वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत में हॉलमार्किंग प्रणाली में सुधार की जरूरत है जो एक सफल स्वर्ण मुद्रीकरण योजना के लिए आवश्यक है। डब्ल्यूजीसी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार मौजूदा प्रणाली को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाए जाने चाहिए क्योंकि ऐसा यदि इसे लागू किया गया तो, भारतीय सोने में विश्वास का पूनर्निमाण होगा, जिससे उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खरीदे गए सोने में कैरेट को लेकर अधिक आत्मविष्वास मिलेगा।
रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि एक कठिन और निरंतर राष्ट्रव्यापी योजना के द्वारा उत्पन्न भारतीय सोने के प्रति बढ़ते आत्मविश्वास में 2020 तक देश के साना निर्यात में मौजूदा US$8 बिलियन से US$40 बिलियन की वृद्धि करने की क्षमता है।
भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा 2000 में एक हॉलमार्किंग मानक की शुरूआत के बाद से (बीआईएस) भारत ने अपनी हॉलमार्किंग प्रणाली विकसित करने में अच्छी प्रगति की है। हालांकि, वर्तमान में भारतीय सोने के आभूषण का केवल 30 फीसदी ही हॉलमार्क है। शुद्धता और औसत अंडर-कैरेटेज में केसी भी स्थान की तुलना में 10% से 15% का व्यापक अंतर देखा जा सकता है।
देखें-आज क्या हैं सोने के दाम
देश भर में भारतीय मानक ब्यूरो से मान्यता प्राप्त हॉलमार्किंग केंद्रों की कमी का प्रभाव भारत सरकार के सोने के मुद्रीकरण योजना के सफल क्रियान्वयन पर पड़ने की संभावना है जो सोने की कोलेटेरेलाइज़ेशसन मूल्य पर निर्भर है।
रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि अधिक कठोर प्रणाली का विकास भारतीय सोने के बाजार को भारी लाभ पहुंचा देगी:
विदेशी खरीदारों और वित्तीय बाजारों के बीच विश्वास में वृद्धि और इसके परिणामस्वरूप एक बड़ा निर्यात बाजार, स्पेक्ट्रम भर में एक मजबूत घरेलू बाजार और रोजगार सृजन।
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