पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में हाल ही में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों का मकसद रिटायरमेंट के बाद लोगों को उनके पैसों पर बेहतर कंट्रोल देना है। अब सब्सक्राइबर्स अपनी जमा पूंजी को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी के साथ मैनेज कर पाएंगे। खास तौर पर रिटायरमेंट के बाद के सालों में यह नया सिस्टम आपके पेंशन फंड को संभालने के तरीके को काफी आसान बना देगा।
15 मई को जारी नए सर्कुलर में 'रिटायरमेंट इनकम स्कीम' (RIS) की शुरुआत की गई है। इस नए फ्रेमवर्क के जरिए लोग अपने फंड को एक सिस्टमैटिक तरीके से निकाल सकते हैं। अब आपको सारा पैसा एक साथ (Lump sum) निकालने की जरूरत नहीं है, बल्कि आप समय-समय पर पेमेंट लेने का विकल्प चुन सकते हैं। इससे रिटायरमेंट के बाद पैसों की किल्लत नहीं होगी और आपका बचा हुआ पैसा भी समय के साथ बढ़ता रहेगा।

NPS ड्रॉडाउन और रिटायरमेंट इनकम स्कीम को समझें
पुराने नियमों के मुताबिक, सब्सक्राइबर्स को एक बार में ही पूरा लंपसम अमाउंट निकालना पड़ता था और बाकी हिस्सा मंथली पेंशन के लिए अनिवार्य रूप से एन्युटी (Annuity) में डालना होता था। लेकिन अब 'सिस्टमैटिक लंपसम विड्रॉल' (SLW) की सुविधा ने इस प्रोसेस को बदल दिया है। अब आप अपनी जमा पूंजी को महीने या तिमाही आधार पर निकालने का विकल्प चुन सकते हैं। इससे रिटायरमेंट के बाद भी आपको हर महीने सैलरी की तरह एक तय इनकम मिलती रहेगी।
यह नई सुविधा उन लोगों के लिए बेस्ट है जो अपने पास कैश की उपलब्धता (Liquidity) चाहते हैं। अब आपको एक साथ बड़ी रकम मिलने और उसे मैनेज करने की चिंता नहीं करनी होगी। आपका पैसा NPS के दायरे में ही रहेगा और उस पर रिटर्न भी मिलता रहेगा। इससे रिटायरमेंट फंड के जल्दी खत्म होने का खतरा भी कम हो जाता है और लंबे समय तक वेल्थ मैनेजमेंट का एक बैलेंस तरीका मिल जाता है।
NPS ड्रॉडाउन के फायदे और कौन ले सकता है इसका लाभ?
60 साल की उम्र पूरी करने वाला हर NPS सब्सक्राइबर अब इन सुविधाओं का फायदा उठा सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके बचे हुए बैलेंस पर मार्केट-लिंक्ड रिटर्न मिलता रहता है। यानी आपको रेगुलर इनकम भी मिलती है और आपका पैसा भी इन्वेस्टेड रहता है। यह स्ट्रैटेजी पारंपरिक फिक्स्ड-इनकम विकल्पों के मुकाबले अक्सर ज्यादा फायदेमंद साबित होती है और आपकी मेहनत की कमाई पर आपका पूरा कंट्रोल रहता है।
| फीचर की जानकारी | पारंपरिक पेंशन एन्युटी | सिस्टमैटिक ड्रॉडाउन (SLW) |
|---|---|---|
| टैक्स का असर | स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा | तय सीमा तक टैक्स-फ्री |
| इन्वेस्टमेंट पर कंट्रोल | इंश्योरेंस कंपनी मैनेज करती है | सब्सक्राइबर के पास कंट्रोल रहता है |
| पेमेंट में फ्लेक्सिबिलिटी | फिक्स्ड मंथली अमाउंट | अपनी मर्जी से समय और रकम चुनें |
| रिटर्न की संभावना | आमतौर पर 5 से 6 फीसदी | मार्केट के हिसाब से ज्यादा ग्रोथ की उम्मीद |
भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए टैक्स मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। फिलहाल, NPS फंड का 60 फीसदी हिस्सा पूरी तरह टैक्स-फ्री है। SLW के जरिए समय-समय पर पैसा निकालने पर भी यही नियम लागू होता है, जिससे आपकी मंथली इनकम टैक्स के लिहाज से काफी फायदेमंद हो जाती है। हालांकि, एन्युटी वाला हिस्सा आपकी इनकम के हिसाब से टैक्सेबल रहता है। इसलिए, पैसा निकालते समय हमेशा इस तरह प्लान करें कि आप कम टैक्स स्लैब में रहें।
PoP या CRA के जरिए कैसे एक्टिवेट करें रिटायरमेंट इनकम स्कीम?
