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Birthday : जानें रतन टाटा की सफलता का राज, आप भी उठा सकते हैं फायदा

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नई दिल्‍ली। देश और दुनिया का जानमाना कारोबारी ग्रुप टाटा आज अपने परिचय का मोहताज नहीं है। इस ग्रुप ने देश को एक से बढ़कर एक कारोबारी रतन दिए हैं। उनमें से एक हैं रतन टाटा। आज इनका जन्मदिन है। हालांकि रतन टाटा सक्रिय रूप से टाटा ग्रुप से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उनकी सलाह आज भी इस ग्रुप के लिए बड़ा सहारा है। असल बात तो यह है कि वह काफी पहले रिटायर होना चाहते थे, पूरी कंपनी ने मिलकर उनको 5 साल के लिए और रोक लिया था। जब रतन टाटा 75 साल के हुए तो उन्होंने कंपनी से हाथ जोड़ कर विदा ली, क्योंकि कंपनी उनको रिटायर नहीं होने देना चाहती थी। बाद उनके उत्तराधिकार के एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्च कमेटी बनी और वह रिटायर हो सके। जहां लोग पदों की दौड़ में किसी भी हद तक जा रहे हों, वहां अपना पद खुद ही छोड़ने की पहल आज भी भारत के कारोबारी जगत में मिशाल मानी जाती है। टाटा ग्रुप देश का सबसे बड़ा कारोबारी घराना है, और यह मालिकाना ढांचे की जगह ट्रस्‍ट के रूप में चलाया जाता है। यहां पर ग्रुप जब पैसे कमाता है तो उसका 65 फीसदी मुनाफा समाज में भलाई के लिए खर्च किया जाता है। देश में कैंसर का सबसे बड़ा अस्‍पताल टाटा ट्रस्‍ट ही चला रहा है। रतन टाटा अब टाटा संस के चेयरमैन एमेरिट्स और टाटा ट्रस्‍ट के अध्यक्ष हैं। आज रतन टाटा का जन्म दिन (जन्म 28 दिसंबर 1937) है। रतन टाटा का जन्‍म गुजरात के सूरत में हुआ था।

 

रतन टाटा का विरोधियों को लेकर दर्शन

रतन टाटा का विरोधियों को लेकर दर्शन

कारोबारी जीवन में कई ऐसे मौके आए जब उनके विरोधियों ने उनका खूब विरोध किया। लेकिन रतन टाटा कभी विरोधियों पर हमलावर नहीं हुए यानी उन्होंने कभी पलटकर बयानबाजी नहीं की। उनके अनुसार अगर गलत नहीं किया है, तो एक न एक दिन वह अपने आप सही साबित हो ही जाएंगे।

रतन टाटा ने कहीं ये 5 बड़ी बातें
 

रतन टाटा ने कहीं ये 5 बड़ी बातें

-लोग आप पर जो पत्थर फैंकते हैं, उसका उपयोग कर स्मारक बना लें।

-आगे बढ़ने के लिए हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव बहुत जरूरी है, क्योंकि ईसीजी में सीधी लाइन का मतलब होता है, हम जिंदा नहीं है।

-अगर आप तेज चलना चाहते हैं, तो अकेले चलें। पर अगर आप लंबा चलना चाहते हैं, तो साथ चलें।

-मैं सही फैसले लेने में विश्वास नहीं करता, मैं फैसले लेता हूं और फिर उन्हें सही करता हूं।

-लोहे को उसकी खुद की जंग के अलावा कोई नहीं नष्ट कर सकता, इसी तरह किसी व्यक्ति को उसके खुद के माइंडसेट के अलावा कोई खत्म नहीं कर सकता।

गोद लिए बेटे हैं रतन टाटा

गोद लिए बेटे हैं रतन टाटा

रतन टाटा, नवल टाटा के बेटे हैं, जिन्हें नवजबाई टाटा ने गोद लिया था। रतन टाटा के माता-पिता 1948 में एक दूसरे से अलग हो गए थे। तब रतन टाटा 10 वर्ष और उनके छोटे भाई जिम्मी 7 साल के थे। तब जमशेदजी टाटा के बेटे रतनजी टाटा की पत्नी नवाजबाई ने इन्हें गोद ले लिया था। उन्होंने इनका लालन पालन किया, जिन्हें रतन टाटा अपनी दादी मानते हैं।

