2019-20 सीरीज V सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के निवेशकों के लिए आज का दिन काफी अहम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 15 अप्रैल से प्री-मैच्योर रिडेम्पशन यानी समय से पहले पैसे निकालने की विंडो खोल दी है। 1 अप्रैल से लागू हुए नए टैक्स नियमों के बीच, निवेशक अब अपने मुनाफे और टैक्स के गणित को समझने में जुटे हैं।

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इस बार रिडेम्पशन की कीमत 15,009 रुपये प्रति यूनिट तय की गई है। अक्टूबर 2019 में जब यह बॉन्ड लॉन्च हुआ था, तब इसकी कीमत महज 3,738 रुपये थी। यानी निवेशकों को करीब 302 फीसदी का तगड़ा रिटर्न मिला है। अब निवेशकों के सामने सवाल है कि वे मुनाफा लेकर बाहर निकलें या मैच्योरिटी तक इंतजार करें।

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SGB 2019-20 Series V: मुनाफे का पूरा गणित समझें

इस बॉन्ड ने सालाना 28.4 फीसदी की दर से ग्रोथ दिखाई है। रिडेम्पशन की यह कीमत पिछले हफ्ते के सोने के औसत भाव पर आधारित है। अगर किसी ने इसमें एक लाख रुपये लगाए थे, तो आज उसकी वैल्यू चार लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी है। यही वजह है कि पांच साल पहले निवेशकों ने गोल्ड बॉन्ड पर इतना भरोसा जताया था।

पैरामीटरडिटेल्स
इश्यू प्राइस (अक्टूबर 2019)Rs 3,738
रिडेम्पशन प्राइसRs 15,009
कुल रिटर्न302 फीसदी
सालाना रिटर्न (CAGR)28.4 फीसदी

SGB रिडेम्पशन पर क्या हैं टैक्स के नए नियम?

इस साल 1 अप्रैल से गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स के नियम बदल गए हैं। अब समय से पहले बाहर निकलने पर मिलने वाले मुनाफे पर 12.5 फीसदी टैक्स देना होगा। यह नियम उन बॉन्ड्स पर लागू है जिन्हें 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया है। ध्यान रहे कि कैपिटल गेन्स पर पूरी टैक्स छूट तभी मिलती है, जब आप 8 साल की मैच्योरिटी पूरी होने तक बॉन्ड को अपने पास रखते हैं।

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पैसे निकालने की क्या है प्रक्रिया?

निवेशक अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस के जरिए इन यूनिट्स को रिडीम कर सकते हैं। इसके लिए आपको ब्याज भुगतान की तारीख से पहले रिक्वेस्ट फॉर्म जमा करना होगा। इसके अलावा, RBI रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। अगर आपको किसी जरूरी काम के लिए कैश की जरूरत है, तो यह बाहर निकलने का एक आसान तरीका है।

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समय से पहले बाहर निकलने का यह मौका मोटा मुनाफा कमाने का शानदार अवसर है। हालांकि, फैसला लेने से पहले नए टैक्स नियमों को जरूर ध्यान में रखें। अपने फाइनेंशियल गोल्स को तौलने के बाद ही तय करें कि आपको पैसे निकालने हैं या निवेश बनाए रखना है। अगर आप अभी चूक जाते हैं, तो अगली विंडो इस साल के अंत में ब्याज भुगतान के समय फिर खुलेगी।