भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड डिविडेंड देने की मंजूरी दे दी है। यह भारी-भरकम रकम इस साल के शुरुआती बजट अनुमानों से कहीं ज्यादा है। इससे केंद्र सरकार को बड़े प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए काफी वित्तीय मजबूती मिलेगी। यह खबर उन टैक्सपेयर्स और छोटी बचत करने वालों के लिए भी बेहद अहम है, जो ब्याज दरों में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।

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इस सरप्लस फंड की मदद से सरकार को अब बाजार से कम कर्ज लेना पड़ेगा। सरकारी उधारी कम होने से अक्सर बॉन्ड यील्ड और बाजार पर दबाव कम होता है। इससे सरकार के पास बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी। निवेशक अब इस बात पर नजर रख रहे हैं कि बैंकिंग सिस्टम में आने वाली इस नकदी (Liquidity) का क्रेडिट और मार्केट पर क्या असर पड़ता है।

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स्मॉल सेविंग्स और बैंक FD पर क्या होगा असर?

बचत करने वालों को जून के आखिर में होने वाली स्मॉल सेविंग्स स्कीम की समीक्षा पर ध्यान देना चाहिए। इसमें पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार आमतौर पर सरकारी बॉन्ड यील्ड के आधार पर इन स्कीमों की ब्याज दरों को रिवाइज करती है। अगर यील्ड स्थिर रहती है, तो मुमकिन है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ब्याज दरों में फिलहाल कोई बड़ी बढ़ोतरी न हो।

विषयसंभावित असर
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)सालाना लक्ष्यों को मैनेज करना आसान होगा
बैंक FD दरेंदरों में स्थिरता या धीरे-धीरे कटौती संभव
पीएम-किसान (PM-Kisan)अगली किस्त समय से पहले आने की उम्मीद

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरें अक्सर बैंकिंग सिस्टम में मौजूद नकदी के स्तर के हिसाब से घटती-बढ़ती हैं। RBI से मिलने वाले इस डिविडेंड से पूरे बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर रह सकती है। वहीं, किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की अगली किस्त का फायदा जल्द मिल सकता है। सरकार के पास अब पर्याप्त कैश रिजर्व है, जिससे ऐसी डायरेक्ट ट्रांसफर स्कीमों का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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इस अतिरिक्त फंड से सरकार को बिना किसी कड़े टैक्स उपायों के अपने घाटे के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी। आम नागरिकों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आने वाले नीतिगत फैसलों में राहत की उम्मीद मिल सकती है। हालांकि, क्या इससे सीधे तौर पर ब्याज दरों में कटौती होगी, यह अभी बाजार में बहस का विषय बना हुआ है। जून में होने वाली पॉलिसी समीक्षा से आगे की स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।