22 जुलाई 2026 को भारतीय रुपया दो महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया और डॉलर के मुकाबले 96.5650 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की भारी बिकवाली (संभवतः RBI की ओर से) ने बाजार में हलचल पैदा कर दी। रुपया अब मई के 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। शेयर बाजार में करीब एक प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि बॉन्ड यील्ड में मामूली बढ़त देखी गई। ऐसे में निवेशकों के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि अपना पैसा सुरक्षित तरीके से कहां लगाएं?

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ट्रेडर्स के मुताबिक 96.50 के स्तर पर रुपये को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है, लेकिन ब्रेंट क्रूड का 95 डॉलर के करीब पहुंचना डॉलर को मजबूती दे रहा है। करेंसी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए निवेशक फिलहाल शॉर्ट-टर्म डेट और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में पैसा पार्क कर रहे हैं। जैसे ही बाजार में स्थिति साफ होगी, वे सिस्टेमैटिक प्लान (SIP) के जरिए फिर से इक्विटी में निवेश बढ़ाएंगे। नीचे दिए गए आंकड़े मार्केट क्लोजिंग और फंड डिस्क्लोजर पर आधारित हैं।

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FD, RD, SIP या शॉर्ट-टर्म डेट: कम समय के लिए क्या है बेहतर?

अगर आप एक से तीन महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो 91 दिनों के ट्रेजरी बिल (T-bills) पर करीब 5.33 प्रतिशत यील्ड मिल रही है। लिक्विड फंड्स में यह 6 प्रतिशत के बीच है, जबकि अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स 7 प्रतिशत के आसपास रिटर्न दे रहे हैं। फ्लेक्सिबिलिटी के लिए 'स्वीप-इन' डिपॉजिट एक अच्छा विकल्प है जो सेविंग्स अकाउंट को टर्म रेट्स से जोड़ता है। वहीं, 6 से 12 महीने के लिए बैंक FD की लैडरिंग (टुकड़ों में निवेश) करें या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड्स पर विचार करें, जहां फिलहाल 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न मिल रहा है। मंथली सेविंग्स के लिए रिकरिंग डिपॉजिट (RD) भी बैंक FD जैसी ही ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं।

निवेश का विकल्पआज की अनुमानित यील्डअभी क्यों चुनें?
91-दिन का T-bill~5.33 प्रतिशतसरकारी सुरक्षा और पारदर्शी नीलामी; 1-3 महीने के लिए बेहतरीन।
लिक्विड फंड्स~6.3–6.6 प्रतिशतओवरनाइट से 91 दिनों के पेपर में निवेश; डेली लिक्विडिटी की सुविधा।
अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स~7.0–7.4 प्रतिशततीन से छह महीने की अवधि; बेहतर रिटर्न और मामूली क्रेडिट रिस्क।
शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड्स~7.2–8.1 प्रतिशतएक से तीन साल की अवधि; 6-12 महीने के लिए अच्छा रिटर्न।
बैंक FD (6–12 महीने)~6.0–6.75 प्रतिशतफिक्स्ड रिटर्न; स्वीप-इन सुविधा से पैसों तक आसान पहुंच।

3 साल से ज्यादा का समय और करेंसी हेजिंग: गोल्ड बनाम इंटरनेशनल इंडेक्स फंड्स

तीन साल से ज्यादा के निवेश के लिए इक्विटी SIP ग्रोथ का सबसे अच्छा जरिया है, जबकि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) टैक्स बचाने और सुरक्षित निवेश के लिए शानदार है। ध्यान रहे कि इक्विटी फंड्स पर टैक्स के नियम बदल गए हैं: शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) अब 20 प्रतिशत है और सालाना 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के लॉन्ग-टर्म गेन (LTCG) पर 12.5 प्रतिशत टैक्स लगेगा। अगर आप गिरते रुपये के असर से बचना चाहते हैं, तो घरेलू सोना (Gold) फायदेमंद है। इसके अलावा, SEBI की लिमिट के भीतर इंटरनेशनल इंडेक्स फंड्स के जरिए आप सीधे अमेरिकी डॉलर में निवेश का फायदा उठा सकते हैं।

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टैक्स के नियम और आज की एक्शन चेकलिस्ट

1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए डेट फंड्स पर अब आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है (सेक्शन 50AA), इसमें इंडेक्सेशन का फायदा खत्म कर दिया गया है। बैंक ब्याज पर TDS तभी काटते हैं जब वह एक तय सीमा को पार कर जाए—सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा 50,000 रुपये और सीनियर सिटीजन्स के लिए 1,00,000 रुपये है। आज की रणनीति: कम से कम 3 महीने के खर्च के बराबर पैसा लिक्विड रखें, शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए T-bills या स्वीप-इन FD का इस्तेमाल करें, 6-12 महीने की FD की लैडरिंग करें, अपनी SIP जारी रखें और पोर्टफोलियो में थोड़ा करेंसी हेज जरूर जोड़ें।