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मुसीबत में एक और बैंक, RBI ने लगाया पहरा

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नयी दिल्ली। एक और बैंक के सामने वित्तीय संकट आ गया है। 2020 में कई बैंक आरबीआई की निगरानी के दायरे में आए हैं, जिनमें यस बैंक शामिल है। ताजा मामला लक्ष्मी विलास बैंक का है। आरबीआई ने मामला हाथ में लेते हुए कहा है कि लक्ष्मी विलास बैंक के रोजाना के मामलों को चलाने के लिए निदेशकों की समिति (सीओडी) तैयार की गई है, जो एमडी और सीईओ पदों की जिम्मेदारी भी संभालेगी। पिछले हफ्ते हुई लक्ष्मी विलास बैंक की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों ने बोर्ड के सात सदस्यों को बैंक से बाहर करने पर मुहर लगा दी थी। ये 7 सदस्य बैंक में जिम्मेदारी संभालना जारी रखें, शेयरधारकों ने इसके खिलाफ वोट किया था। इन 7 सदस्यों में बैंक के 2 प्रमोटर भी शामिल हैं।

बैंक की हालत खस्ता
 

बैंक की हालत खस्ता

बता दें कि लक्ष्मी विलास बैंक की हालत खस्ता है। अप्रैल-जुलाई तिमाही में बैंक का टियर 1 रेशियो -1.83 रहा। टियर 1 पूंजी अनुपात किसी बैंक की कोर टियर 1 पूंजी का अनुपात होता है और टियर 1 पूंजी बैंक की वित्तीय ताकत मापने का मुख्य जरिया है। जून तिमाही में बैंक की डिपॉजिट भी 27 फीसदी की गिरावट के साथ 21,161 करोड़ रु की रह गई। वैसे अच्छी बात ये है कि 27 सितंबर 2020 तक लगभग 262 प्रतिशत के लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (एलसीआर) के साथ जमाकर्ता, बॉन्डधारकों, खाताधारकों और लेनदार अच्छी तरह से सुरक्षित हैं। आरबीआई के नियमों के अनुसार एलसीआर कम से कम 100 होना चाहिए।

पैसों की है जरूरत

पैसों की है जरूरत

एलसीआर के बहुत अच्छी हालत में होने के बावजूद बैंक को पूंजी की सख्त जरूरत है और ये खरीदार ढूंढने के लिए हाथ-पांव मार रहा है। लक्ष्मी विलास बैंक विलय के लिए क्लिक्स कैपिटल के साथ बातचीत भी कर रहा है, जिससे इसे जरूरी पूंजी मिल सकेगी। बैंक ने कहा है कि जब भी जरूरी होगा वे पब्लिक के साथ जानकारी साझा करता रहेगा। इस बीच पिछले हफ्ते शेयरधारकों ने वैधानिक लेखा परीक्षकों (पी चंद्रशेखर एलएलपी, चार्टर्ड एकाउंटेंट्स) और ब्रांच ऑडिटर की फिर से नियुक्ति के खिलाफ वोट किया। ब्रांच ऑडिटर वैधानिक लेखा परीक्षक के परामर्श से नियुक्त किया जाता है।

गड़बड़ियों के आरोप
 

गड़बड़ियों के आरोप

ईटी की रिपोर्ट के अनुसार कैप्री ग्लोबल कैपिटल, जिसकी बैंक में 4% से भी कम हिस्सेदारी है, बैंक के डायरेक्टर्स के खिलाफ वोट करने वाले संस्थागत निवेशकों में से है। कैप्री ग्लोबल के प्रबंध निदेशक के मुताबिक कि उनकी कंपनी ने बैंक की वर्तमान स्थिति के आधार पर फैसला लिया। उन्होंने कहा कि बैंक घाटे में चल रहा है। धोखाधड़ी के भी आरोप हैं। पिछले हफ्ते ही दिल्ली पुलिस ने दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया। शेयर की कीमत भी 150 रुपये से गिरकर 20 रुपये रह गई है। इसी सब को देखते हुए फैसला लिया गया। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस की बैंक में 4.99% हिस्सेदारी है। वहीं जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के पास 3.88%, श्रेई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस और डीएचएफएल प्रामेरिका लाइफ इंश्योरेंस की क्रमशः 3.34% और 2.73% हिस्सेदारी है। प्रमोटरों के पास बैंक की 6.8% हिस्सेदारी है।

एनपीए बना लोन

एनपीए बना लोन

तमिलनाडु के करूर में 7 व्यापारियों के एक समूह ने 94 साल पहले लक्ष्मी विलास बैंक की शुरुआत की थी। मगर अब ये कठिन समय से जूझ रहा है। इसके लोन का बड़ा हिस्सा एनपीए में तब्दील हो गया है। इसीलिए आरबीआई को मजबूर होकर इसे त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) फ्रेमवर्क के तहत लाना पड़ा।

2020 में 44 बैंकों पर रोक लगा चुका है RBI, कहीं आपका पैसा तो नहीं फंसा

English summary

Financial crisis in front of Lakshmi Vilas Bank RBI becomes tough

RBI has taken up the case saying that a committee of directors (COD) has been set up to run the daily affairs of Lakshmi Vilas Bank, which will also hold the responsibility of MD and CEO positions.
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