रतन टाटा ने हार्वर्ड से करी है उच्‍च शिक्षा

रतन टाटा ने हार्वर्ड से करी है उच्‍च शिक्षा

रतन टाटा ने अपनी शुरुआती पढ़ाई मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल और माध्यमिक शिक्षा शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से की है। इसके बाद उन्होंने बी.एससी., आर्किटेक्चर में स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के साथ कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क से 1962 में पूरा करी। इसके बाद उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से 1975 में एडवांस्ड मैनेजमेंट प्रोग्राम पूरा किया।

सामान्‍य कर्मचारी के रूप में शुरू किया रतन टाटा ने कॅरियर

सामान्‍य कर्मचारी के रूप में शुरू किया रतन टाटा ने कॅरियर

रतन टाटा ने टाटा ग्रुप के साथ अपने कॅरियर की शुरुआत 1961 में आम कर्मचारी के रूप में शुरू की थी। काफी समय बाद वह संकट में घिरी राष्ट्रीय रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी (नेल्को) में प्रभारी निदेशक बनाए गए। इसको बाद में उन्‍होंने सफल कंपनी बना दिया। इस सफलता के बाद उन्‍हें 1981 में टाटा इंडस्ट्रीज का अध्यक्ष बनाया गया और बाद में 1991 में जेआरडी टाटा ने टाटा ग्रुप का जब अध्यक्ष पद छोड़ा तो वह रतन टाटा को ही मिला। इस पद से भी रतन टाटा खुद ही 28 दिसंबर 2012 को रिटायर हुए। रतन टाटा के कार्यकाल टाटा घराने की मार्केट वैल्यू 50 गुना से ज्‍यादा बढ़ी थी।

सिर्फ सम्मान की लड़ाई लड़ते हैं रतन टाटा

सिर्फ सम्मान की लड़ाई लड़ते हैं रतन टाटा

यह बात 1999 की है तब रतन टाटा फोर्ड कार कंपनी के मुख्‍यालय डेट्राॅयट गए थे। इस मुलाकात में रतन टाटा अपनी तरफ से टाटा मोटर्स को बेचना चाहते थे, लेकिन इस दौरान फोर्ड मोटर्स के बिल फोर्ड ने रतन टाटा की बेइज्जती करते हुए कहा कि हम तुम पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं। क्योंकि हम तुम्हारी ये टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल कंपनी खरीद रहे हैं। उन्‍होंने रतन टाटा से कहा कि जब गाड़ी बनानी नहीं आती तो इस धंधे में आए क्यों थे। रतन टाटा को यह बात खटक गई और उन्‍होंने टाटा मोटर्स को बेचने का विचार छोड़ दिया और वापस मुंबई आ गए। इसके बाद उन्‍होंने कड़ी मेहनत से टाटा मोटर्स को दुनिया की बड़ी कंपनी बना दिया। इस बीच 2009 में बिल फोर्ड की कंपनी घाटे में आ गई और दिवालिया होने के कगार पर पहुँच गई। इस दौरान टाटा ग्रुप ने उनकी कंपनी के खरीदने का एक प्रस्‍ताव दिया। जब फोर्ड की पूरी टीम मुंबई आई तो रतन टाटा ने उनसे कहा कि टाटा मोटर्स आपके 'जैगुआर' और 'लैंड रोवर' को खरीदकर आप पर बहुत बड़ा अहसान कर रहे हैं।

रतन टाटा के बारे में 6 बड़ी बातें

रतन टाटा के बारे में 6 बड़ी बातें

1. रतन टाटा 1991 में जेआरडी टाटा के बाद समूह के पांचवें अध्यक्ष बने।

2. रतन टाटा को 2000 में पद्‍मभूषण और 2008 में पद्‍म विभूषण से सम्मानित किया गया।

3. रतन टाटा ने टेटली, जगुआर लैंड रोवर और कोरस जैसी कंपनियों का अधिग्रहण किया।

4. रतन टाटा ने नैनो जैसी लखटकिया कार बनाकर आम आदमी का कार का सपना पूरा किया।

5. रतन टाटा के दौर में ही इंडिका जैसी कार भी बाजार में लांच की गई।

6. टाटा ने विकसित देशों की कई ऐसी कंपनियों का अधिग्रहण कर लिया जो अपने देश में सुपर ब्रांड थीं।

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English summary

Ratan Tata birthday today know interesting things related to him

On Ratan Tata's birthday, know how he made the Tata group international.
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