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फिच ने भारत की रेटिंग में लगातार 12 वें साल नहीं किया कोई बदलाव

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रेटिंग एजेंसी फिच ने बड़े आर्थिक मोर्चे पर जोखिमों को देखते हुए भारत की रेटिंग को फिलहाल स्थिर परिदृश्य के साथ 'बीबीबी-' बनाए रखने की घोषणा की। बता दें कि ऐसा यह लगातार 12वां साल है जब उसने भारत की वित्तीय साख को ऊंचा करने से इनकार किया है। 'बीबीबी-' रेटिंग निवेश कोटि में सबसे नीचे है।

रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि भारत की राजकोषीय कमजोरी देश की रेटिंग में सुधार की राह में आड़े आ रही है। इतना ही नहीं उसका कहना है कि भारत का वृहतआर्थिक परिदृश्य बड़ा जोखिम भरा है। प्रतिद्वंदी एजेंसी मूडीज ने नवंबर 2017 में भारत की रेटिंग में सुधार किया था। उसके बाद से सरकार फिच से भी बेहतर रेटिंग की वकालत कर रही है।

फाइनेंशियल सेक्‍टर की स्‍थिति कमजोर
 

फाइनेंशियल सेक्‍टर की स्‍थिति कमजोर

फिच ने पहली अगस्त 2006 को भारत की रेटिंग बीबी प्लस से स्थिर परिदृश्य के साथ बीबीबी- किया था। फिच ने 2012 में देश की वित्तीय साख की रेटिंग पहले के स्तर पर ही रखते हुए आर्थिक परिदृश्य को नकारात्मक कर दिया। लेकिन अगले साल परिदृश्य फिर से स्थिर कर दिया गया था।

एजेंसी के बयान के मुताबिक 'फिच रेटिंग्स ने दीर्धकालिक विदेशी मुद्रा ऋण के लिए भारत की डिफॉल्ट रेटिंग (आईडीआर) को स्थिर परिदृश्य के साथ 'बीबीबी-' पर बनाए रखने की पुष्टि की है।

जीडीपी के 70 फीसदी के करीब पहुंचा

जीडीपी के 70 फीसदी के करीब पहुंचा

हांलाकि वहीं उसने कहा कि वृहत आर्थिक परिदृश्य बड़ा जोखिम भरा है। कर्ज कारोबार में वृद्धि कम होने से बैंकिंग और गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के लिये दिक्कतें बढ़ेगी। एजेंसी की माने तो राजकोषीय स्थिति की लगातार कमजोरी भारत सरकार की रेटिंग में बाधा उत्पन्न करेगी। सरकारी कर्ज सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी के 70 फीसदी के करीब पहुंच गया है।

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीएसटी संग्रह कम रहने और आगामी चुनावों के मद्देनजर खर्च पर नियंत्रण में दिक्कत से राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसदी पर रखने के लक्ष्य को हासिल करने में दिक्कत आएगी। एजेंसी ने इसे राजकोषीय स्थिति की कमजोरी का प्रमुख कारक माना है।

अनुमान हैं कि अगले दो वित्त वर्षों में वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत
 

अनुमान हैं कि अगले दो वित्त वर्षों में वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत

एजेंसी ने रिपोर्ट में कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था कुछ संरचात्मक कमजोरी प्रदर्शित करती आ रही है। फिच ने बयान में कहा कि भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि के 2017-18 के 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 2018-19 में 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। लेकिन अगले दो वित्त वर्षों में वृद्धि दर घटेगी।

फिच की रपट में कहा गया है कि वित्तीय स्थिति कठिन होने, वित्तीय क्षेत्र की बैलेंसशीट की कमजोरी और अंतराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से वित्त वर्ष 2019-20 और 2020-21 में वृद्धि दर के घटने का जोखिम है। एजेंसी अनुमान है कि अगले दो वित्त वर्षों में वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहेगी।

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English summary

Fitch Kept Indias Rating Uncharged For 12 Consecutive Years

Rating agency Fitch has denied India's financial credibility for the 12th consecutive year।
Story first published: Friday, November 16, 2018, 10:28 [IST]
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