RBI की मॉनेटरी पॉलिसी का फैसला 5 जून, 2026 को आने वाला है। ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ी उलझन सही समय को लेकर है। अप्रैल में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहने के बाद, अब सबकी नजरें इस पर हैं कि आगे क्या होगा। RBI का फैसला कुछ ही हफ्तों में आपके FD रेट्स और डेट यील्ड (debt yields) की तस्वीर बदल सकता है। आइए जानते हैं कि इस माहौल में आपको FD, RD, SIP, T-bills, PPF और SGB में पैसा कैसे लगाना चाहिए।

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अगर आप 0 से 12 महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो लिक्विडिटी का ध्यान रखें। हाल ही में 91 दिनों वाले T-bill का कटऑफ 5.52% के करीब रहा है। वहीं, लिक्विड फंड्स ने पिछले एक साल में करीब 6% का रिटर्न दिया है। ध्यान रहे कि 1 अप्रैल, 2023 के बाद से ज्यादातर डेट फंड्स पर टैक्स आपके स्लैब के हिसाब से लगता है और इंडेक्सेशन का फायदा भी खत्म हो गया है। इमरजेंसी फंड के लिए T-bills या लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट फंड्स बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

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FD vs RD vs SIP: पॉलिसी का असर और बैंकों के मौजूदा रेट्स

अगर RBI दरों में बदलाव नहीं करता है, तो बैंकों के कार्ड रेट्स स्थिर रह सकते हैं। लेकिन अगर कटौती हुई, तो नई FD पर मिलने वाला ब्याज कुछ ही हफ्तों में कम हो सकता है। वहीं, बढ़ोतरी होने पर नई FD की यील्ड बढ़ जाएगी। SBI के रेट्स देखें तो 1 से 2 साल की FD पर 6.25% ब्याज मिल रहा है। 2 से 3 साल की जमा पर यह 6.40% है, जबकि सीनियर सिटीजन्स को 6.75% और 6.90% तक ब्याज मिल रहा है। रिकरिंग डिपॉजिट (RD) की दरें भी आमतौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट की अवधि और रेट्स के बराबर ही होती हैं।

निवेश का विकल्पअनुमानित दर/यील्ड (जून 2026)अभी क्यों है सही?
SBI FD (1–2 साल)6.25% (आम नागरिक); 6.75% (सीनियर सिटीजन)तय इनकम के लिए बेहतर; समय से पहले पैसे निकालने पर कम पेनल्टी
SBI FD (2–3 साल)6.40% (आम नागरिक); 6.90% (सीनियर सिटीजन)अगर ब्याज दरें घटने की उम्मीद है, तो 'लैडरिंग' के लिए अच्छा
91-दिन का T-bill~5.52% (ताजा कटऑफ)सरकारी सुरक्षा के साथ कैश रखने का सुरक्षित विकल्प
लिक्विड फंड्स (1 साल की कैटेगरी)~6.0% (हालिया रिटर्न)कम रिस्क और जब चाहें पैसे निकालने की सुविधा
PPF (Q1 FY27)7.1%EEE टैक्स बेनिफिट; लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए सबसे भरोसेमंद
SGB ब्याज2.5% + सोने की कीमतों का फायदापोर्टफोलियो में विविधता; मैच्योरिटी पर मुनाफा पूरी तरह टैक्स-फ्री

FD vs RD vs SIP: रिस्क, रिटर्न और टैक्स का पूरा गणित

1 से 3 साल के लक्ष्य के लिए RD या शॉर्ट-ड्यूरेशन और टारगेट-मैच्योरिटी फंड्स को अपनी टाइमलाइन के हिसाब से चुनें। अगर आप 5 साल से ज्यादा के लिए निवेश कर रहे हैं, तो डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स में SIP सबसे अच्छा है, बस इसमें थोड़ा धैर्य जरूरी है। PPF पर इस तिमाही 7.1% ब्याज मिल रहा है और इसमें 'EEE' (एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट-एग्जेंप्ट) टैक्स बेनिफिट मिलता है। SGB में 2.5% ब्याज के साथ सोने की कीमतों में उछाल का फायदा भी मिलता है और मैच्योरिटी तक रखने पर मुनाफा टैक्स-फ्री है। वहीं, इक्विटी पर 1.25 लाख रुपये से ज्यादा के LTCG पर 12.5% टैक्स लगता है।

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FD vs RD vs SIP: आज क्या करें और फैसले के बाद क्या हो रणनीति?

आज की रणनीति यह होनी चाहिए कि आप अपनी FD को 1 और 3 साल की अवधि में बांट दें (लैडरिंग), ताकि ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव का रिस्क कम हो सके। कम समय के लिए पैसा लिक्विड फंड्स या अगस्त से पहले मैच्योर होने वाले T-bills में रखें। इक्विटी SIP को जारी रखें या थोड़ा बढ़ाएं, क्योंकि लंबे समय में बाजार का उतार-चढ़ाव बराबर हो जाता है। RBI के फैसले के बाद, अगर दरें घटती हैं तो तुरंत लंबी अवधि की FD लॉक कर लें। अगर दरें बढ़ती हैं, तो छोटी अवधि की FD चुनें और बेहतर रेट्स का इंतजार करें। इमरजेंसी फंड को FD से अलग रखें ताकि पेनल्टी और कागजी कार्रवाई के झंझट से बचा जा सके।