For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और झटका, बढ़ सकता है राजकोषीय घाटा

|

नयी दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर से गुजर रही है। ऐसे में अर्थव्यवस्था के लिए एक और बुरी खबर आयी है। दरअसल वित्त वर्ष 2019-20 के लिए केंद्र सरकार का बजटीय राजकोषीय घाटे लक्ष्य से अधिक रह सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के राजकोषिय घाटे के 3.5-3.8 फीसदी के दायरे में रहने की संभावना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली बजट टीम दिसंबर में अग्रिम टैक्स आँकड़े जारी होने के बाद इस मामले में कार्रवाई पर फैसला करेगी। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सरकार का राजकोषीय घाटा लक्ष्य 7.04 लाख करोड़ रुपये का है। मगर अक्टूबर स समाप्ति पर यह लक्ष्य का 102.4 फीसदी रहा। 3.3 फीसदी का लक्ष्य हासिल करने के लिए वास्तविक जीडीपी को जीडीपी के 12 फीसदी पर वृद्धि करने की जरूरत है। दूसरी तिमाही में 6 फीसदी की विकास दर को देखते हुए यह एक बेहद मुश्किल चीज है। ऐसे में यह मानते हुए कि वित्त वर्ष 2019-20 का राजकोषीय घाटा 7.04 लाख करोड़ रुपये रहे, प्रतिशत के लिहाज से यह लगभग 3.5 फीसदी रह सकता है।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक और झटका, बढ़ेगा राजकोषीय घाटा

 

विनिवेश और नॉन-टैक्स आमदनी लक्ष्य के करीब

सरकार के रेवेन्यू पर नजर डालें तो विनिवेश और नॉन-टैक्स से प्राप्त आमदनी के लक्ष्य को छूने की संभावना है, मगर सकल टैक्स रिसीट के लक्ष्य में कम से कम से 2 लाख करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। सरकार के रेवेन्यू को एक और झटका टैक्स कलेक्शन से लग सकता है। क्योंकि अप्रैल से नवंबर की अवधि में सेंट्रल जीएसटी कलेक्शन 5.26 लाख करोड रुपये के मुकाबले 40 फीसदी कम 3.3 लाख करोड़ रुपये रहा। यह आँकड़ा खुद लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने दिया है।

क्या होता है राजकोषीय घाटा

आपको बता दें कि सरकार के कुल रेवेन्यू या आमदनी और एक्सपेंडिचर यानी खर्चों के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। कुल खर्चों से कुल आमदनी से अधिक होने पर सरकार बाजार से लोन लेती है। बहुत ज्यादा राजकोषीय घाटे से ब्याज दरें बढ़ाती हैं और इससे अर्थव्यवस्था पर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ सकता है। नवंबर अंत तक रिफंड के बाद प्रत्यक्ष कर संग्रह 5.5 लाख करोड़ रुपये है। 13.35 लाख करोड़ रुपये के बजटीय टैक्स अनुमान को पूरा करने के लिए, टैक्स संग्रह 31 फीसदी तक बढ़ाना होगा।

 

गोल्ड : असली रिटर्न तो अगले साल मिलेगा

English summary

One more setback on the economy front fiscal deficit may increase

Indian economy is going through a slowdown. Increase in Fiscal Deficit will impact on Indian economy.
Story first published: Wednesday, December 11, 2019, 13:54 [IST]
Company Search
Thousands of Goodreturn readers receive our evening newsletter.
Have you subscribed?
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Goodreturns sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Goodreturns website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more