भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस अप्रैल भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। कर्ज लेने वालों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि उनकी बैंक EMI फिलहाल स्थिर रहेगी। साथ ही, यह इस बात का भी संकेत है कि बचत योजनाओं पर मिलने वाला ऊंचा ब्याज अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। ऐसे में निवेशकों के पास भविष्य में होने वाली कटौती से पहले मौजूदा आकर्षक दरों का फायदा उठाने का बेहतरीन मौका है।

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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का पूरा फोकस फिलहाल महंगाई को काबू में रखने पर है। भारतीय परिवारों के लिए यह स्थिरता फाइनेंशियल प्लानिंग करने का एक शानदार अवसर लेकर आई है। आज के समय में फिक्स्ड इनकम टूल्स और इक्विटी मार्केट, दोनों ही ग्रोथ के अलग-अलग रास्ते दिखा रहे हैं। अब यह आपको तय करना है कि आपके रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से कौन सा विकल्प बेहतर है।

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RBI के फैसले के बाद निवेश के विकल्प: FD, RD या SIP?

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर इस समय पिछले कई सालों के मुकाबले सबसे शानदार रिटर्न मिल रहा है। ज्यादातर बैंक मीडियम टर्म डिपॉजिट पर सात से आठ फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। वहीं, जो लोग हर महीने छोटी रकम बचाना चाहते हैं, उनके लिए रिकरिंग डिपॉजिट (RD) एक अच्छा विकल्प है। इन दोनों ही विकल्पों में जोखिम बहुत कम है, हालांकि इनसे होने वाली कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।

लंबी अवधि में महंगाई को मात देने के लिए सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आज भी सबसे भरोसेमंद जरिया बना हुआ है। इक्विटी म्यूचुअल फंड के जरिए आप भारत की मजबूत आर्थिक ग्रोथ का सीधा लाभ उठा सकते हैं। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहता है, लेकिन SIP कई सालों के दौरान आपके निवेश की औसत लागत को कम कर देती है। वहीं, हालिया टैक्स बदलावों के बावजूद शॉर्ट-टर्म जरूरतों के लिए डेट फंड एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं।

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एसेट क्लासरिस्क लेवलसही समय सीमाटैक्स नियम
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)बहुत कम1 से 3 सालइनकम स्लैब के अनुसार
SIP (इक्विटी)ज्यादा5 साल से अधिकLTCG टैक्स
डेट फंड्समध्यम1 से 3 सालइनकम स्लैब के अनुसार

निवेशकों को अपनी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पोर्टफोलियो में संतुलन बनाना चाहिए। इमरजेंसी फंड के लिए FD का इस्तेमाल करें, जबकि रिटायरमेंट या घर खरीदने जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए SIP को चुनें। RBI की मौजूदा पॉलिसी निवेश के इन फैसलों के लिए जरूरी स्थिरता प्रदान करती है। अगर आप अनुशासन के साथ निवेश जारी रखते हैं, तो इस न्यूट्रल माहौल में भी आपकी वेल्थ लगातार बढ़ती रहेगी।