नयी दिल्ली। कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए आयकर विभाग 5 लाख रुपये तक के सभी लंबित आयकर रिफंड जारी कर रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि केवल एक सप्ताह में ही 10.2 लाख लोगों को 4,250 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया जा चुका है। कुछ मामलों में आयकर विभाग रिफंड क्लेम को प्रोसेसिंग करने से पहले ईमेल भेजकर करदाता से पुष्टि करता है। अभी भी ऐसे 1.74 टैक्सपेयर को ईमेल का जवाब देना है, जिससे ऐसे क्लेम की प्रोसेसिंग में देर हो रही है। आयकर विभाग का कहना है कि ये ईमेल लाभार्थी टैक्सपेयर के लिए रिमाइंडर हैं। आयकर विभाग इस ईमेल की पुष्टि के जरिए टैक्सपेयर की बकाया मांग और बैंक खाते आदि की पुष्टि करता है। अगर आपने भी रिफंड क्लेम किया है और आप जल्दी से टैक्स रिफंड चाहते हैं तो फटाफट अपने ई-फिलिंग अकाउंट में लॉग-इन करें और रिफंड पुष्टीकरण का जवाब दें।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक बयान में कहा है कि ये एक जरूरी रूटीन प्रोसेस है, जो टैक्सपेयर से संवाद के लिए है। इसके जरिए दोषपूर्ण आईटीआर, प्रथम द्रष्टि पर आधारित एडजस्टमेंट और करदाताओं द्वारा किए गए क्लेम पर रेस्पोंस लिया जाता है। इस तरह के सभी मामलों में करदाता की तरफ से किए गए तुरंत रेस्पोंस से आयकर विभाग उनका रिफंड तेजी से करेगा। ध्यान रखें कि अगर आपके पास भी ऐसा ही कोई ईमेल आया है तो उसका तुरंत जवाब दें ताकि आपको फटाफट रिफंड किया जाए।
इस राहत का ऐलान वित्त मंत्रालय की तरफ से भी किया गया। वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट करके कहा था कि कोरोना संकट के कारण करदाताओं को राहत देने के लिए आयकर विभाग 5 लाख रुपये तक के सभी लंबित आयकर रिफंड तुरंत जारी करेगा। सभी जीएसटी और कस्टम रिफंड भी जारी किए जाएंगे, जिससे एमएसएमई सहित करीब 1 लाख बिजनेस एंटिटीज को फायदा मिलेगा। इस फैसले के तहत कुल 18000 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। इसमें से करीब 4250 करोड़ रुपये का रिफंड जारी कर दिया गया है।
सरकार के इस कदम से उन व्यक्तियों को राहत मिलेगी, जो वेतन में कटौती या नौकरी छूटने के कारण नकदी की कमी का सामना कर रहे हैं या अपने एम्प्लोयर की तरफ से सैलेरी जारी किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। अतिरिक्त टैक्स को रिफंड के रूप में प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति को आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है। हर साल में आपको एक बार एक आईटीआर फॉर्म में सरकार के सामने आमदनी, खर्च, निवेश और टैक्स देनदारी के बारे की जानकारी देनी होती है। इसी को आयकर रिटर्न (इनकम टैक्स रिटर्न या आईटीआर) कहते हैं। इनकम टैक्स रिफंड तब बकाया होता है जब किसी व्यक्ति की आय में काटा जाने वाला टैक्स किसी वित्त वर्ष में उसकी टैक्स देनदारी से अधिक होता है।
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