For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

बैंक और बीमा कंपनियों से ऐसे वसूले हर्जाना, आसान है तरीका

|

नई द‍िल्‍ली: आप इस बात से पूरी तरह अवगत होंगे कि बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और म्यूचुअल फंड्स को पेमेंट की डेडलाइन मिस करने पर पेनल्टी देनी होती है। इन सब के साथ टैक्स डिपार्टमेंट भी पेनल्टी से बचा नहीं है। आज आपको यहां बता रहे हैं कि आप खराब सर्विस पर किस तरह मुआवजा मांग सकते हैं।

जानि‍एं क्‍या है इंश्योरेंस पर पेनल्टी
 

जानि‍एं क्‍या है इंश्योरेंस पर पेनल्टी

लाइफ इंश्योरेंस: अगर इंश्योरेंस कंपनी डेथ क्लेम समय पर सेटल नहीं कर पाती है तो उसे अंतिम जरूरी डॉक्युमेंट मिलने के दिन से क्लेम की देय रकम पर रीपो रेट (अभी 5.15%) से 2% ऊपर का ब्याज पेनल्टी के रूप में देना होता है। बता दें बीमा कंपनी केस से जुड़ी किसी भी तरह की क्वेरी क्लेम फाइल होने के 15 दिनों के अंदर ही कर सकती है। क्लेम अप्रूव हुआ है या नहीं, इसके बारे में कंपनी को समुचित दस्तावेज और स्पष्टीकरण मिलने के 30 दिनों के भीतर जानकारी देनी होती है। वहीं केस में इन्वेस्टिगेशन की जरूरत पड़ने पर जांच को 90 दिनों में पूरा करना होता है। जांच पूरी होने के 30 दिनों के भीतर क्लेम का पेमेंट करना होता है या उसे खारिज करना होता है। ध्‍यान रखें कि डेडलाइन मिस होने पर अंतिम डॉक्युमेंट मिलने के दिन से देय रकम पर बैंक रेट प्लस 2% का इंटरेस्ट देना होता है।

बीमाधारक को ड्यू डेट से पहले सूचित करना अन‍िवार्य

वहीं मैच्योरिटी, सर्वाइवल बेनिफिट और ऐन्यूटी क्लेम्स के सेटलमेंट में देरी पर पेनल्टी के तौर पर बीमा कंपनी को अंतिम डॉक्युमेंट मिलने के दिन से देय रकम पर बैंक रेट प्लस 2% का ब्याज देना पड़ता है। इंश्योरेंस कंपनी को बीमाधारक को ड्यू डेट से पहले सूचित करना होता है, पोस्ट डेटेड चेक भेजना होता है या ड्यू डेट पर रजिस्टर्ड अकाउंट में देय रकम जमा करानी होती है। फ्री लुक कैंसलेशन, सरेंडर, विदड्रॉल, प्रपोजल डिपॉजिट के रिटर्न की रिक्वेस्ट मिलने के बाद 15 दिन के भीतर रिफंड नहीं मिलने पर रिक्वेस्ट या अंतिम डॉक्युमेंट मिलने के दिन, जो भी बाद में आए, से देय रकम पर बैंक रेट प्लस 2% इंटरेस्ट की पेनल्टी ली जा सकती है।

जनरल इंश्योरेंसः अगर बीमा कंपनी समय पर क्लेम सेटल नहीं कर पाती है तो उसे पेनल्टी के तौर पर अंतिम डॉक्युमेंट मिलने के दिन से पेमेंट तक की अवधि के लिए बैंक रेट प्लस 2% का ब्याज देना होता है। कंपनी के पास क्लेम मानने या खारिज करने के लिए फाइनल सर्वे रिपोर्ट और संबंधित सूचना मिलने के बाद 30 दिनों का समय होता है।

हेल्थ इंश्योरेंस: इसके साथ ही हेल्‍थ इंश्‍योरेंस क्लेम सेटलमेंट में देरी होने पर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को अंतिम डॉक्युमेंट मिलने के दिन से पेमेंट तक बैंक रेट प्लस 2% का ब्याज बतौर पेनाल्टी देना होता है। रेगुलर केस में कंपनी को क्लेम 30 दिनों के भीतर सेटल करना होता है। केस में इनवेस्टिगेशन की जरूरत होने पर जांच अंतिम डॉक्युमेंट हासिल होने के 30 दिनों के भीतर पूरा करनी होती है और क्लेम 45 दिनों के भीतर सेटल करना होता है।

