नई दिल्ली। मोदी सरकार रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से हर माह सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेचती है। गोल्ड बांड की यह बिक्री मोदी सरकार ने 5 नवंबर 2015 को शुरू की थी। तब से आरबीआई हजारों करोड़ रुपये के गोल्ड बांड बेच चुकी है। लेकिन अभी तक इन गोल्ड बांड को वापस लेने का समय नहीं आया था। अब मोदी सरकार ने इन गोल्ड बांड को वापस लेने का रेट तय किया है। यहा करीब डेढ गुना है। अगर आप भी इस कीमत का फायदा उठाना चाहते हैं तो आइये जानते हैं कि क्या करना होगा और कौन इसका फायदा ले पाएगा।
मोदी सरकार ने 5 नवंबर 2015 को पहली बार गोल्ड सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड बेचा था। उस वक्त यह गोल्ड बांड 2916 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से बेचा गया था। अब मोदी सरकार ने इन बांड को वापस खरीदने का रेट तय कर दिया है। यह रेट 4491 रुपये तय किया गया है। इस प्रकार करीब 54 फीसदी ज्यादा रेट पर गोल्ड बांड के निवेशक पैसा ले सकते हैं।
हालांकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश 8 साल के लिए किया जाता है। इसलिए अगर 5 नवंबर 2015 में पैसा लगाने वाले निवेशक चाहें तो अपना गोल्ड बेच सकते हैं, या चाहें तो अभी भी अपने पास रख सकते हैं। अगर नहीं बेचने का ऑप्शन चुनते हैं, तो इस सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को बाद में बेचा जा सकता है। हालांकि अगर बीच में नहीं बेचते हैं, तो 8 साल बाद सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का पैसा उस वक्त के गोल्ड रेट के हिसाब से वापस मिल जाएगा।
हालांकि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले किसी भी निवेशक के 8 साल पूरे नहीं हुए हैं। लेकिन सरकार ने तय नियम के अनुसार वापस खरीदने का रेट का ऐलान कर दिया है। इस रेट पर मार्च 2016 तक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2016 - सीरीज II) तक में निवेश करने वाले अपना पैसा वापस ले सकते हैं।
पहले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में न्यूनतम निवेश की सीमा 2 ग्राम थी। ऐसे में उस वक्त निवेश करने वालों के पास 2-2 ग्राम की यूनिट होगी। ऐसे में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के निवेशक न्यूनतम 2 ग्राम सोना ही बेच सकते हैं। हालांकि बाद में यह यूनिट 1 ग्राम की कर दी गई है। लेकिन जिनको 2 ग्राम की यूनिट एलाट है, वह इसे 1-1 ग्राम करके नहीं बेच सकते हैं।
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जब 5 से 20 नवंबर 2015 के बीच पहली सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी हुआ था, तो निवेशकों ने 246 करोड़ रुपये का करीब 9,15,952 सोना खरीदा था। इस निवेश पर हर साल ब्याज भी दिया जाता है। यह ब्याज साल में 2 बार में दिया जाता है। सालाना यह ब्याज ढाई प्रतिशत होता है। अगर किसी निवेशक ने औसतन 1 लाख रुपये का गोल्ड बांड खरीदा होता तो उसे हर साल 2500 रुपये ब्याज के रूप में भी मिल रहा होगा।
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