इन नए विकल्पों को एक्टिवेट करना बहुत आसान है और यह पूरी तरह डिजिटल प्रोसेस है। इसके लिए आपको अपने सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) अकाउंट में लॉग-इन करना होगा। आप चाहें तो मदद के लिए पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) पर भी जा सकते हैं। ध्यान रखें कि आपके बैंक डिटेल्स और मोबाइल नंबर अपडेटेड हों, ताकि वेरिफिकेशन और अप्रूवल के आखिरी स्टेज में कोई देरी न हो।
लॉग-इन करने के बाद 'विड्रॉल' या 'एग्जिट' सेक्शन में जाएं। वहां मेन्यू से 'रिटायरमेंट इनकम स्कीम' (RIS) का विकल्प चुनें। इसके बाद आप अपनी पसंद के हिसाब से विड्रॉल की फ्रीक्वेंसी और रकम तय कर सकते हैं। सिस्टम आपको दिखाएगा कि भविष्य में आपको कितना पैसा मिलेगा। ऑनलाइन रिक्वेस्ट सबमिट करने से पहले सभी डिटेल्स को अच्छी तरह चेक कर लें।
NPS सब्सक्राइबर्स के लिए जरूरी चेकलिस्ट
कोई भी विकल्प चुनने से पहले अपनी मंथली जरूरतों का हिसाब जरूर लगा लें। अपनी कुल जमा पूंजी को देखें और फिर तय करें कि आपको कितनी पेमेंट चाहिए। एन्युटी रेट्स की तुलना मार्केट रिटर्न से करना समझदारी होगी। अपने लक्ष्यों के हिसाब से सही फैसला लेने के लिए किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह भी ले सकते हैं। सही प्लानिंग से रिटायरमेंट के बाद भी आपकी लाइफस्टाइल बरकरार रहेगी।
एक और जरूरी कदम है अपने एसेट एलोकेशन को रिव्यू करना। चूंकि ड्रॉडाउन के दौरान भी आपका पैसा इन्वेस्टेड रहता है, इसलिए रिस्क लेवल का ध्यान रखना जरूरी है। आप चाहें तो अपने फंड को सुरक्षित डेट फंड्स (Debt Funds) की तरफ शिफ्ट कर सकते हैं। इससे आपकी पूंजी सुरक्षित रहेगी और रेगुलर इनकम भी मिलती रहेगी। समय-समय पर अपने पेंशन फंड मैनेजर के परफॉर्मेंस पर नजर जरूर रखें।
ये नए नियम पेंशन सिस्टम को काफी लचीला और काम का टूल बनाते हैं। सिस्टमैटिक विड्रॉल की सुविधा देकर PFRDA ने सब्सक्राइबर्स के लिए एक सुरक्षित भविष्य की राह आसान कर दी है। आज की गई सही प्लानिंग कल आपको एक आरामदायक और आर्थिक रूप से सुरक्षित जीवन देगी। अपने रिटायरमेंट बेनिफिट्स का पूरा फायदा उठाने के लिए अपडेट्स पर नजर रखें और इन फ्लेक्सिबल विकल्पों का इस्तेमाल करें।


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