

ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान

चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग

Russia ने 6 महीने में बेच दिया 44 टन सोना! रूस क्यों घटा रहा है अपना Gold Reserve?

SEBI के नए बायबैक नियम लागू: अब ओपन-मार्केट में निवेश से पहले जान लें ये 5 बड़े बदलाव

Indo-MIM Listing Today: आज बाजार में होगी धमाकेदार एंट्री! लिस्टिंग के बाद शेयर बेचने का सही तरीका



Click it and Unblock the Notifications
