भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आज मुंबई में शुरू हो रही है। 6 अप्रैल से 8 अप्रैल तक चलने वाली इस अहम बैठक पर देशभर के करोड़ों कर्जदारों की नजरें टिकी हैं। केंद्रीय बैंक इस दौरान ब्याज दरों के भविष्य पर फैसला लेगा, जिसका सीधा असर आपकी होम लोन EMI और बचत पर पड़ेगा। आमतौर पर RBI के फैसले के तुरंत बाद बैंक भी अपनी दरों में बदलाव कर देते हैं।

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इस साल भी रिटेल महंगाई दर समिति के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि बोर्ड आर्थिक विकास और कीमतों में स्थिरता के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश करेगा। अगर रेपो रेट में कोई बदलाव होता है, तो कमर्शियल बैंक कुछ ही दिनों में उस पर एक्शन लेंगे। इससे नए घर खरीदारों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। SBI और HDFC जैसे बड़े लेंडर्स इन संकेतों पर पैनी नजर रखे हुए हैं, ताकि यह साफ हो सके कि महंगाई के खिलाफ जंग अब वाकई खत्म हुई है या नहीं।

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RBI MPC और आपकी लोन EMI पर इसका असर

मौजूदा होम लोन ग्राहक उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही ब्याज दरों में कटौती हो। रेपो रेट घटने का सीधा मतलब है आपकी मासिक EMI का कम होना। हालांकि, कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ महीनों तक स्थिति जस की तस (Status Quo) बनी रह सकती है। अगर RBI दरों में कोई बदलाव नहीं करता है, तो आपकी मौजूदा ब्याज दरें स्थिर रहेंगी। ICICI और Axis जैसे प्राइवेट बैंक भी इन नतीजों को करीब से देखेंगे, क्योंकि उन्हें बाजार में बने रहने के साथ-साथ अपने मुनाफे (Margins) का भी ध्यान रखना है।

बैंकिंग प्रोडक्टसंभावित पॉलिसी एक्शनग्राहकों पर असर
होम लोन EMIरेपो रेट पर नजरमासिक खर्च बदल सकता है
क्रेडिट कार्ड APRलिक्विडिटी पर नजरकर्ज की लागत ऊंची बनी रहेगी
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)बैंक रेट की समीक्षाब्याज से होने वाली कमाई में बदलाव संभव

क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वालों को भी इन बड़े अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए। क्रेडिट कार्ड पर लगने वाला भारी ब्याज अक्सर बाजार के सामान्य रुझानों के हिसाब से चलता है। हालांकि ये दरें पहले से ही काफी ज्यादा हैं, लेकिन लिक्विडिटी का असर बैंक चार्ज पर पड़ता है। RBI के फैसलों से फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले रिटर्न में भी उतार-चढ़ाव आ सकता है। भारत में बड़ी संख्या में सीनियर सिटीजन अपनी रोजमर्रा की आय के लिए FD पर निर्भर हैं। ब्याज दरें बढ़ने से बचत करने वालों को तो फायदा होता है, लेकिन कर्ज लेना काफी महंगा हो जाता है।

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इस बैठक का अंतिम फैसला 8 अप्रैल की सुबह आएगा, जब RBI गवर्नर अर्थव्यवस्था को लेकर अपना विस्तृत नजरिया पेश करेंगे। तब तक वित्तीय बाजारों में सावधानी भरा माहौल रहने की उम्मीद है। कर्जदारों को बैठक के बाद बैंकों की ओर से आने वाले अपडेट्स के लिए अलर्ट रहना चाहिए। यह तीन दिवसीय सत्र नए वित्त वर्ष की दिशा तय करेगा। अब हर किसी को बस इस बात का इंतजार है कि क्या उन्हें कोई राहत मिलेगी या नहीं।