Association of Mutual Funds in India (AMFI) ने हाल ही में 10 जून को मई महीने के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए होने वाले निवेश में जबरदस्त उछाल आया है। एक तरफ जहां फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरें स्थिर बनी हुई हैं, वहीं आम निवेशक इक्विटी मार्केट में रिकॉर्ड पैसा लगा रहे हैं। यह ट्रेंड साफ दर्शाता है कि अनुशासित मंथली इन्वेस्टमेंट के जरिए लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन पर निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ा है।

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सही एसेट क्लास का चुनाव पूरी तरह से आपके रिस्क लेने की क्षमता और फाइनेंशियल गोल्स पर निर्भर करता है। फिलहाल बड़े बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर 7.0% से 7.5% तक सालाना ब्याज दे रहे हैं। हालांकि ये रिटर्न सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन इनकम टैक्स और महंगाई दर को देखते हुए ये अक्सर कम पड़ जाते हैं। इसके मुकाबले, धैर्य रखने वाले निवेशकों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड्स तीन साल की अवधि में डबल-डिजिट रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।

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SIP ट्रेंड्स और बैंक FD रिटर्न की तुलना

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले 90 दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेश में बैलेंस बनाकर चलना जरूरी है। अपनी मौजूदा SIP को जारी रखें और मुमकिन हो तो इस महीने इसे 10% तक बढ़ाने पर विचार करें। स्मॉल-कैप स्टॉक्स में अभी वैल्यूएशन काफी ज्यादा है, इसलिए इनमें एकमुश्त (Lumpsum) निवेश करने से फिलहाल बचें। इसके बजाय, एक्स्ट्रा कैश को लिक्विड फंड्स या हाई-यील्ड सेविंग्स अकाउंट में रखें ताकि जरूरत पड़ने पर फंड आसानी से उपलब्ध हो सके।

Investment CategoryAnnual ReturnsRisk Grade
Bank Fixed Deposit7.1% - 7.5%Low Risk
Equity SIP12.0% - 15.0%High Risk
Short-term Debt6.8% - 7.2%Medium Risk

SIP मैनेजमेंट और टैक्स की समझ

निवेश से मिलने वाले फाइनल रिटर्न को तय करने में टैक्स की बड़ी भूमिका होती है। इक्विटी फंड्स से होने वाले 1 लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर 10% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स लगता है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज आपकी सालाना इनकम में जुड़ता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर टैक्स देना होता है। इन नियमों को समझकर आप न केवल नियमों का पालन कर सकते हैं, बल्कि अपनी नेट वेल्थ को भी बेहतर तरीके से बढ़ा सकते हैं।

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AMFI के ताजा आंकड़े गवाह हैं कि ग्लोबल इकोनॉमी में हो रहे बदलावों के बीच भारतीय रिटेल निवेशक अब काफी मैच्योर हो गए हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव के पीछे भागने से बेहतर है कि आप अपने पोर्टफोलियो को लॉन्ग-टर्म गोल्स के साथ जोड़ें। कंपाउंडिंग की ताकत का फायदा उठाने के लिए अपनी मंथली SIP में अनुशासन बनाए रखें। यही सोची-समझी रणनीति आपको अनिश्चित समय में जोखिमों से बचाएगी और एक मजबूत फाइनेंशियल फ्यूचर तैयार करने में मदद करेगी।