NSE एक्सपायरी के दौरान बाजार में भारी हलचल: FD या SIP, कहां सुरक्षित है आपका पैसा?

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में 20 और 21 मई को बड़ी वीकली एक्सपायरी होने वाली है। इन तारीखों पर क्रमशः बैंक निफ्टी और निफ्टी के कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी होगी। बाजार में होने वाली भारी हलचल अक्सर छोटे निवेशकों को अपनी रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर देती है। ऐसे माहौल में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और इक्विटी फंड के बीच सही चुनाव करना बेहद अहम हो जाता है। मार्केट रिस्क को मैनेज करने के लिए एक बैलेंस अप्रोच अपनाना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।

एक्सपायरी वाले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में अक्सर अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले लोग इस दौरान रिकरिंग डिपॉजिट (RD) की स्थिरता को चुन सकते हैं। वहीं, जो लोग लंबी अवधि में ग्रोथ चाहते हैं, वे सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के विकल्पों पर गौर कर सकते हैं। अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के रिस्क प्रोफाइल को समझना बहुत जरूरी है।

NSE Weekly Expiry 2026: Investment Strategy for FD vs SIP and Equity Funds to Manage Market Volatility and Maximize Returns

NSE वीकली एक्सपायरी और FD रिटर्न की तुलना

आमतौर पर इक्विटी फंड्स तीन साल की अवधि में ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, मई एक्सपायरी के दौरान शॉर्ट-टर्म रिस्क काफी बढ़ जाता है। फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर 7 से 8 फीसदी के बीच आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं। निवेशकों को शेयर बाजार की अनिश्चितता के मुकाबले इन गारंटीड रिटर्न की तुलना जरूर करनी चाहिए। ऐसा करने से आपका पोर्टफोलियो ज्यादा स्थिर बना रहेगा।

निवेश का प्रकाररिस्क लेवलसमय सीमाअनुमानित रिटर्न
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)कम12 से 36 महीने7.0% - 8.2%
रिकरिंग डिपॉजिट (RD)कम6 से 24 महीने6.5% - 7.5%
इक्विटी SIPज्यादा36 महीने से अधिक12% - 15%

टैक्स बचाने के लिए SIP और इक्विटी फंड की स्ट्रैटेजी

सही इन्वेस्टमेंट टेन्योर चुनने में टैक्स की बड़ी भूमिका होती है। बैंक डिपॉजिट से होने वाली कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसके उलट, इक्विटी से होने वाले मुनाफे पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) लगता है, जबकि एक साल से ज्यादा समय तक निवेश रखने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) लागू होता है। टैक्स कटने के बाद मिलने वाले असल मुनाफे का आकलन करके ही लंबी अवधि के लिए वेल्थ क्रिएशन का सही रास्ता चुना जा सकता है।

NSE वीकली एक्सपायरी के इस दौर में सावधानी और दूरदर्शिता का तालमेल जरूरी है। जहां SIP समय के साथ आपकी संपत्ति बढ़ाती है, वहीं FD बाजार की उठापटक के दौरान सुरक्षा देती है। 20 मई से पहले अपने रिस्क लेने की क्षमता को जरूर परख लें। बाजार के शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव पर रिएक्ट करने के बजाय अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखें। निवेश में निरंतरता ही वित्तीय सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है।

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