SIP vs Step-up SIP: शेयर बाजार में इन दिनों रिकॉर्ड रैली देखने को मिल रही है. लगभग हर दिन ऑल टाइम हाई बन रहा. बाजार की झमाझम तेजी में इनवेस्टर्स भी मुनाफा काट रहे हैं. स्टॉक मार्केट की रैली का ही असर है कि SIP के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या में इजाफा हो रहा है. म्‍यूचुअल फंड में SIP रेगुलर निवेश का एक आसान तरीका है, जहां रिस्क के हिसाब से फंड चुनने का ऑप्शन होता है. SIP में रिटर्न का आंकड़ा बाजार की चाल पर निर्भर होता है.

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कंपाउंडिंग का मिलेगा फायदा

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लॉन्ग टर्म के लिए की जाने वाली SIP में कम्‍पाउंडिंग का तगड़ा फायदा मिलता है. निवेश के इस माध्यम से कम समय में ही निवेशक फाइनेंशियल लक्ष्यों को पूरा कर सकता है. SIP के रिटर्न को और बढ़ाने के लिए स्‍टेप-अप SIP भी शुरू कर सकते हैं, जोकि अच्छा ऑप्‍शन साबित हो सकता है.

निवेशक रेगुलर SIP के जरिए 1 करोड़ रुपए तक का मोटा फंड बना सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि मंथली इनवेस्ट किया जाए. इसे उदाहरण से समझते हैं... मान लीजिए निवेशक 12 साल तक हर महीने 45 हजार रुपए जमा कर रहा, तो मैच्योरिटी पर 1.04 करोड़ रुपए तैयार हो जाएगा. इसमें इनवेस्टर्स की ओर से कुल जमा रकम 5400000 रुपए होगी, जबकि 12% CAGR के दम पर 50.55 लाख रुपए मिलेंगे है.

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SIP पर ऐसे मिलेगा ज्यादा रिटर्न

मान लीजिए SIP में निवेश पर करीब 1 करोड़ रुपए की रकम 12 साल में तैयार होता है. तो ये Step-Up SIP के जरिए 10 साल में तैयार किया जा सकता है. Step-Up SIP Calculator के मुताबिक, इनवेस्टर हर महीने 30 हजार निवेश करें, जिसमें हर साल 10% स्‍टेप-अप करें, तो 12% CAGR से महज 10 साल में 1.01 करोड़ रुपए का बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है, इसमें निवेश के ओर से जमा 57,37,473 रुपए और अनुमानित कैपिटल गेन 43,85,506 रुपए शामिल हैं.

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कैसे मिलता है ज्यादा रिटर्न?

SIP के मुकाबले स्टेप-अप SIP में ज्यादा कमाई की वजह कम्पाउंडिंग है. आमदनी बढ़ने के साथ महंगाई भी तो बढ़ती है. इसलिए आय बढ़ने के अनुपात में SIP में निवेश की रकम भी बढ़ाना चाहिए. इससे कम्‍पाउंडिंग का तगड़ा फायदा होगा. ऐसे में हर साल निवेशकों को अपने निवेश को रिव्यू करना चाहिए और SIP को स्‍टेप-अप करना चाहिए.