SCSS Investment For Tax Savings: सीनियर सिटीजन के टैक्स सेविंग्स के लिए सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम(एससीएसएस) एक बढ़िया स्कीम है।
इस स्कीम में टैक्सपेयर्स हर साल सेक्शन 80 सी के अंतर्गत 1.5 लाख तक डिपॉजिट कर टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता है।
सेक्शन 80सी का टैक्स डिडक्शन ओल्ड टैक्स रिजीम में ही क्लेम कर सकते हैं। यह स्कीम 60 साल से ज्यादा उम्र के भारतीय नागरिकों के लिए है। चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आप इसमें अकाउंट खोल सकते हैं।
ऐसे खोलें SCSS स्कीम में अपना अकाउंट
SCSS के तहत 60 साल या उससे ज्यादा की उम्र का व्यक्ति अकाउंट खुलवा सकता है। यह स्कीम सरकारी/प्राइवेट क्षेत्र के बैंकों और पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध है।
SCSS खाता खोलने की तारीख से 5 साल के बाद जमा राशि मैच्योर होती है, लेकिन यह टेन्योर एक ही बार 3 और साल के लिए बढ़ाई जा सकती है।
मिनिमम कितनी राशि डिपॉजिट कर सकते हैं आप
SCSS में मिनिमम डिपॉजिट 1,000 रुपये है और अधिकतम राशि 30 लाख रुपये आप जमा कर सकते हैं। सीनियर सिटीजन सेविंगस स्कीम अकाउंट को आप देश के किसी भी ऑथराइज्ड बैंक या सभी भारतीय पोस्ट ऑफिस में खोल सकते हैं।
अकाउंट खोलने के लिए आपको आधार, पैन, एड्रेस प्रूफ, एज प्रूफ आदि डॉक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी के साथ KYC करवानी होगी।
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम्स में अकाउंट खोलने और बंद करवाने के समय नॉमिनेशन फैसिलिटी भी है। इस अकाउंट को एक पोस्ट ऑफिस से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर किया जा सकता है और इसमें अकाउंट होल्डर प्रीमैच्योर क्लोजर कर सकते हैं।
इस स्कीम से मिलेगा जबरदस्त रिटर्न
1 जनवरी 2024 से इस स्कीम पर सालाना 8.2 फीसदी ब्याज मिल रहा है। सरकारी स्कीम होने के चलते इस पर मिलने वाले रिटर्न गारंटीड है।
इसके साथ ही SCSS में टैक्स छूट का भी लाभ मिलता है। SCSS में 1.5 लाख रुपये तक सालाना डिपॉजिट पर इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 80C के अतर्गत टैक्स छूट क्लेम की जा सकती है।
SCSS में इन्वेस्टमेंट TDS कटौती तक 2020-21 के बाद से लागू है और अगर ब्याज की इनकम तय लिमिट से ज्यादा नहीं है तो फॉर्म 15G/15H जमाकर TDS से राहत ले सकते हैं।
आपको बता दें कि अगर कोई 55 साल या उससे ज्यादा का है लेकिन 60 साल से कम का है और VRS (Voluntary retirement scheme) ले चुका है तो वह भी SCSS में अकाउंट खोल सकता है, लेकिन उसे रिटायरमेंट बेनिफिट्स मिलने के एक माह के अंदर यह अकाउंट खुलवाना होगा और इसमें डिपॉजिट किया जाने वाला अमाउंट रिटायरमेंट बेनिफिट्स के अमांउट से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
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