भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान कर दिया है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आरबीआई के इस फैसले का सीधा असर आपकी बैंक सेविंग्स और लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ेगा। ऐसे में, आम लोगों को अब स्थिर ब्याज दरों के माहौल के हिसाब से अपना इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो प्लान करना चाहिए।

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केंद्रीय बैंक के लिए कोर महंगाई (Core Inflation) अभी भी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। दास ने साफ किया कि कीमतों पर काबू पाने के लिए कमेटी का पूरा ध्यान 'विड्रॉल ऑफ अकोमोडेशन' पर है। ब्याज दरों को स्थिर रखकर आरबीआई आर्थिक ग्रोथ और महंगाई के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, कर्ज लेने वालों को अगले कुछ महीनों तक ऊंची ब्याज दरों के लिए तैयार रहना होगा।

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FD और सेविंग्स पर RBI के फैसले का क्या होगा असर?

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वालों के लिए यह अच्छा समय है, क्योंकि ब्याज दरें पिछले कई सालों के मुकाबले काफी ऊपर हैं। ज्यादा रिटर्न पाने के लिए अभी निवेश करना एक बेहतरीन मौका हो सकता है। सीनियर सिटीजंस सुरक्षित और गारंटीड इनकम के लिए SCSS (सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम) का फायदा उठा सकते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो रिस्क कम करने के लिए 'लैडरिंग स्ट्रैटेजी' अपनाना एक स्मार्ट तरीका है।

होम लोन की EMI पर क्या पड़ेगा प्रभाव?

ज्यादातर होम लोन सीधे रेपो रेट या एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े होते हैं। चूंकि आरबीआई ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, इसलिए आपकी मंथली EMI फिलहाल कम नहीं होगी। ऐसे में कर्जदार लंबे टेन्योर के लिए तैयार रहें या फिर छोटे-छोटे प्री-पेमेंट (Prepayments) करने की सोचें। समय-समय पर किए गए ये एक्स्ट्रा पेमेंट आपके ब्याज के बोझ को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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मौजूदा पॉलिसी के बीच PPF और SCSS को कैसे मैनेज करें?

इन्वेस्टमेंटमार्केट आउटलुकएक्शन प्लान
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)ऊंची ब्याज दरेंअभी निवेश करें
होम लोन EMIदरों में कोई बदलाव नहींप्री-पेमेंट करें
PPF और SCSSस्थिर रिटर्नलिमिट का पूरा इस्तेमाल करें

पीपीएफ (PPF) जैसी छोटी बचत योजनाएं अपने टैक्स-फ्री स्टेटस और सुरक्षा के कारण आज भी निवेश का शानदार विकल्प हैं। वहीं, लंबी अवधि में महंगाई को मात देने के लिए इक्विटी SIP बेहद जरूरी है। अपने पोर्टफोलियो में डेट और इक्विटी के बीच सही बैलेंस बनाकर आप अपनी वेल्थ को बढ़ा सकते हैं। इन्वेस्टमेंट में विविधता (Diversification) आपको ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद करती है।

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आरबीआई के इस अपडेट के बाद निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए और अपने लक्ष्यों की समीक्षा करनी चाहिए। दरों को स्थिर रखने का मतलब है कि ब्याज दरें अब अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी हैं। आज सही और ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों में पैसा लगाना आपके भविष्य को सुरक्षित करेगा। जागरूक रहकर ही आप अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर फाइनेंशियल फैसले ले सकते हैं।