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बुरी खबर : कच्चे माल की कीमतों में 200 फीसदी बढ़ोतरी से कोरोना की दवाइयां पड़ सकती हैं कम

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नई द‍िल्‍ली, मई 3। पिछले साल महामारी की शुरुआत के बाद से इस समय भारत कोविड-19 मामलों में सबसे खराब स्थिति से जूझ रहा है। इसी बीच मेडिकल मोर्चे पर एक और बुरी खबर आई है। पिछले एक महीने में प्रमुख कोविड-19 दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में 200 प्रतिशत तक का उछाल आया है। दवा बनाने वाली कंपनियों ने सरकार के सामने कीमतों में हुई इस वृद्धि को लेकर चिंता व्यक्त की है। इतना ही नहीं कई कंपनियों ने आने वाले महीनों में प्रमुख दवाओं की कमी की संभावना जताई है। इसका कारण कीमतों में वृद्धि और बाजार में कच्चे माल की अनुपलब्धता है।

 

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सक्रिय दवा सामग्रियों के बढ़े दाम

सक्रिय दवा सामग्रियों के बढ़े दाम

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल्स उद्योग की तरफ से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कई सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) की कीमतें पिछले एक महीने में (मार्च से अप्रैल के दौरान) 30 से 200 फीसदी तक बढ़ी हैं। इनमें इवरमेक्टिन, मेथिलप्रेडनिसोलोन, डॉक्सीसाइक्लिन, एनोक्सापारिन, पेरासिटामोल, एज़िथ्रोमाइसिन, मेरोपेनेम और पिपराताज़ो शामिल हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एपीआई दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे उत्पाद होते हैं।

कीमतों में हो रहा जबरदस्त बदलाव
 

कीमतों में हो रहा जबरदस्त बदलाव

दवा निर्माता कंपनियां कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से जूझ रही हैं। इस स्थिति को "खतरनाक" करार दिया गया है। एक दवा कंपनी के अधिकारी के अनुसार इन कच्चे माल के व्यापारी और निर्माता अलग-अलग कीमतें बता रहे हैं। कभी-कभी तो चार घंटे के भीतर ही रेट बदत जाते हैं। स्थिति बहुत खराब है। यदि सरकार ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया तो आने वाले महीनों में दवाओं की कमी की संभावना है।

एक और बड़ा कारण

एक और बड़ा कारण

दवाइयों की कमी और उनके रेट बढ़ने का एक और कारण है। भारत में चीनी कार्गो सेवाओं को निलंबित किए जाने से दवा के कच्चे माल का आयात प्रभावित हुआ है। इससे इंडस्ट्री की चिंता बढ़ी है। भारत अपनी दवाइयों के कच्चे माल का 70 प्रतिशत चीन से आयात करता है। 26 अप्रैल को चीन ने सिचुआन एयरलाइंस की कार्गो उड़ानों को 15 दिनों तक के लिए निलंबित कर दिया, जो भारत में मेडिकल सप्लाई पहुंचा रही थी। इससे महत्वपूर्ण दवाओं के कच्चे माल की जमाखोरी हुई है।

दवाओं की भारी किल्लत संभव

दवाओं की भारी किल्लत संभव

भारत आने वाले कार्गो को चीन ने निलंबित कर दिया है। इससे जून और जुलाई में महत्वपूर्ण दवाओं की भारी कमी होने की पूरी संभावना है। यहां तक कि सरल उत्पादों जैसे कि एज़िथ्रोमाइसिन, पेरासिटामोल और मोंटेलुकास्ट की आपूर्ति भी घट सकती है। एपीआई बनाने में जरूरी ऑक्सीजन की कमी और और महामारी के कारण उत्पादन के लिए मैनपावर में कमी से दवाओं के कच्चे माल की कम आपूर्ति हो रही है। भारत इस समय कोविड-19 रोगियों के लिए हो रही मांग के कारण मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी का सामना कर रहा है। इसीलिए देश में विदेशों से ऑक्सीजन आयात की जा रही है।

पहले भी सरकार को दी चेतावनी

पहले भी सरकार को दी चेतावनी

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फार्मास्यूटिकल्स उद्योग ने पहले ही 5 अप्रैल को कच्चे माल की कीमतों में "अभूतपूर्व" बढ़ोतरी को लेकर सरकार के सामने चिंता व्यक्त कर दी थी।

English summary

there may be shortage of Corona medicines due to 200 percent increase in raw material prices

According to data provided by the pharmaceuticals industry, prices of many active pharmaceutical ingredients (APIs) have risen by 30 to 200 per cent in the last one month (during March to April).
Story first published: Monday, May 3, 2021, 18:02 [IST]
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