Reserve Bank of India: देश के रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। Reserve Bank of India ने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत बैंक अब कुछ खास शर्तों के साथ REITs और InvITs को सीधे कर्ज दे सकेंगे। यह कदम बाजार में निवेश बढ़ाने और प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने में मददगार माना जा रहा है।

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क्या है पूरा मामला?

अब तक REITs और InvITs को फंडिंग के लिए अलग-अलग रास्तों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन नए प्रस्ताव के बाद बैंक सीधे इन ट्रस्ट्स को लोन दे पाएंगे। हालांकि, यह सुविधा हर किसी को नहीं मिलेगी। केवल वही ट्रस्ट पात्र होंगे जो Securities and Exchange Board of India (SEBI) के साथ रजिस्टर्ड और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हों।

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इसके साथ ही कुछ और शर्तें भी रखी गई हैं। ट्रस्ट कम से कम तीन साल से काम कर रहा हो और पिछले दो साल से उसका कैश फ्लो सकारात्मक हो। अगर पिछले तीन साल में उस पर कोई बड़ी नियामकीय कार्रवाई हुई है, तो उसे बैंक से कर्ज नहीं मिलेगा।

जोखिम पर सख्त नजर

RBI ने बैंकों को जोखिम से बचाने के लिए सीमा भी तय की है। किसी एक REIT या InvIT और उससे जुड़ी कंपनियों पर बैंक का कुल कर्ज उसकी कुल संपत्ति के 49 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होगा। इससे बैंकिंग सिस्टम पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा।

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बैंकों को अपनी आंतरिक नीति भी तैयार करनी होगी। इसमें लोन देने के नियम, जोखिम जांच, और समय-समय पर निगरानी की व्यवस्था शामिल होगी। साफ है कि RBI इस फैसले में तेजी के साथ-साथ सतर्कता भी चाहता है।

विदेशी प्रोजेक्ट्स के लिए भी मौका

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाएं विदेशों में काम कर रहे REITs को भी फंडिंग दे सकती हैं, बशर्ते वहां मजबूत कानूनी ढांचा हो। इससे भारतीय बैंक वैश्विक बाजार में भी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं।

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कब से लागू होगा नया नियम?

ड्राफ्ट के अनुसार यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू हो सकता है। हालांकि बैंक चाहें तो पहले भी इसे अपना सकते हैं। यह फैसला रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के लिए नई उम्मीद लेकर आया है। आसान फंडिंग से प्रोजेक्ट्स को स्पीड मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और बाजार में भरोसा मजबूत होगा।