म्यूचुअल फंड

बता करें म्यूचुअल फंड की तो अगर रिडेम्शन या डिविडेंड की रकम अदा करने की रिक्वेस्ट के 10 दिनों या डिविडेंड डिक्लेयर होने के 30 दिनों बाद भी म्यूचुअल फंड पेमेंट नहीं कर पाता है तो उससे पेनल्टी के तौर पर 15% की दर से देय रकम पर देरी वाली अवधि के लिए ब्याज लिया जा सकता है।

बैंक की ओर से 100रुपये डेली की पेनल्टी

बैंक की ओर से 100रुपये डेली की पेनल्टी

अगर एटीएम ट्रांजैक्शन में आपके अकाउंट से पैसे कट जाते हैं लेकिन कैश नहीं मिलता तो बैंक के पास उसे रिवर्स करने के लिए 6 दिन (ट्रांजैक्शन वाले दिन के बाद पांच दिन और) का समय होता है। डेडलाइन मिस होने पर बैंक पर सातवें दिन से 100 रुपये डेली की पेनल्टी शुरू हो जाती है।

पीओएस यानी किसी मर्चेंट के पास लगी मशीन से ट्रांजैक्शन के दौरान आपके खाते से पैसे निकल जाते हैं लेकिन चार्ज स्लिप जेनरेट नहीं होती है तो इसमें ट्रांजैक्शन रिवर्सल के लिए T+5 दिन का समय होता है। इसके बाद 100 रुपये रोजाना की पेनल्टी शुरू हो जाती है।

ई कॉमर्स के जर‍िए लेनदेन में
 

ई कॉमर्स के जर‍िए लेनदेन में

ई-कॉमर्स ट्रांजैक्शन करते वक्त कार्ड से पैसे कट जाएं लेकिन ट्रांजैक्शन पूरा न हो तो उसमें भी रिवर्सल के लिए T+5 दिन का समय होता है और उसके बाद 100रुपये रोजाना की पेनल्टी शुरू हो जाती है।

वहीं अगर पेड वॉलिट प्रॉपराइटरी पेमेंट सिस्टम के इस्तेमाल के दौरान यूपीआई पर आईएमपीएस के जरिए फंड ट्रांसफर, ऑनलाइन खरीदारी फेल होने पर अगर आपके एकाउंट से पैसे कट जाते हैं लेकिन वे बेनेफिशियरी के एकाउंट में नहीं पहुंचते हैं तो आपको उसका रिवर्सल T+1 दिन में मिल जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो आप तीसरे दिन से रोजाना ~100 की पेनाल्टी के हकदार होंगे।

टैक्सेशन के न‍ियम

टैक्सेशन के न‍ियम

अगर आपको अडवांस टैक्स या टीडीएस के तौर पर अदा की गई अतिरिक्त रकम का रिफंड समय पर नहीं मिलता है तो आपको रिफंड पर हर महीने 0.5% का ब्याज मिलेगा लेकिन रिफंड की रकम टैक्स लायबिलिटी के 10% से कम होती है तो आपको उस पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। वहीं अगर रिटर्न 31 जुलाई से पहले दाखिल किया गया है तो ब्याज असेसमेंट ईयर में 1 अप्रैल से रिफंड पेमेंट की तारीख तक के लिए मिलेगा। रिटर्न बाद में फाइल होने पर यह पीरियड तब से शुरू होगा। सेल्फ असेसमेंट टैक्स का ऐक्सेस पेमेंट होने पर रिफंड के लिए इंटरेस्ट पेमेंट वाला पीरियड उस दिन से शुरू होगा, जिस दिन टैक्स पेमेंट की गई होगी या रिटर्न दाखिल किया गया होगा (जो भी डेट बाद में आएगी)। डेडलाइन मिस होने के बाद असेसी को बकाया रिफंड पर हर महीने 0.5% की दर से ब्याज मिलेगा। अगर रिफंड टैक्स लायबिलिटी के 10% से कम है तो आपको कोई ब्याज नहीं मिलेगा।

English summary

Know Easy Way To Recover Such Charges From Banks And Insurance Companies

If the deadline is missed on bad service in insurance, there is also a provision of interest of bank rate plus 2% from the day of the last document is found here।
Story first published: Friday, December 6, 2019, 15:26 [IST]
Company Search
Thousands of Goodreturn readers receive our evening newsletter.
Have you subscribed?
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Goodreturns sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Goodreturns website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more