RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रेडिट रिपोर्टिंग के लिए नए नियमों की घोषणा की, जिसका उद्देश्य उधार लेने वाला और उधार देने वाले दोनों को लाभ पहुंचाना है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनिवार्य किया है कि उधारदाताओं को हर दो सप्ताह में CIBIL जैसी क्रेडिट सूचना कंपनियों (CIC) को रिपोर्ट करनी चाहिए। इस बदलाव का उद्देश्य क्रेडिट सूचना की सटीकता और समयबद्धता को बढ़ाना है।

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क्रेडिट सूचना पर तुरंत अपडेट

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उधारकर्ताओं को अब अपनी क्रेडिट जानकारी पर तेज़ी से अपडेट प्राप्त होंगे, खासकर कर्ज चुकाने के बाद। यह समय पर अपडेट उधार देने वाला को उधारकर्ता जोखिम का अधिक सटीक आकलन करने में मदद करेगा, जिससे ज्यादा उधार देने की संभावना कम हो जाएगी। वर्तमान में उधार देने वाला मासिक रूप से या सीआईसी के साथ सहमत कम अंतराल पर सीआईसी को क्रेडिट जानकारी रिपोर्ट करते हैं।

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दो हफ्ते रिपोर्टिंग शेड्यूल अपनाने से क्रेडिट डेटा की सटीकता और समय में सुधार होने की उम्मीद है। इससे उधार देने वालों को बेहतर जानकारी के साथ क्रेडिट निर्णय लेने में मदद मिलेगी। बैंकों और अन्य क्रेडिट संस्थानों से लगातार डेटा रिपोर्टिंग से सीआईसी को क्रेडिट रिकॉर्ड को और अधिक तेज़ी से अपडेट करने में मदद मिलेगी।

उधार देने वाले और उधार लेने वाले के लिए लाभ

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गवर्नर दास ने इस बात पर जोर दिया कि ऋण-संबंधी जानकारी का समय पर खुलासा करने से ऋण देने की प्रक्रिया में शामिल दोनों पक्षों को लाभ होता है। उधारकर्ताओं को अपने क्रेडिट स्कोर अधिक तेज़ी से अपडेट होते दिखाई देंगे, जो नए ऋण के लिए आवेदन करते समय या मौजूदा ऋणों का प्रबंधन करते समय महत्वपूर्ण हो सकता है।

वहीं ऋणदाताओं के पास नए डेटा तक पहुंच होगी, जिससे उन्हें उधारकर्ता जोखिम का अधिक प्रभावी ढंग से मूल्यांकन करने में मदद मिलेगी। इससे नॉन परफॉरमिंग एसेट्स में कमी आ सकती है और ऋण देने वाली संस्थाओं की वित्तीय सेहत बेहतर हो सकती है।

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उपभोक्ता विवादों पर प्रभाव

ट्रांसयूनियन सिबिल के प्रबंध निदेशक और सीईओ राजेश कुमार ने कहा कि क्रेडिट रिकॉर्ड में तेजी से अपडेट होने से उपभोक्ता विवादों का जल्दी समाधान करने में भी मदद मिलेगी। सटीक और समय पर डेटा क्रेडिट रिपोर्ट में विसंगतियों को अधिक कुशलता से संबोधित करने में मदद कर सकता है।

आरबीआई के इस कदम का उद्देश्य क्रेडिट स्कोर को अपडेट करने की प्रक्रिया को सरल बनाना और यह तय करना है कि सभी हितधारकों को उपलब्ध नई जानकारी तक पहुंच प्राप्त हो। इस नए नियम से भारत में क्रेडिट जानकारी के प्रबंधन में कई अच्छे बदलाव आने की उम्मीद है।