भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 जून से 5 जून तक होने जा रही है। इस बैठक के नतीजों का ऐलान शुक्रवार, 5 जून को सुबह करीब 10 बजे किया जाएगा। साल 2026 की शुरुआत में मिली राहत के बाद फिलहाल रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर बना हुआ है। बाजार को उम्मीद है कि इस बार भी दरें स्थिर रहेंगी, हालांकि 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट्स) की कटौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। RBI के इस फैसले का सीधा असर आपकी EMI, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा।

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अगर दरों में कोई बदलाव नहीं होता है, तो इसका मतलब है कि महंगाई अभी भी 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है। हालिया संकेतों से पता चलता है कि खाने-पीने की चीजों और एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए RBI फिलहाल स्थिरता बनाए रखना चाहता है। कई जानकारों का मानना है कि ब्याज दरों में पहली कटौती 2026 के आखिर में ही देखने को मिल सकती है। कर्ज लेने वालों और बचत करने वालों के लिए सिर्फ आंकड़े ही नहीं, बल्कि पॉलिसी की भाषा और भविष्य के संकेत भी काफी अहम होंगे।

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RBI MPC 5 जून: रेपो रेट के अलग-अलग सिनेरियो और आपकी EMI पर असर

अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो आपकी EMI और लोन की अवधि में कोई बदलाव नहीं होगा। लेकिन अगर बैंक 0.25 प्रतिशत की कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो इसका असर आपकी जेब पर जरूर दिखेगा। उदाहरण के लिए, 9 प्रतिशत ब्याज पर 50 लाख रुपये के 20 साल वाले होम लोन की EMI करीब 800 रुपये कम हो जाएगी। वहीं, 10 लाख रुपये के 7 साल वाले कार लोन पर करीब 130 रुपये की बचत होगी।

लोन का प्रकारलोन का उदाहरणमौजूदा दर पर EMI0.25% कटौती के बाद EMIमहीने की बचत
होम लोनRs 50 लाख, 20 साल, 9.00%Rs 44,986Rs 44,186≈ −Rs 800
ऑटो लोनRs 10 लाख, 7 साल, 10.50%Rs 16,861Rs 16,731≈ −Rs 130
पर्सनल लोनRs 5 लाख, 3 साल, 14.50%Rs 17,210Rs 17,150≈ −Rs 61

FD रेट्स और डेट म्यूचुअल फंड: RBI के फैसले से पहले क्या हो आपकी स्ट्रैटेजी?

FD में निवेश करने वालों को 'लैडरिंग' (Laddering) का तरीका अपनाना चाहिए। यानी अपना पैसा 3, 6 और 12 महीने की अलग-अलग अवधि की FD में बांटकर लगाएं, साथ ही एक हिस्सा 2 से 3 साल की अवधि के लिए भी रखें। इससे आप ब्याज दरों में होने वाले बदलावों का फायदा उठा पाएंगे और जोखिम भी कम होगा। जब तक स्थिति पूरी तरह साफ न हो जाए, तब तक सारा पैसा लंबी अवधि के लिए लॉक करने से बचें। डेट फंड निवेशकों को स्थिरता के लिए शॉर्ट ड्यूरेशन या रोल-डाउन स्ट्रैटेजी पर ध्यान देना चाहिए।

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बचत करने वालों और कर्जदारों के लिए जरूरी चेकलिस्ट

अपने लोन का बेंचमार्क और स्प्रेड चेक करें। अगर रेपो-लिंक्ड रेट पर स्विच करना सस्ता पड़ रहा हो, तो बैंक से इसके लिए रिक्वेस्ट करें। लोन की अवधि कम करने के लिए बीच-बीच में छोटी रकम चुकाते रहें (Prepayment)। अलग-अलग बैंकों के FD रेट्स की तुलना करें और ऑटो-रिन्यू का विकल्प सोच-समझकर चुनें। डेट फंड्स में निवेश की अवधि की समीक्षा करें और इमरजेंसी के लिए लिक्विड फंड बनाए रखें। सबसे जरूरी, शुक्रवार 5 जून को सुबह 10 बजे गवर्नर का बयान जरूर सुनें।